तीर्थराज पुष्कर में संपन्न विप्र फाउंडेशन की राष्ट्रीय परिषद् बैठक में हुए द्विवार्षिक चुनाव में डूंगरपुर निवासी डॉ. हर्षा त्रिवेदी को सर्वसम्मति से पुनः इंटरनेशनल सोसायटी फॉर परशुराम कॉन्शसनेस (ISPAC) की इंटरनेशनल चेयरपर्सन चुना गया है। श्रीमती गीता-रामेश्वर त्रिवेदी की पुत्री डॉ. हर्षा वर्तमान में दिल्ली में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं और 11 पुस्तकों की लेखिका हैं। उन्होंने अपने शोध पर आधारित पुस्तक 'भगवान परशुराम: आदर्श, प्रादर्श और प्रतिदर्श' का संपादन भी किया है।

भगवान परशुराम के आदर्शों का वैश्विक प्रसार

इस्पेक (ISPAC) विप्र फाउंडेशन का एक प्रमुख आनुषंगिक संगठन है, जिसका गठन भगवान परशुराम के आदर्शों एवं जीवन चरित्र से जनमानस को अवगत कराने के उद्देश्य से किया गया है। डॉ. त्रिवेदी ने अपने पिछले दो वर्ष के कार्यकाल में भगवान परशुराम से जुड़े अनेक प्राचीन और धार्मिक स्थलों का भ्रमण किया और उनके पुनरुत्थान के लिए समाज के लोगों को निरंतर प्रेरित किया। उनके इन सार्थक प्रयासों का ही सुखद परिणाम है कि आज इस्पेक का विस्तार भारत के साथ-साथ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, जापान और नेपाल जैसे देशों में भी हो चुका है।

वरिष्ठ पदाधिकारियों का आभार एवं भावी संकल्प

इस महत्वपूर्ण दायित्व हेतु डॉ. त्रिवेदी ने विप्र फाउंडेशन के वरिष्ठ पदाधिकारियों एवं संस्थापक श्री सुशील ओझा का आभार व्यक्त किया है। अपने संबोधन में उन्होंने आगामी लक्ष्यों को स्पष्ट करते हुए कहा कि— "भगवान परशुराम के चरित्र और सनातन मूल्यों को वैश्विक रूप से पुनर्प्रतिष्ठित करना संस्था का प्रथम लक्ष्य है।" विप्र फाउंडेशन की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया यह निर्णय डॉ. हर्षा के समर्पण और भगवान परशुराम के विचारों के प्रति उनकी वैचारिक स्पष्टता को दर्शाता है।

Pratahkal Bureau

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