नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) एक बार फिर देशव्यापी बहस के केंद्र में आ गया है। इस बार कारण बना है कैंपस के भीतर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ लगाए गए कथित आपत्तिजनक और उकसाने वाले नारे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस घटना को गंभीर अनुशासनहीनता करार देते हुए सख्त कार्रवाई का ऐलान किया है, जबकि दिल्ली पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है।

यह घटना ‘ए नाइट ऑफ रेजिस्टेंस’ नामक कार्यक्रम के दौरान सामने आई, जिसका आयोजन वर्ष 2020 की एक कैंपस घटना की छठी बरसी पर किया गया था। उसी दिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार किया गया था। कार्यक्रम के दौरान कुछ छात्रों द्वारा लगाए गए नारे जल्द ही विवाद का विषय बन गए, जिन्हें विश्वविद्यालय प्रशासन ने “अत्यंत भड़काऊ और अस्वीकार्य” बताया।

जेएनयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी (सीएसओ) ने घटना की आंतरिक जांच के बाद नौ छात्रों की पहचान की है। इन छात्रों में अदिति मिश्रा, गोपाल बाबू, सुनील यादव, दानिश अली, साद आज़मी, महबूब इलाही, कनिष्क, पाकीज़ा खान और शुभम के नाम शामिल हैं। सुरक्षा अधिकारी ने दिल्ली पुलिस को पत्र लिखकर प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने का अनुरोध किया और कहा कि नारे विश्वविद्यालय परिसर की शांति और सौहार्द को प्रभावित करने वाले थे।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि जेएनयू विचारों और विमर्श का मंच है, न कि घृणा या उकसावे का। बयान में कहा गया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं है कि कोई भी व्यक्ति या समूह संस्थागत मर्यादाओं और कानून की सीमाओं का उल्लंघन करे। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि दोषी पाए जाने वाले छात्रों के खिलाफ निलंबन, निष्कासन या विश्वविद्यालय से डिबार किए जाने जैसी कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

इस बीच दिल्ली पुलिस ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, कार्यक्रम के वीडियो फुटेज, सुरक्षा रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान जुटाए जा रहे हैं, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि लगाए गए नारे कानूनी रूप से आपराधिक श्रेणी में आते हैं या नहीं।

जेएनयू लंबे समय से छात्र राजनीति, वैचारिक बहसों और विरोध प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रहा है। हालांकि, हाल के वर्षों में विश्वविद्यालय परिसर में होने वाले कार्यक्रमों और नारों को लेकर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी पहले से कहीं अधिक कड़ी हुई है। यह ताजा घटना एक बार फिर इस सवाल को सामने लाती है कि शैक्षणिक परिसरों में विरोध और अभिव्यक्ति की सीमा कहां समाप्त होती है और कानून का दायरा कहां से शुरू होता है।

घटना के बाद विश्वविद्यालय में तनाव का माहौल देखा गया, लेकिन प्रशासन ने स्थिति के नियंत्रण में होने की बात कही है। आने वाले दिनों में जांच और अनुशासनात्मक प्रक्रिया के निष्कर्ष यह तय करेंगे कि इस विवाद का असर केवल संबंधित छात्रों तक सीमित रहेगा या यह एक बार फिर जेएनयू को राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श के केंद्र में ला खड़ा करेगा।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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