डूंगरपुर में मूलभूत सुविधाओं की बदहाली और प्रशासनिक भ्रष्टाचार के आरोप
मुख्यमंत्री के दौरे से पहले डूंगरपुर में पंचायती राज, नगर परिषद, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं में अनियमितताओं को लेकर स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है।

वागड़ अंचल का डूंगरपुर जिला राजनीतिक दलों के लिए केवल उपयोग का साधन बनकर रह गया है, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष पर क्षेत्र की भोलीभाली जनता को छलने के आरोप लग रहे हैं। जिले में मूलभूत सुविधाओं की बदहाली, पंचायती राज संस्थाओं में कथित भ्रष्टाचार, नरेगा कार्यों में अनियमितताओं और प्रशासनिक निष्क्रियता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सुधीर जैन ने आरोप लगाया कि सरकारी विभागों में बैठे प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी सरकारी योजनाओं को जनहित के बजाय निजी स्वार्थों के आधार पर संचालित कर रहे हैं, जिससे वागड़ अंचल का विकास केवल कागजों तक सीमित रह गया है।
आरोप है कि पंचायती राज विभाग, जहां सबसे अधिक बजट आवंटित होता है, वहां कर्मचारी अपने परिजनों के नाम से ठेके उठाकर निर्माण कार्य करवा रहे हैं। एनिकट, छींच डेम, राजीविका मिशन के तहत संचालित कार्य, तालाबों का सुदृढ़ीकरण, सड़क निर्माण और सार्वजनिक उपक्रमों से जुड़े अधिकांश निर्माण कार्य अधूरे छोड़ दिए जाते हैं, जबकि पूरा बजट खर्च होना दर्शा दिया जाता है। कई निर्माण कार्य घटिया गुणवत्ता के कारण कुछ ही समय में क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। इन मामलों में शिकायतें और दोष सिद्ध होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने के आरोप लगाए गए हैं। बताया गया कि कई कर्मचारी वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं। तबादले होने के बावजूद अधिकारियों की मेहरबानी से उन्हें रिलीव नहीं किया जाता और वे मनमर्जी से विभागों का संचालन कर रहे हैं।
डूंगरपुर की बिजली, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है। कभी बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पहचाने जाने वाले डूंगरपुर में आज मेडिकल कॉलेज होने के बावजूद आमजन सामान्य चिकित्सालय की ओर जाने से बचता है। अस्पतालों में करोड़ों रुपए के उपकरण लगे होने के बावजूद उन्हें संचालित करने वाले विशेषज्ञों की कमी बनी हुई है। जांच रिपोर्टों पर लोगों का भरोसा कम हो गया है और कई उपकरण बंद कमरों में पड़े हुए हैं। इसके चलते गरीब से लेकर आर्थिक रूप से संपन्न लोग भी उपचार के लिए गुजरात का रुख कर रहे हैं। आरोप है कि भाजपा, कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के जनप्रतिनिधियों ने इस समस्या पर गंभीरता नहीं दिखाई।
जिले में बिजली व्यवस्था भी चरमराई हुई बताई जा रही है। जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक घंटों बिजली कटौती आम हो चुकी है। ग्रामीण इलाकों में 24 घंटे में छह घंटे से अधिक बिजली नहीं मिलने के आरोप लगाए गए हैं। इससे विद्युत उपकरण प्रभावित हो रहे हैं और आमजन को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। बिजली आपूर्ति बाधित होने से पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। पर्याप्त जल स्रोत होने के बावजूद तीन से चार दिन में पानी की सप्लाई हो रही है और वह भी कम दबाव के कारण घरों तक नहीं पहुंच पा रही। आंदोलन और विरोध के बावजूद समाधान नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
नगर परिषद डूंगरपुर की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। लगभग तीन दशकों से भाजपा का बोर्ड होने के बावजूद आमजन को राहत नहीं मिलने की बात कही गई है। नामांतरण, एकीकरण, उपविभाजन, भवन निर्माण स्वीकृति और स्टेट ग्रांट के पट्टों के लिए लोगों को लंबे समय तक भटकना पड़ता है। आरोप है कि भूमाफियाओं और दलालों के माध्यम से आने वाले कार्य ही समय पर निपटाए जाते हैं, जबकि आम आदमी कार्यालयों के चक्कर काटता रहता है। कुछ कर्मचारियों पर अपने परिजनों के नाम से मोटी रकम लेकर कार्य करवाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
नगर परिषद में नियमों के विपरीत कई कक्षों में एसी लगाए जाने का मामला भी सामने आया है। गाइडलाइन के अनुसार केवल 6600 ग्रेड पे वाले अधिकारियों के कक्षों में एसी की अनुमति होने के बावजूद स्टोर, लेखा शाखा, जन्म-मृत्यु पंजीयन, भंडार, कनिष्ठ अभियंता और सहायक अभियंता सहित कई शाखाओं में एसी संचालित होने के आरोप लगाए गए हैं। इसे सरकारी धन के दुरुपयोग से जोड़ते हुए सवाल उठाए गए हैं कि जहां नालियों की सफाई और विद्युत व्यवस्था जैसे जनहित कार्यों के लिए धनाभाव बताया जाता है, वहीं कार्यालयों में सुविधाओं पर खर्च किया जा रहा है। फिल्टर प्लांट से लाखों लीटर पानी व्यर्थ बहने के बावजूद उसके समुचित उपयोग के लिए कोई पहल नहीं होने का भी आरोप लगाया गया है।
मुख्यमंत्री के प्रस्तावित डूंगरपुर दौरे से पहले जिले की बदहाल स्थिति, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और मूलभूत सुविधाओं की समस्याओं को लेकर अब जनता की नजरें सरकार और प्रशासन पर टिकी हुई हैं।

Pratahkal Bureau
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