डूंगरपुर में पंचायती राज चुनाव से पहले बढ़ी सियासी सरगर्मी, जनसमस्याएं बनीं मुद्दा
वागड़ अंचल के डूंगरपुर जिले में बुनियादी सुविधाओं के अभाव और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी दल सक्रिय, त्रिकोणीय मुकाबले के आसार।

पंचायती राज चुनावों की सुगबुगाहट के बीच वागड़ अंचल में राजनीतिक गतिविधियों में तेजी आ गई है। विपक्षी दल जनसमस्याओं को लेकर सक्रिय होते दिखाई दे रहे हैं। यह बात सुधीर जैन ने कही।
वागड़ अंचल का डूंगरपुर जिला, जो जनजाति क्षेत्र के रूप में अधिकृत है, जहां सभी चारों विधानसभा सीटें आरक्षित हैं, आजादी के बाद से विकास के लिए प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए का बजट प्राप्त होने के बावजूद मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझता रहा है। जिले में बिजली, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी बुनियादी आवश्यकताओं की कमी को लेकर स्थिति लगातार बनी हुई है। यहां की जनता लंबे समय से इन्हीं अभावों के बीच संतुलन बनाकर जीवन यापन कर रही है।
स्थानीय परिदृश्य में यह भी उल्लेखनीय रहा कि वागड़ अंचल में आजादी के बाद और पंचायती राज की स्थापना के साथ सीमित बजट व संसाधनों के बावजूद सोम-कमला-अम्बा बांध, गालियाना डेम, मार्गीया बांध, हारकडा सहित कई महत्वपूर्ण जल संरचनाओं का निर्माण हुआ, जिनसे सिंचाई और पेयजल आपूर्ति के प्रमुख स्रोत विकसित हुए। इनमें डिमिया व एडवर्ड समन जैसे प्रमुख पेयजल स्रोत भी शामिल रहे।
हालांकि वर्तमान में राजनीतिक द्वेष और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों के बीच विकास कार्यों के लिए आने वाला धन कथित रूप से प्रशासनिक अधिकारियों की मनमानी का शिकार हो रहा है। करोड़ों रुपए की लागत से निर्मित सड़कें, एनीकट, स्कूल भवन, छात्रावास सहित अन्य सार्वजनिक निर्माण कार्य कुछ ही समय में जर्जर होने की स्थिति में पहुंच रहे हैं।
जिले की राजनीतिक स्थिति तीन प्रमुख धड़ों में विभक्त बताई जा रही है। यहां भाजपा नेतृत्वहीन स्थिति में बताई जा रही है, जबकि कांग्रेस और एक क्षेत्रीय दल पर राजनीतिक गतिविधियों के माध्यम से जनता को साधने के प्रयासों के आरोप लगाए जा रहे हैं। आगामी कुछ महीनों में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव प्रस्तावित हैं, जिसके चलते राजनीतिक सक्रियता और बढ़ गई है।
भीषण गर्मी के इस दौर में जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली संकट, चिकित्सालयों में डॉक्टरों की कमी तथा तीन से चार दिनों के अंतराल पर पेयजल आपूर्ति जैसी समस्याएं आम बनी हुई हैं। घंटों बिजली गुल रहने और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी से जनता परेशान बताई जा रही है।
इसी बीच विपक्षी दलों की सक्रियता भी बढ़ी है, जिसे स्थानीय स्तर पर राजनीतिक दिखावा बताया जा रहा है। आम जनता के अनुसार राजनीतिक प्रभाव के अभाव में अधिकारी और कर्मचारी मनमानी पर आमादा हैं, जबकि सत्तारूढ़ दल के भीतर गुटबाजी के चलते जनता की समस्याएं नेतृत्व तक प्रभावी रूप से नहीं पहुंच पा रही हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच वागड़ अंचल में चुनावी माहौल के साथ जनसमस्याओं और विकास कार्यों की स्थिति एक बार फिर राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ गई है।

Pratahkal Bureau
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