डूंगरपुर: पंचायती राज विभाग में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप
डूंगरपुर में सरकारी योजनाओं में धांधली और निर्माण कार्यों में अनियमितताओं को लेकर स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल।

डूंगरपुर। वागड़ अंचल का डूंगरपुर जिला लंबे समय से राजनीतिक उपेक्षा और प्रशासनिक उदासीनता का दंश झेल रहा है। सत्तापक्ष और विपक्ष के लिए यह क्षेत्र केवल राजनीतिक लाभ का साधन बनकर रह गया है, जहां की भोली-भाली जनता को वादों के जाल में उलझाकर छला जा रहा है। इस प्रशासनिक निष्क्रियता का लाभ उठाकर सरकारी तंत्र में बैठे अधिकारी और कर्मचारी अपनी मनमर्जी से सरकारी योजनाओं को संचालित कर रहे हैं, जिससे जनहित के मुद्दे पूरी तरह गौण हो गए हैं।
जिले में पंचायती राज विभाग सर्वाधिक बजट आवंटन वाला विभाग होने के बावजूद भ्रष्टाचार का केंद्र बन चुका है। यहां तैनात कर्मचारी स्वयं अपने परिजनों के नाम से सरकारी ठेके हासिल कर रहे हैं। एनिकट निर्माण, छींच डेम, राजीविका मिशन के तहत संचालित योजनाएं, तालाबों का सुदृढ़ीकरण, सड़क निर्माण और सार्वजनिक उपक्रमों के कार्य या तो आधे-अधूरे पड़े हैं या फिर बेहद घटिया सामग्री से निर्मित किए गए हैं, जो अपनी गुणवत्ता की पोल समय से पहले ही खोल देते हैं। बावजूद इसके, कागजों में संपूर्ण बजट खर्च होना दर्शा दिया जाता है।
प्रशासनिक लापरवाही का आलम यह है कि वित्तीय अनियमितता और घोटालों के प्रमाण सामने आने के बाद भी संबंधित दोषियों के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती। कई ऐसे कर्मचारी हैं जो वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं। रसूख और उच्च अधिकारियों की मेहरबानियों के चलते तबादले के आदेश होने के बावजूद उन्हें रिलीव नहीं किया जा रहा है। सिद्ध आरोपों के बाद भी इन कार्मिकों पर संरक्षण का साया बना हुआ है, जिससे वागड़ अंचल का वास्तविक विकास केवल फाइलों और कागजों तक सिमट कर रह गया है। शासन और प्रशासन की इस मूक सहमति और अनदेखी का सीधा खामियाजा जिले की आम जनता को उठाना पड़ रहा है, जो आज भी बुनियादी सुविधाओं से महरूम है।

