डूंगरपुर: डीएनटी समुदाय ने 10% अलग से आरक्षण की मांग को लेकर निकाला जुलूस
राजस्थान के वागड़ क्षेत्र में राष्ट्रीय पशुपालक संघ के नेतृत्व में 'जेल भरो आंदोलन' के तहत कलेक्ट्रेट पर सांकेतिक गिरफ्तारियां दी गईं और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

राजस्थान के डूंगरपुर जिले में विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू (डीएनटी) समुदाय ने अपने अस्तित्व और अधिकारों की लड़ाई को तेज करते हुए 10 प्रतिशत अलग से आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग को लेकर एक बड़ा और आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन किया है। राष्ट्रीय पशुपालक संघ और डीएनटी संघर्ष समिति के तत्वावधान में आयोजित इस विरोध-प्रदर्शन के दौरान न केवल शहर की सड़कों पर विशाल रैली निकाली गई, बल्कि कलेक्ट्रेट पर सांकेतिक गिरफ्तारियां देकर अपनी गंभीर प्रतिबद्धता को भी दर्शाया गया।
आंदोलन की शुरुआत में समुदाय के सैकड़ों सदस्य शहर की वागड़ गांधी वाटिका पर एकत्रित हुए, जहां से अपनी बुलंद आवाजों और 11 सूत्रीय मांगों के साथ उन्होंने कलेक्ट्रेट तक एक विशाल रैली निकाली। कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को अपनी मांगों का एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
यह उग्र प्रदर्शन वर्तमान में प्रदेशभर में चलाए जा रहे 'जेल भरो आंदोलन' का हिस्सा है, जिसकी गूंज अब वागड़ क्षेत्र में भी पूरी ताकत के साथ पहुंच गई है। इस पूरे आंदोलन का नेतृत्व राष्ट्रीय पशुपालक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालजी राईका कर रहे हैं।
इस दौरान लालजी राईका ने प्रशासनिक उदासीनता पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए बताया कि 5 दिसंबर 2025 को सरकार के समक्ष इन मांगों को लेकर एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई थी। उस समय सरकार ने इन सभी मांगों को उचित ठहराया था और उचित निर्णय लेने के लिए तीन महीने का समय मांगा था। आंदोलनकारियों का सीधा आरोप है कि इस आश्वासन को अब चार से पांच महीने बीत चुके हैं, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक कोई भी सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सरकार की इसी उपेक्षापूर्ण और टालमटोल वाली नीति के बाद राष्ट्रीय पशुपालक संघ और डीएनटी संघर्ष समिति का गठन कर इस व्यापक आंदोलन का बिगुल फूंका गया है। समुदाय ने अब सरकार को दोटूक शब्दों में अंतिम चेतावनी दी है कि यदि उनकी जायज मांगें जल्द ही पूरी नहीं की गईं, तो आगामी 1 जुलाई को प्रांतीय राजधानी जयपुर में ऐतिहासिक महापड़ाव डाला जाएगा। इस आंदोलन ने अब एक निर्णायक मोड़ ले लिया है, जिससे आने वाले दिनों में राजस्थान की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ी हलचल मचनी तय मानी जा रही है।

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