राजस्थान के जनजाति अंचल डूंगरपुर में इन दिनों शादियों की भारी धूम से समूचा परिक्षेत्र अलसुबह से लेकर देर रात्रि तक वैवाहिक उत्सव के रंगों में सराबोर नजर आ रहा है। वैवाहिक सीजन के चलते शहर के मुख्य बाजारों में दूल्हा-दुल्हन और उनके परिजनों की भारी भीड़ ने व्यापारिक रौनक को चरम पर पहुंचा दिया है। आलम यह है कि शहर के सर्राफा, कपड़ा और मनिहारी की दुकानों पर पैर रखने तक की जगह शेष नहीं बची है। हालांकि, बदलते परिवेश के कारण पूर्व की भांति पारंपरिक लोक गीतों की स्वर लहरियां अब इक्का-दुक्का स्थानों पर ही सुनाई देती हैं, जबकि उनके स्थान पर देर रात्रि तक वैवाहिक घरों में डीजे की थाप पर झूमते युवक-युवतियों का उल्लास दिखाई दे रहा है।

बाजारों में खरीदारी का सिलसिला सूरज की पहली किरण के साथ ही प्रारंभ हो जाता है, जब ग्रामीण क्षेत्रों से परिवार अपने रिश्तेदारों के साथ खरीदारी के लिए उमड़ पड़ते हैं। दिनभर दूल्हा-दुल्हन के लिए जेवरात, वस्त्र और मनिहारी सामग्री के चयन में व्यस्तता बनी रहती है। शादियों की इस बहुतायत के कारण पुराने शहर के सर्राफा बाजार, माणक चौक, कानेरा पोल, धनलक्ष्मी मार्केट, गैप सागर की पाल और नई मार्केट सहित अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में ग्राहकों की भारी आवक से दुकानों के साथ-साथ गलियां भी अटी पड़ी हैं, जिससे कई बार यातायात व्यवस्था भी बाधित हो रही है।

एक ओर जहां सावों की धूम से व्यापार बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। ईरान, इजराइल और अमेरिका के मध्य युद्ध के कारण समुद्री मार्ग बाधित होने से गैस की किल्लत और खाद्य पदार्थों की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिसका सीधा प्रभाव हलवाई, वाटिकाओं और बैंडबाजों की दरों पर पड़ा है। इसके अतिरिक्त, आसमान छूती सोने-चांदी की कीमतों ने मध्यम और निम्न वर्ग की कमर तोड़ दी है, जिससे पूर्व की तुलना में खरीदारी घटकर आधी रह गई है। बढ़ते आर्थिक भार को देखते हुए कई समाजों ने वैवाहिक खर्चों में कटौती का निर्णय लिया है। इस गहमागहमी के बीच बारात ले जाने वाली बसों के संचालक भी सीजन का भरपूर लाभ उठाते हुए मनमाना किराया वसूल रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोग दिनभर की खरीदारी के बाद पोटलियां थामे अपने गंतव्य की ओर लौटते देखे जा रहे हैं, जो इस सीजन की व्यस्तता और आर्थिक जद्दोजहद की जीवंत तस्वीर पेश कर रहे हैं।

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