दिल्ली दौरे पर बोले मार्को रुबियो- पाकिस्तानी सरजमीं से भारत को है बड़ा सुरक्षा खतरा
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने नई दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता के दौरान सीमा पार से संचालित होने वाले सशस्त्र आतंकी समूहों पर भारत की चिंताओं का समर्थन किया।

नई दिल्ली में आयोजित द्विपक्षीय सुरक्षा वार्ता और प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पृष्ठभूमि में अमेरिकी ध्वज के साथ मौजूद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो।
US India counterterrorism strategic alignment : वैश्विक कूटनीति के मंच से भारत के लिए एक बहुत बड़ी और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। अपने पांच दिवसीय भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को लेकर नई दिल्ली की चिंताओं पर मुहर लगा दी है। राजधानी दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी विदेश मंत्री ने साफ तौर पर स्वीकार किया कि पाकिस्तानी सरजमीं से संचालित होने वाले सशस्त्र आतंकी समूह लगातार भारत को निशाना बना रहे हैं, जो भारत के लिए एक गंभीर और निरंतर सुरक्षा चिंता का विषय है। मार्को रुबियो का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ सुरक्षा, रक्षा और व्यापार जैसे संवेदनशील मुद्दों पर द्विपक्षीय बातचीत कर रहे हैं। आतंकवाद के खिलाफ भारत और अमेरिका के इस साझा और कड़े रुख ने दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में एक नया उबाल ला दिया है।
इस हाई-प्रोफाइल राजनयिक बैठक के दौरान जब अमेरिकी विदेश मंत्री से अमेरिका-इरान वार्ता में पाकिस्तान की मध्यस्थता और उसकी भूमिका को लेकर तीखे सवाल पूछे गए, तो उन्होंने स्थिति को बेहद स्पष्टता के साथ सामने रखा। रुबियो ने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन और इस्लामाबाद के बीच कुछ मुद्दों पर बातचीत एक अलग स्तर पर है, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि अमेरिका आतंकवाद के मुद्दे पर आंखें मूंद लेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान द्वारा की जा रही कथित मध्यस्थता के प्रयासों का भारतीय अधिकारियों और शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई चर्चा में दूर-दूर तक कोई जिक्र नहीं आया है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने यह संदेश देने की पुरजोर कोशिश की कि इस्लामाबाद के साथ उनके संबंध केवल कुछ रणनीतिक मोर्चों तक ही सीमित हैं, जबकि भारत के साथ अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी बेहद गहरी और अटूट है।
इस महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता के आधिकारिक और कानूनी आयामों पर नजर डालें, तो यह पूरी कवायद आतंकवाद के खिलाफ दोनों लोकतांत्रिक देशों की जीरो टॉलरेंस की नीति को दर्शाती है। हाल ही में आई आधिकारिक सुरक्षा रिपोर्टों में पाकिस्तान में पनप रहे आतंकी नेटवर्क के पदचिह्नों में ३५ प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिस पर अमेरिका ने भी गहरी चिंता जताई है। बैठक के दौरान भारतीय और अमेरिकी अधिकारियों ने वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान को और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की। दोनों पक्षों ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग बढ़ाने और हाल के दिनों में एक प्रमुख आतंकी साजिशकर्ता के प्रत्यर्पण जैसी सफलताओं को दोहराने की प्रतिबद्धता जताई। आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट कर दिया गया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को जोखिमों से मुक्त करने और क्षेत्रीय सुरक्षा बनाए रखने के लिए आतंकवाद का खात्मा अनिवार्य है।
मार्को रुबियो के इस बयान के बाद पूरे क्षेत्र में एक बड़ा भू-राजनीतिक विभाजन और तीखी बहस छिड़ गई है। भारतीय रणनीतिक विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों ने इस बयान का पुरजोर स्वागत किया है। उनका मानना है कि अमेरिकी विदेश मंत्री द्वारा सार्वजनिक मंच से पाकिस्तान का नाम लेकर भारत की चिंताओं को जायज ठहराना, सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ नई दिल्ली की दीर्घकालिक नीति की एक बड़ी राजनयिक जीत है। दूसरी ओर, उम्मीद के मुताबिक इस बयान पर पाकिस्तानी खेमे और वहां के राजनीतिक विश्लेषकों की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया और विरोध देखने को मिला है। पाकिस्तानी मीडिया और आधिकारिक आवाजों ने अमेरिकी विदेश मंत्री के इस रुख पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया है कि वाशिंगटन इस मामले में पूरी तरह से नई दिल्ली के दावों और नैरेटिव को ही दोहरा रहा है, जो क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से ठीक नहीं है।
#WATCH | Delhi: When asked if the Indian side expressed any concerns regarding Pakistan playing the role of a mediator in the US-Iran conflict, US Secretary of State Marco Rubio says, "They're always concerned about, obviously. India is always pointing to the fact that there are… pic.twitter.com/qTojow1Fqh
— ANI (@ANI) May 25, 2026
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का यह भारत दौरा न केवल दोनों देशों के बीच व्यापार और सस्ती ऊर्जा की आपूर्ति को बढ़ाने में मील का पत्थर साबित हो रहा है, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक मोर्चेबंदी को भी नया हौसला दे रहा है। रुबियो की इस दोटूक टिप्पणी ने साफ कर दिया है कि अमेरिका किसी भी अन्य देश के साथ अपने 'रणनीतिक या व्यावहारिक' संबंधों की कीमत पर भारत के साथ अपने कूटनीतिक गठजोड़ को कमजोर नहीं होने देगा। आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर एक बार फिर अलग-थलग करने की दिशा में इस बयान के दूरगामी प्रभाव देखने को मिलेंगे। अब देखना यह होगा कि इस कड़े अंतरराष्ट्रीय रुख के बाद सीमा पार से संचालित होने वाले आतंकी आकाओं पर लगाम कसने के लिए इस्लामाबाद पर कितना दबाव बनता है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
