डूंगरपुर की बेटी रोशनी ने रचा इतिहास: GGTU दीक्षांत समारोह में मिला स्वर्ण पदक, बेड़सा में जश्न
डूंगरपुर के बेड़सा की बेटी रोशनी ने GGTU बांसवाड़ा के सप्तम दीक्षांत समारोह में M.Com (ABST) में 90% अंक पाकर स्वर्ण पदक जीता। राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने रोशनी को इस उपलब्धि के लिए सम्मानित किया, जिससे पूरे जिले में खुशी का माहौल है। जानिए रोशनी की इस प्रेरक सफलता की पूरी कहानी और उनके संघर्ष का सफर।

डूंगरपुर। वागड़ अंचल की प्रतिभाओं ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यदि हौसले बुलंद हों और लक्ष्य के प्रति समर्पण हो, तो सफलता के शिखर को छूना कठिन नहीं है। जिले के छोटे से गांव बेड़सा की होनहार छात्रा रोशनी ने गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय (GGTU), बांसवाड़ा में अपनी शैक्षणिक मेधा का परचम लहराते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया है। रोशनी की इस अभूतपूर्व उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे डूंगरपुर जिले को गौरवान्वित किया है, जिससे क्षेत्र के शैक्षणिक हलकों में हर्ष की लहर दौड़ गई है।
बांसवाड़ा स्थित विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित भव्य सप्तम दीक्षांत समारोह के दौरान यह गौरवपूर्ण क्षण तब आया, जब रोशनी को उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए सम्मानित किया गया। राजस्थान के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हरिभाऊ बागड़े ने अपने कर-कमलों से रोशनी को स्वर्ण पदक प्रदान किया। मंच पर जब बेड़सा का नाम गूंजा, तो पूरा पांडाल तालियों की गड़गड़ाहट से सराबोर हो गया। इस गरिमामयी अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति, विभिन्न संकायों के सदस्य, गणमान्य अतिथि और बड़ी संख्या में विद्यार्थी व अभिभावक मौजूद रहे, जो इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने।
बेड़सा निवासी दिलीपसिंह की पुत्री रोशनी ने स्नातकोत्तर स्तर पर M.Com (ABST) परीक्षा वर्ष 2025 में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उन्होंने इस कठिन पाठ्यक्रम में 90 प्रतिशत अंक अर्जित कर विश्वविद्यालय की वरीयता सूची में प्रथम स्थान प्राप्त किया। रोशनी की इस सफलता के पीछे उनकी वर्षों की कड़ी मेहनत और एकाग्रता छिपी है। अपनी उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए रोशनी ने इसका श्रेय अपने माता-पिता के अटूट विश्वास, गुरुजनों के कुशल मार्गदर्शन और अपने निरंतर कड़े परिश्रम को दिया है।
क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि रोशनी जैसी बेटियों की सफलता ग्रामीण अंचल के अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। निहारिका और रोशनी की इस सफलता ने यह संदेश दिया है कि संसाधनों के अभाव के बावजूद दृढ़ संकल्प से किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है। वर्तमान में बेड़सा गांव सहित पूरे डूंगरपुर क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल है और लोग रोशनी के उज्जवल भविष्य की कामना कर रहे हैं। यह स्वर्ण पदक केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि वागड़ की बदलती तस्वीर और महिला सशक्तिकरण का एक जीवंत उदाहरण है।

Pratahkal Bureau
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