नई दिल्ली: रायसीना हिल्स की ढलती शाम, गूँजती सैन्य धुनें और तिरंगे के सम्मान में झुके सर—कल शाम दिल्ली का विजय चौक एक बार फिर भारतीय गणतंत्र के गौरवशाली इतिहास और सैन्य परंपरा का साक्षी बना। भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोहों का औपचारिक समापन करते हुए 'बीटिंग रिट्रीट' समारोह ने न केवल दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि आधुनिकता और विरासत के अनूठे संगम को भी जीवंत कर दिया।

समारोह की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी शुरुआत सशस्त्र बलों की सुप्रीम कमांडर, राष्ट्रपति के आगमन के साथ हुई, जिनकी अगवानी प्रधानमंत्री और अन्य शीर्ष गणमान्य व्यक्तियों ने की। सदियों पुरानी इस सैन्य परंपरा की जड़ें युद्ध के मैदानों से जुड़ी हैं, जहाँ सूर्यास्त के समय ड्रमों की गूँज सैनिकों को युद्ध विराम और अपने शिविरों में लौटने का संकेत देती थी। भारत ने 1950 के दशक में इस परंपरा को अपनाया, जो आज अनुशासन और राष्ट्रीय स्वाभिमान का सबसे बड़ा उत्सव बन चुकी है।




इस वर्ष का आयोजन कई मायनों में विशेष रहा। भारतीय थल सेना, नौसेना, वायु सेना और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के बैंड्स ने जब सामूहिक रूप से 'कदम-कदम बढ़ाए जा' और 'वंदे मातरम' जैसी धुनें छेड़ीं, तो पूरा वातावरण देशभक्ति के उत्साह से सराबोर हो गया। संगीत के इस महाकुंभ में भारतीय शास्त्रीय रागों का समावेश किया गया, जो भारतीय संस्कृति की गहराई को प्रदर्शित कर रहा था। एक अभिनव पहल के रूप में, दर्शकों के बैठने के स्थानों के नाम भारतीय वाद्य यंत्रों जैसे बांसुरी, डमरू और मृदंगम पर रखे गए थे, जो देश की कलात्मक विरासत के प्रति सम्मान को दर्शाता है।

जैसे ही सूर्यास्त की लालिमा के बीच बिगुल बजा और राष्ट्रीय ध्वज को अत्यंत सम्मान के साथ उतारा गया, पूरा रायसीना हिल्स दूधिया और सतरंगी रोशनी से नहा उठा। राष्ट्रपति भवन से लेकर नॉर्थ और साउथ ब्लॉक तक की यह स्वर्णिम चमक केवल एक उत्सव का अंत नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की अटूट शक्ति और निरंतरता का प्रतीक है। यह समारोह हमें याद दिलाता है कि भारत का भविष्य उसकी प्राचीन परंपराओं और आधुनिक संकल्पों की ठोस बुनियाद पर टिका है।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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