डूंगरपुर के आकाश में सप्तरंगी पतंगों का महासंग्राम, आस्था और उमंग के साथ मनेगा मकर संक्रांति का महापर्व
डूंगरपुर में मकर संक्रांति पर्व को लेकर भारी उत्साह! बुधवार को सप्तरंगी पतंगों से सजेगा आसमान। बाजारों में तिलपट्टी की महक और पतंगों की खरीदारी के लिए उमड़ी भीड़। प्रशासन की रोक के बावजूद चाइनीज मांझे की ऊंची कीमतों पर बिक्री जारी। जानिए कैसे दान-पुण्य और पतंगबाजी के संगम से सराबोर होगा पूरा डूंगरपुर जिला।

डूंगरपुर। वागड़ की धरा पर आस्था और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है क्योंकि बुधवार को जिले सहित समूचे डूंगरपुर शहर में मकर संक्रांति का पर्व पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। सूर्य के उत्तरायण होने के इस पावन अवसर पर नभ मंडल सप्तरंगी पतंगों से पट जाएगा, वहीं दूसरी ओर दान-पुण्य की सरिता भी प्रवाहित होगी। पर्व को लेकर क्या युवा, क्या बुजुर्ग और क्या महिलाएं, सभी के चेहरे पर एक विशेष चमक दिखाई दे रही है। शहर की तंग गलियों से लेकर ग्रामीण अंचलों के खुले मैदानों तक, हर तरफ मकर संक्रांति की पूर्व संध्या पर उत्सव जैसा माहौल नजर आया।
उत्सव की तैयारियों ने घरों की रसोई से लेकर शहर के मुख्य बाजारों तक दस्तक दे दी है। एक तरफ जहां घरों में महिलाओं द्वारा तैयार की जा रही तिलपट्टी और गजक की सोंधी खुशबू वातावरण को आनंदित कर रही है, वहीं दूसरी ओर बाजारों में पतंग और डोर खरीदने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं में इस बार भारी उत्साह देखा जा रहा है, जो खुले आसमान के नीचे पतंगबाजी का लुत्फ उठाने के लिए मंगलवार देर रात तक दुकानों पर डटे रहे। विक्रेताओं ने भी ग्राहकों की पसंद का ख्याल रखते हुए 5 रुपये से लेकर 100 रुपये तक की आकर्षक पतंगों का स्टॉक सजाया है।
हालांकि, इस उल्लास के बीच एक चिंताजनक पहलू भी सामने आया है। प्रशासन द्वारा कड़े प्रतिबंध के दावों के बावजूद बाजार में जानलेवा चाइनीज मांझे की बिक्री चोरी-छिपे धड़ल्ले से जारी है। वर्तमान में यह प्रतिबंधित डोर 700 से 1000 रुपये तक की ऊंची कीमतों पर बिक रही है, और मांग को देखते हुए इसके दामों में और अधिक उछाल आने की संभावना है। विडंबना यह है कि न तो आमजन की मार्मिक अपीलों का असर हो रहा है और न ही धरातल पर प्रशासनिक सख्ती नजर आ रही है, जिससे परिंदों और राहगीरों की सुरक्षा दांव पर लगी है।
बुधवार को सूर्योदय के साथ ही डूंगरपुर की छतों पर युवाओं की टोलियां 'वो काटा' के शोर के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगी। पतंगबाजी के इस रोमांच के समांतर, यह दिन आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। बुजुर्गों और महिलाओं द्वारा सुबह से ही मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर गायों को घास खिलाने और जरूरतमंदों को दान देने का सिलसिला शुरू होगा। श्रद्धा, उल्लास और मिठास का यह संगम डूंगरपुर की सांस्कृतिक विरासत को एक बार फिर जीवंत करने के लिए तैयार है।

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