शिरपुर: एल नीनो के बीच रबी फसलों के लिए कृषि विभाग की एडवाइजरी
पानी की कमी की आशंका को देखते हुए किसानों को ठिबक सिंचाई अपनाने, खेत तालाब बनाने और चारा फसलों के वैज्ञानिक नियोजन की सलाह दी गई है।

त-हाडी। एल निनो की पृष्ठभूमि में आगामी रब्बी हंगामे के दौरान बारिश और पानी की उपलब्धता में अनिश्चितता रहने की संभावना को देखते हुए शिरपूर तालुका के किसानों से उपलब्ध पानी का सख्ती से नियोजन कर रब्बी फसलों की योजना बनाने की अपील की गई है। शिरपूर तालुका कृषि अधिकारी कैलास गोपाल ने किसानों से पानी की उपलब्धता के अनुसार ही फसलों का चयन करने और कम पानी में अधिक उत्पादन लेने का नियोजन करने का आह्वान किया है।
रब्बी फसलों की योजना बनाते समय उपलब्ध पानी और जमीन की गुणवत्ता को ध्यान में रखकर फसलों का चयन तथा क्षेत्र का नियोजन करना आवश्यक है। पानी की उपलब्धता कम होने पर कम अवधि में तैयार होने वाली और कम पानी में आने वाली फसलों को प्राथमिकता देनी चाहिए। अधिक पानी की आवश्यकता वाली फसलों का क्षेत्र उपलब्ध सिंचाई क्षमता के अनुसार सीमित रखना चाहिए। संभव हो तो जल्दी तैयार होने वाली और पानी का कार्यक्षम उपयोग करने वाली किस्मों का चयन करना चाहिए। कृषि अधिकारी कैलास गोपाल ने कहा कि केवल पानी उपलब्ध है इसलिए फसल नहीं लेनी चाहिए, बल्कि उपलब्ध पानी के अनुसार ही फसल का चयन करना चाहिए।
पानी प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए उपलब्ध पानी का फसलवार और क्षेत्रवार आराखड़ा तैयार करना चाहिए। फसल की संवेदनशील वृद्धि अवस्था में पानी की आपूर्ति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अनावश्यक सिंचाई से बचते हुए पानी की बचत और उसका कार्यक्षम उपयोग करना चाहिए। खेत में बांधबंदिस्ती, जैविक पदार्थों के उपयोग और आच्छादन के माध्यम से मिट्टी में नमी बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए।
जहां संभव हो वहां ठिबक सिंचाई का इस्तेमाल करना चाहिए। गेंहू, चना, प्याज, सब्जियों और अन्य उपयुक्त फसलों में उपलब्ध तकनीक के अनुसार तुषार और ठिबक सिंचाई का कार्यक्षम उपयोग करने की सलाह दी गई है। सिंचाई का समय और अवधि फसल की आवश्यकता, मिट्टी के प्रकार और मौसम के अनुसार तय करनी चाहिए। किसानों के लिए संदेश दिया गया है, “थेंब थेंब पानी – पिकासाठी मौल्यवान!”
उपलब्ध परिस्थितियों के अनुसार खेत तालाब खोदने तथा मौजूदा खेत तालाबों का प्रभावी उपयोग करने की योजना बनानी चाहिए। बारिश से उपलब्ध पानी को खेत तालाब में संग्रहित कर उसका उपयोग संरक्षित सिंचाई के लिए करना चाहिए। खेत तालाब के पानी का किफायती इस्तेमाल करते हुए पूरे हंगामे के लिए पानी की योजना तैयार करनी चाहिए।
पानी की कमी की स्थिति में पशुधन के लिए चारे की उपलब्धता बनाए रखना भी जरूरी है। उपलब्ध पानी के अनुसार चारा फसलों का क्षेत्र निर्धारित करना चाहिए और कम पानी में उपलब्ध होने वाली चारा फसलों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उपलब्ध हरे चारे, सूखे चारे और कड़बे का वैज्ञानिक तरीके से भंडारण और प्रबंधन करना चाहिए। पशुधन की संख्या के अनुसार भविष्य में आवश्यक चारे की जरूरत का भी नियोजन करना चाहिए। एल निनो की पृष्ठभूमि में आगामी रब्बी हंगामे के लिए पानी, फसल और चारे का यह नियोजन किसानों के लिए उपलब्ध संसाधनों के अधिकतम और कार्यक्षम उपयोग पर केंद्रित है।

Pratahkal Bureau
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