डूंगरपुर। धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना को समृद्ध करने के उद्देश्य से आचार्य श्री मुदुरत्न सागर जी का बुधवार को डूंगरपुर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। गामड़ी आहाड़ा से विहार कर तहसील चौराहा होते हुए आचार्य श्री का स्वागत श्री जैन श्वेतांबर विशा पोरवाल संघ द्वारा गाजे-बाजे के साथ किया गया। इस अवसर पर आचार्य श्री ने औटा स्थित नेमीनाथ मंदिर में प्रवेश कर पुण्य प्रवचन हॉल में धर्मप्रेमियों को संबोधित किया।

आचार्य श्री मुदुरत्न सागर जी ने कहा कि मनुष्य भव मिलने के पश्चात समय-समय पर साधु-संतों का सानिध्य प्राप्त करना न केवल धर्म के प्रभाव को बढ़ाता है, बल्कि नव पीढ़ी में संस्कारों का बीज भी रोपित करता है। उन्होंने वर्तमान परिपेक्ष में पाश्यात संस्कृति के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए युवाओं को धर्म के मर्मज्ञों से रूबरू कराना आवश्यक बताया। उनका स्पष्ट संदेश था कि तभी हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर सुरक्षित रह सकती है।

इस अवसर पर मुनि पवित्ररत्न सागर जी भी साथ थे। आचार्य श्री और मुनि पवित्ररत्न सागर जी बुधवार शाम डूंगरपुर से खेड़ा में रात्रि विश्राम हेतु प्रस्थान करेंगे और गुरुवार प्रातः पुनाली के लिए पूंजपुर की ओर विहार करेंगे।

भव्य प्रवेश में महासंघ के अध्यक्ष संजय मेहता, संघ के सचिव मोहित मेहता, वीरेंद्र मेहता, राजेंद्र भामवत, प्राणजीवन शाह, अनिल मेहता, अभय मेहता, कनक मेहता, बंटू शाह, नवयुवक मंडल के रियान जैन, राजकुमार शाह, निकुंज शाह, भाविक मेहता और मानवेंद्र जैन सहित महिलाएं उपस्थित रहीं। उनके स्वागत और सहभागिता से आयोजन की भव्यता और बढ़ गई।

डूंगरपुर में आचार्य श्री के इस मंगल प्रवेश ने न केवल धार्मिक भावनाओं को जागृत किया, बल्कि समाज में संस्कारों और धर्म के प्रति नव पीढ़ी में जागरूकता बढ़ाने का संदेश भी दिया। साधु-संतों के सानिध्य में यह आयोजन स्थानीय समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत बनकर उभरा।

Pratahkal Bureau

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