शिरपुर-शहादा मार्ग पर 60 किमी में 50 गतिरोधक, सफर बना मुश्किल; हादसों का भी खतरा
महाराष्ट्र के शिरपुर-शहादा मार्ग पर महज 60 किलोमीटर में 50 गतिरोधक होने से वाहन चालकों की परेशानी बढ़ गई है। शिरपुर से त-हाडी के 20 किलोमीटर में 18 गतिरोधकों के बीच सुरक्षा, दूरी और उचित नियोजन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

शिरपुर-शहादा मार्ग पर बिना चेतावनी संकेतकों के बनाया गया गतिरोधक।
महाराष्ट्र के शिरपुर-शहादा मार्ग पर महज 60 किलोमीटर की दूरी में 50 गतिरोधक बनाए जाने से वाहन चालकों की परेशानी बढ़ गई है। वरुल, त-हाडी और वडाली मार्ग से गुजरने वाले इस रास्ते पर कुछ दूरी के अंतराल पर बार-बार गतिरोधक आने से वाहन चालकों को लगातार गति कम करनी पड़ती है। सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और वाहनों की रफ्तार नियंत्रित करने के उद्देश्य से बनाए गए गतिरोधक अब उचित नियोजन के अभाव में परेशानी का कारण बन रहे हैं। वाहन चालकों ने इनकी संख्या और उनके बीच की दूरी को लेकर सवाल उठाए हैं।
शिरपुर-शहादा मार्ग क्षेत्र में आवागमन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस सड़क से प्रतिदिन बड़ी संख्या में दोपहिया, चारपहिया वाहन, एसटी बसें और भारी वाहन गुजरते हैं। हालांकि, मार्ग पर गतिरोधकों की अधिक संख्या के कारण चालकों को बार-बार ब्रेक लगाना पड़ता है और फिर वाहन की गति बढ़ानी पड़ती है। इससे यात्रा का समय बढ़ रहा है और वाहन चालकों को मानसिक व शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
विशेष रूप से, मार्ग पर स्थित प्रत्येक गांव की शुरुआत और समाप्ति पर गतिरोधक बनाए जाने की स्थिति दिखाई देती है। गांवों की सीमा में वाहनों की गति नियंत्रित करना जरूरी है, लेकिन इसके लिए गतिरोधकों की संख्या, उनके बीच की दूरी और निर्माण के तरीके का उचित नियोजन भी आवश्यक है। कम अंतराल पर गतिरोधकों की श्रृंखला होने से चालकों को लगातार ब्रेक लगाने और दोबारा गति बढ़ाने की मशक्कत करनी पड़ रही है।
गतिरोधकों पर स्पष्ट रंगाई, परावर्तक पट्टियां और पहले से सतर्क करने वाले संकेतक नहीं होने पर रात के समय जोखिम बढ़ सकता है। अचानक सामने आए गतिरोधक के कारण चालक को तेज ब्रेक लगाना पड़े, तो पीछे से आ रहे वाहन की टक्कर होने की आशंका रहती है। विशेष रूप से दोपहिया चालकों का संतुलन बिगड़ने, वाहनों को नुकसान पहुंचने और यात्रियों के घायल होने का खतरा बना रहता है।
दुर्घटना संभावित स्थानों पर गतिरोधक बनाना जरूरी हो सकता है, लेकिन हर जगह इनका निर्माण दुर्घटनाएं रोकने का एकमात्र विकल्प नहीं है। गतिरोधकों की आवश्यकता, ऊंचाई, चौड़ाई, उनके बीच की दूरी और स्पष्ट दृश्यता की तकनीकी मानकों के अनुसार जांच की जानी चाहिए। आवश्यक स्थानों पर गतिरोधक बनाए रखते हुए अनावश्यक या नियमों के विरुद्ध बनाए गए गतिरोधकों के संबंध में उचित निर्णय लेने की जरूरत है।
त-हाडी-शिरपुर मार्ग के 20 किलोमीटर में 18 गतिरोधक
त-हाडी मार्ग से गुजरने वाले शिरपुर-शहादा रास्ते पर शिरपुर से त-हाडी के बीच महज 20 किलोमीटर की दूरी में भी 18 गतिरोधक होने की बात कही जा रही है। कम दूरी में इतनी बड़ी संख्या में गतिरोधक होने से वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। बार-बार गति कम करने के कारण वाहनों की रफ्तार प्रभावित होती है और यात्रा में अधिक समय लगता है। इसी वजह से इस मार्ग पर गतिरोधकों की जांच कर अनावश्यक गतिरोधकों की संख्या कम करने की मांग जोर पकड़ रही है।
वाहन चालकों की मांग है कि शिरपुर-शहादा मार्ग का प्रत्यक्ष निरीक्षण कर वहां मौजूद गतिरोधकों की मौजूदा स्थिति और आवश्यकता की जांच की जाए। खतरनाक स्थानों पर बने गतिरोधकों पर स्पष्ट रंगाई, परावर्तक पट्टियां और चेतावनी संकेतक लगाए जाएं। इसके अलावा, यदि नियमों के विरुद्ध बनाए गए गतिरोधक मिलते हैं, तो उनके संबंध में नियमानुसार कार्रवाई की जाए। आवश्यक स्थानों पर निर्धारित मानकों के अनुरूप गतिरोधक बनाए रखने और अनावश्यक गतिरोधकों को लेकर उचित निर्णय लेने की अपेक्षा की जा रही है।
मार्ग पर प्रत्येक गांव में सामान्यतः दो गतिरोधक बनाए जाने की स्थिति बताई जा रही है। इनमें एक गांव की शुरुआत और दूसरा गांव के अंत में होता है। इस तरह लगातार गतिरोधकों की श्रृंखला बन जाने से वाहन चालकों को बार-बार गति कम करनी और फिर बढ़ानी पड़ती है। महज 60 किलोमीटर की यात्रा में 50 गतिरोधक होने पर इनके औचित्य और नियोजन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
अब वाहन चालकों की मांग है कि संबंधित विभाग इस मार्ग पर गतिरोधकों की संख्या, उनके बीच की दूरी, दृश्यता और निर्माण के मानकों की समीक्षा करे। दुर्घटनाओं को रोकने के लिए किए जाने वाले उपायों से वाहन चालकों की असुविधा और दुर्घटना का जोखिम न बढ़े, इसके लिए आवश्यक स्थानों पर उचित व्यवस्था सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।

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