डूंगरपुर। वागड़ अंचल की राजनीति के लिए वर्ष 2025 ने कई गंभीर सवाल छोड़ दिए हैं। क्षेत्रीय और राष्ट्रीय नेताओं के बिगड़े बोल, आपसी तकरार और भ्रष्टाचार ने आमजन की उम्मीदों को ध्वस्त कर दिया। यह वह समय है जब वागड़ की जनता, जो कभी गांधीवादी विचारों के नेतृत्व में शिक्षा, रोजगार और मूलभूत सुविधाओं के लिए उत्साहित थी, अब राजनीतिक खेल और स्वार्थ की भेंट चढ़ती नजर आ रही है।

स्वतंत्रता के बाद भोगीलाल पंड्या, गौरीशंकर उपाध्याय, भिखा भाई, नाथूराम अहारी और महेंद्र परमार जैसे कांग्रेस नेता वागड़ के विकास की बागडोर संभाल चुके हैं। उन्होंने शिक्षा और रोजगार को प्राथमिकता देते हुए क्षेत्र के 36 कोमो के विकास की दिशा में उल्लेखनीय योगदान दिया। तत्कालीन नेताओं ने राजनीतिक भेदभाव से ऊपर उठकर सभी वर्गों में समानता और आपसी अपनत्व की भावना कायम की। इसी एकता के कारण वर्ष 2000 तक वागड़ ने कई विकास योजनाओं को मूर्त रूप दिया और जनजाति क्षेत्र ने शिक्षा, उद्योग और अन्य क्षेत्रों में देश-विदेश में अपनी पहचान बनाई।

वर्ष 2025 तक आते-आते राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। यहां के नेताओं ने विकास की दिशा को गौण कर, स्वार्थ और गुटबाजी की राजनीति को प्राथमिकता दी। जिले में बीजेपी और कांग्रेस के अलावा एक क्षेत्रीय दल के उदय ने नफरत और विखंडन के बीज बो दिए। अब क्षेत्रीय विकास बैठकों में भी आपसी धमकियां आम हो गई हैं। जिला प्रशासन के आला अधिकारी इस राजनीतिक तकरार का फायदा उठाते हुए न केवल बैठकों में गुटबाजी देख कर प्रसन्न हैं, बल्कि सांसद और विधायकों के साथ अलग गुट बना कर नए समीकरण बनाने में भी व्यस्त हैं।

इस स्थिति का परिणाम यह हुआ कि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा भ्रष्टाचार के खुले पिटारे पर कोई चर्चा नहीं होती और राजनेता आपस में भिड़कर विकास की मूल बातें भूल जाते हैं। स्थानीय सत्ताधारी नेताओं की आपसी खींचतान का फायदा उठा कर प्रशासन वर्षों से विकास के लिए आए पैसों का जमकर दुरूपयोग कर रहा है। राजीविका मिशन, नरेगा, चैक दम, एनीकट, सड़क निर्माण, जल जीवन मिशन, स्वास्थ्य सेवाओं में एनआरएचएम सहित पंचायती राज के तहत धन का वितरण होते हुए भी मौके पर बंजर भूमि ही नजर आती है।

वागड़ की जनता अब पूरी तरह टूट चुकी है। राजनीतिक स्वार्थ और गुटबाजी के कारण क्षेत्र में अपराध की दर बढ़ी है। दिन ढलने के बाद प्रमुख मार्गों से गुजरना असुरक्षित हो गया है और कई परिवार पत्थरबाजों की घटनाओं से पीड़ित हैं। यदि नेताओं ने अपनी स्वार्थ नीति नहीं छोड़ी, तो वागड़ अंचल का यह जनजाति क्षेत्र भविष्य में अशांत क्षेत्र की श्रेणी में शामिल हो सकता है।

इसी खट्टी-मीठी यादों और घटनाओं के बीच वर्ष 2025 समाप्त हुआ, और वागड़ की जनता अब नए वर्ष में राजनीतिक जवाबदेही और वास्तविक विकास की उम्मीदों के बीच खड़ी है।

Pratahkal Bureau

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