राजस्थान के डूंगरपुर स्थित महात्मा गांधी टाउन स्कूल में 'ऋषभ पखवाड़े' के अंतर्गत आयोजित भव्य धर्म सभा में आचार्य श्री मृदुरत्न सागर जी महाराज ने संस्कारों और धर्म की महत्ता पर विशेष प्रकाश डाला। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड बीकानेर के निर्देशानुसार भगवान ऋषभदेव के जन्म कल्याणक के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में आचार्य श्री ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि धर्म मात्र अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन में आने वाले समस्त संकटों के निराकरण का अमोघ अस्त्र है। उन्होंने वर्तमान युवा पीढ़ी को सचेत करते हुए कहा कि केवल आधुनिक शिक्षा पर्याप्त नहीं है; युवाओं को अपने कर्तव्य पथ पर सही मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए शिक्षा के साथ-साथ धर्म और संस्कृति को आत्मसात करना होगा।

आचार्य श्री ने भगवान ऋषभदेव के कालजयी उपदेशों का संदर्भ देते हुए बालक-बालिकाओं को प्रेरित किया कि मनुष्य को विषम से विषम परिस्थितियों में भी कभी धर्म का मार्ग नहीं त्यागना चाहिए। उन्होंने जीवन उत्थान के लिए पांच मूलभूत सिद्धांतों के पालन पर बल दिया, जो व्यक्ति को नैतिक और आध्यात्मिक रूप से सुदृढ़ बनाते हैं। विद्यालय परिसर पहुंचने पर संस्था प्रधान रेणुका शर्मा, डाइट व्याख्याता धर्मेश जैन एवं समस्त विद्यालय परिवार ने आचार्य श्री की सविधि आगवानी की। भ्रमण के दौरान आचार्य श्री ने विद्यालय भवन की उत्कृष्ट व्यवस्थाओं की मुक्तकंठ से सराहना की।

इस गरिमामयी धर्म सभा में युवक महासंघ के अध्यक्ष विवेक दोषी, महामंत्री मिलन पटवा, विशा पोरवाड़ नवयुवक मंडल के अध्यक्ष नितेश मेहता सहित पवन दोषी, हितेश दावड़ा, नरेश मेहता, आलोक शाह, जतिन दोषी, भाविक सरैया और दीपक गांधी जैसे गणमान्य समाजजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में जैनेन्द्र तारावत ने सभी आगंतुकों और प्रतिभागियों का आभार ज्ञापित किया। यह आयोजन शिक्षा जगत और धर्म के समन्वय का एक अनूठा उदाहरण बनकर उभरा, जिसने विद्यार्थियों को संस्कारवान जीवन जीने की नई दिशा प्रदान की।

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