भीषण गर्मी के इस प्रचंड दौर में जहां पारा आसमान छू रहा है, वहीं डूंगरपुर जिला मुख्यालय पर राहगीरों और ग्रामीणों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से समाजसेवी हरीश मेहता ने एक ऐसी अनूठी और अनुकरणीय परंपरा का सूत्रपात किया है, जिससे हर प्यासा हलक अपनी प्यास बुझाकर असीम सुकून प्राप्त कर रहा है। समाजसेवी हरीश मेहता की यह अनूठी पहल आज शहर के हर कोने में आमजन के लिए संजीवनी साबित हो रही है। अपनी सामाजिक प्रतिबद्धता का परिचय देते हुए मेहता न केवल तय स्थानों पर, बल्कि जन समस्याओं को लेकर कलेक्ट्रेट एवं अन्य सरकारी कार्यालयों व स्थानों पर पहुंचने वाले ग्रामीणों को भी, पानी की किल्लत की सूचना मिलते ही तत्काल वहां पहुंचकर राहत प्रदान करने का अनुकरणीय कार्य कर रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, समाजसेवी हरीश मेहता विगत दो माह से लगातार शहर के विभिन्न प्रमुख स्थानों पर मुस्तैदी से जुटे हुए हैं। दरअसल, जिला मुख्यालय पर अपने निजी व आवश्यक कार्यों से आने वाले ग्रामीण और आम नागरिक भीषण गर्मी के कारण पानी के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर हो जाते थे और अंततः थक-हारकर उन्हें बाजार से महंगे दामों पर पानी खरीदकर अपनी प्यास बुझानी पड़ती थी। आमजन की इसी विवशता और पीड़ा को भांपते हुए मेहता ने पिछले दो महीनों से एक सुव्यवस्थित बीड़ा उठाया है। वे प्रतिदिन अलसवेरे अपने निजी वाहन से पानी के कैंपर भरकर उनके द्वारा शहर में स्थापित किए गए विभिन्न प्याऊ केंद्रों पर रख आते हैं। इतना ही नहीं, वे दिनभर इन सभी प्याऊ केंद्रों की निरंतर निगरानी भी करते हैं और जैसे ही कोई कैंपर खाली होता है, उसे तुरंत दोबारा भर देते हैं।

समाजसेवा का यह कारवां केवल चौक-चौराहों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि शहर के आस-पास स्थित कुछ विद्यालय भवनों पर भी उन्होंने पेयजल उपलब्धता के सेवा कार्य को पूरी निष्ठा के साथ अंजाम दिया है। आज के इस दौर में जहां कई स्वयंसेवी संस्थाएं धरातल पर कम काम करके महज सुर्खियों और प्रचार-प्रसार में बने रहने का प्रयास करती हैं, वहीं दूसरी ओर बिना किसी प्रचार के धरातल पर काम कर रहे हरीश मेहता का यह जज्बा मिसाल पेश कर रहा है। यही कारण है कि बाहर से आने वाले ग्रामीणजन और स्थानीय शहरी बाशिंदे उनके इस पुनीत कार्य एवं जज्बे की मुक्तकंठ से सराहना कर रहे हैं। इस भीषण ताप में राहगीरों को पेयजल उपलब्ध कराता हरीश मेहता का यह चलता-फिरता प्याऊ मानवीय संवेदनाओं और सेवा भावना का जीवंत प्रतीक बनकर उभरा है।

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