नई दिल्ली में आयोजित ग्यारहवीं क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान सदस्य देशों ने समुद्री सुरक्षा और आर्थिक संप्रभुता को मजबूत करने पर चर्चा की।

Quad Foreign Ministers Meeting New Delhi : वैश्विक कूटनीति के पटल पर एक बार फिर भारत की धरती सबसे बड़े रणनीतिक मंथन की गवाह बनी है। नई दिल्ली के गलियारों से उठी गूंज ने बीजिंग से लेकर वाशिंगटन तक के राजनीतिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। दुनिया की चार सबसे बड़ी लोकतांत्रिक ताकतों— भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया— के संगठन 'क्वाड' के विदेश मंत्रियों की ११वीं महाबैठक नई दिल्ली में संपन्न हो गई है। अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में आ रहे अप्रत्याशित और बड़े बदलावों के बीच हुई इस बैठक ने पूरी दुनिया को एक बेहद स्पष्ट, कड़ा और मजबूत संदेश दे दिया है। इंडो-पैसिफिक (हिंद-प्रशांत) क्षेत्र को पूरी तरह स्वतंत्र, खुला और समावेशी बनाए रखने के संकल्प के साथ शुरू हुई इस बैठक के पहले ही पल से यह साफ हो गया कि अब इस रणनीतिक समुद्री क्षेत्र में किसी भी एक देश का एकछत्र एकाधिकार स्वीकार नहीं किया जाएगा।

इस ऐतिहासिक बैठक के शुरुआती सत्र में जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी ने वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका की सराहना करते हुए कूटनीतिक गर्मजोशी का प्रदर्शन किया। मोटेगी ने अपने संबोधन में साफ तौर पर कहा कि इस बैठक का नई दिल्ली में आयोजित होना यह साबित करता है कि इंडो-पैसिफिक के भविष्य की रूपरेखा तय करने में भारत की स्थिति कितनी केंद्रीय है। जापानी विदेश मंत्री ने पहली क्वाड बैठक के अपने अनुभवों को याद करते हुए भावुक और रणनीतिक दोनों स्तरों पर इस मंच की उपयोगिता को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक (एफओआईपी) की परिकल्पना को सामने आए भले ही एक दशक बीत चुका है, लेकिन आज की वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए इसे अपडेट करना अनिवार्य हो गया है। जापान की नई नीतियों का हवाला देते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है जब इंडो-पैसिफिक के देश अपनी क्षमता और रणनीतिक मजबूती को इस स्तर पर ले जाएं कि वे अपने भविष्य के फैसले किसी बाहरी दबाव के बिना खुद कर सकें, जिसमें उनकी आर्थिक सुरक्षा की संप्रभुता भी शामिल है।

मेजबान देश के नाते भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बैठक की कमान संभालते हुए उन बुनियादी चुनौतियों को पटल पर रखा जो वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा बनी हुई हैं। जयशंकर ने पिछले अठारह महीनों के भीतर हुई कई उच्च स्तरीय मुलाकातों का जिक्र करते हुए साफ किया कि क्वाड अब केवल चर्चाओं का मंच नहीं बल्कि व्यावहारिक नतीजों पर काम करने वाला संगठन बन चुका है। भारतीय विदेश मंत्री ने वैश्विक सप्लाई चेन में आ रही रुकावटों, कनेक्टिविटी की बाधाओं और सबसे महत्वपूर्ण रूप से उत्पादन व संसाधनों के एक ही जगह पर हो रहे केंद्रीकरण की समस्या पर गहरी चिंता जताई। बिना नाम लिए उन्होंने दुनिया के विनिर्माण क्षेत्र पर चीन के एकाधिकार और उससे पैदा होने वाले रणनीतिक खतरों की ओर इशारा किया। जयशंकर ने वैश्विक समुदाय को आगाह किया कि जब तक बुनियादी ढांचे की कमी और रणनीतिक अविश्वास को दूर नहीं किया जाता, तब तक इस क्षेत्र का आर्थिक विकास सुरक्षित नहीं हो सकता।

अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और समुद्री संप्रभुता के नियमों के तहत इस बैठक में चारों देशों ने कई अहम आधिकारिक समझौतों और भावी रणनीतियों पर अपनी सहमति की मुहर लगाई। आधिकारिक स्तर पर यह तय किया गया कि आने वाले समय में समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों (क्रिटिकल टेक्नोलॉजी), सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन की मजबूती, मानवीय सहायता और आपदा राहत जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में चारों देशों की सेनाएं और एजेंसियां और ज्यादा व्यावहारिक व जमीनी सहयोग बढ़ाएंगी। विनियामक ढांचे को मजबूत करने और पारदर्शी साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए चारों देशों के शीर्ष अधिकारियों द्वारा तैयार किए गए ब्लूप्रिंट को भी इस बैठक में मंजूरी दी गई, जो अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों के पालन को सुनिश्चित करेगा।

निश्चित रूप से, नई दिल्ली में संपन्न हुई क्वाड विदेश मंत्रियों की यह बैठक केवल एक कूटनीतिक मुलाकात नहीं, बल्कि आने वाले दशकों की वैश्विक राजनीति की दिशा तय करने वाला एक टर्निंग पॉइंट है। चारों देशों के साझा बयानों और आक्रामक रणनीतिक रुख ने यह साफ कर दिया है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक भरोसा पैदा करना और आर्थिक विकल्पों को बढ़ावा देना अब उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। भरोसेमंद और पारदर्शी साझेदारी के इस नए युग ने जहां एक तरफ दक्षिण चीन सागर से लेकर हिंद महासागर तक विस्तारवादी सोच रखने वाली ताकतों की चिंताएं बढ़ा दी हैं, वहीं दूसरी तरफ वैश्विक विकास और स्थिरता के लिए एक नया और मजबूत सुरक्षा कवच तैयार कर दिया है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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