डूंगरपुर नगर परिषद में आयुक्त सहित पांच कार्मिकों के तबादलों के बाद आमजन ने राहत की उम्मीद जताई है। निर्माण स्वीकृति, पट्टे, म्यूटेशन, भूमाफियाओं से जुड़े आरोपों और संपत्तियों की जांच की मांग के बीच अब सभी की नजर इस बात पर है कि स्थानांतरण आदेश कितनी जल्दी प्रभावी होते हैं।

डूंगरपुर। राज्य सरकार द्वारा हाल ही में प्रदेश भर के विभिन्न विभागों के कार्मिकों के तबादले जारी किए गए, जिनमें डूंगरपुर नगर परिषद के उन अधिकारियों और कार्मिकों के भी स्थानांतरण शामिल हैं, जिनसे आम जनता लंबे समय से परेशान बताई जा रही थी। निर्माण स्वीकृति, पट्टे बनाना, म्यूटेशन सहित कई कार्यों के लिए लोगों को नगर परिषद के लगातार चक्कर लगाने पड़ते थे। आरोप है कि राज्य सरकार द्वारा निर्धारित शुल्क से अधिक राशि देने के बावजूद भी इन कार्यों को पूरा होने में 6 से 10 महीने तक का समय लग जाता था।

समाचार के अनुसार, आमजन के बीच यह भी आरोप रहे कि भूमाफियाओं के कार्य तत्काल हो जाते थे। यहां तक कि उनके कार्मिक भी परिषद में ही बैठे रहते थे। कई बार जनता ने इस व्यवस्था को लेकर हंगामा भी किया, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। बताया गया है कि संबंधित सभी कार्मिक पिछले एक दशक से यहीं जमे हुए थे तथा उनकी हैसियत इस स्तर तक बढ़ गई थी कि वे अपने परिजनों के नाम पर ठेके लेकर ठेकेदारी भी करते थे।

समाचार में नगर परिषद के कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए हैं। दावा किया गया है कि शहर की कई गलियों की सड़कें वर्ष में दो से तीन बार बनाई जाती हैं। इसके अलावा पैचवर्क के माध्यम से राजस्व को सीधा नुकसान पहुंचाने के आरोप भी लगाए गए हैं। यह भी कहा गया है कि सत्ता पक्ष के नेता भी उनके आगे नतमस्तक थे तथा स्वायत्त शासन विभाग के मंत्रियों का भी उन्हें आशीर्वाद प्राप्त था, जिसके कारण वे आम जनता को कभी तवज्जो नहीं देते थे।

आरोप यह भी हैं कि अपने चहेते कार्मिकों को एक साथ तीन-तीन मलाईदार विभाग सौंप दिए जाते थे, ताकि हर प्रकार का समायोजन एक ही छत के नीचे हो सके।

हाल ही में जारी स्थानांतरण आदेशों में आयुक्त सहित पांच कार्मिकों का स्थानांतरण किया गया है। इनमें एक सहायक अभियंता को दूसरी बार एपीओ किया गया है। समाचार के अनुसार, इन कार्मिकों के क्रियाकलापों के कारण गैप सागर जलाशय के सभी जल आवक मार्गों को पाट दिया गया, जहां अधिकांश भूमि भूमाफियाओं की बताई गई है।

नागरिकों का कहना है कि जैसे ही उन्हें इन कार्मिकों के स्थानांतरण संबंधी आदेशों की जानकारी मिली, उन्होंने राहत की सांस ली। उनका मानना है कि राज्य सरकार ने समाचार पत्रों एवं अन्य खुफिया जानकारियों के आधार पर इन कार्मिकों के क्रियाकलापों को देखते हुए कार्रवाई की है। साथ ही नागरिकों ने उन कार्मिकों की संपत्तियों की जांच की भी मांग की है, जिन पर कई जमीनों की नीलामी में घोटाले करने के आरोप लगाए गए हैं। अब यह देखना होगा कि जारी स्थानांतरण आदेश कितनी जल्दी प्रभावी होते हैं।

Pratahkal Newsroom

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