नई दिल्ली से शंखनाद: स्टार्टअप क्रांति के 10 साल और अनुपालन सुधारों से बदली भारत की तकदीर
नई दिल्ली: भारत की स्टार्टअप क्रांति के 10 गौरवशाली वर्ष! स्टार्टअप इंडिया पहल ने 2.09 लाख से अधिक स्टार्टअप्स और 21 लाख नौकरियों के साथ देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा दी है। मोदी सरकार द्वारा 47,000 अनुपालनों को कम करने, एंजल टैक्स खत्म करने और टैक्स छूट जैसे ऐतिहासिक सुधारों ने कैसे भारत को दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बनाया, जानिए इस विशेष रिपोर्ट में।

देश की राजधानी नई दिल्ली से शुरू हुआ 'स्टार्टअप इंडिया' का सफर आज एक ऐसे पड़ाव पर पहुँच गया है जहाँ भारत वैश्विक पटल पर उद्यमिता का नया सिरमौर बनकर उभरा है। पिछले एक दशक में भारत ने न केवल अपनी सोच बदली है, बल्कि उन बेड़ियों को भी काट फेंका है जो नवाचार के पैरों में बाधा बनी हुई थीं। आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है, जो सालाना 12 से 15 प्रतिशत की बेमिसाल रफ्तार से दौड़ रहा है। साल 2014 में जहाँ डीपीआईआईटी-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या महज 350 के आसपास सिमटी थी, वहीं आज यह आंकड़ा 2.09 लाख के पार जा पहुँचा है। यह केवल संख्यात्मक वृद्धि नहीं है, बल्कि करोड़ों सपनों की उड़ान है, जिसने 2014 की महज 4,900 नौकरियों के मुकाबले आज 21 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा कर देश की आर्थिक ऊर्जा को नई दिशा दी है।
इस महापरिवर्तन की पटकथा मोदी सरकार द्वारा किए गए उन साहसी अनुपालन सुधारों से लिखी गई है, जिन्होंने लालफीताशाही के युग का अंत कर दिया। 2016 से अब तक 47,000 से अधिक अनुपालनों को समाप्त किया गया है और 4,458 से अधिक कानूनी प्रावधानों को अपराधमुक्त कर उद्यमियों के मन से दंड का भय निकाला गया है। शासन का यह नया मॉडल अब निरीक्षण के बजाय सुविधा और विश्वास पर टिका है। स्टार्टअप्स को अब शुरुआती तीन से पांच वर्षों तक श्रम और पर्यावरण कानूनों के लिए किसी सरकारी दफ्तर के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है, बल्कि वे स्वयं प्रमाणन के जरिए अपनी ईमानदारी का परिचय दे सकते हैं। स्टार्टअप इंडिया पोर्टल और राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाकर भौतिक दस्तावेजों की अनिवार्यता को इतिहास बना दिया है।
वित्तीय मोर्चे पर भी सरकार ने क्रांतिकारी कदम उठाते हुए स्टार्टअप्स को बड़ी राहत दी है। धारा 80-आईएसी के तहत पात्र स्टार्टअप्स को शुरुआती दस वर्षों में से किन्हीं तीन वर्षों के लिए शत-प्रतिशत आयकर छूट दी गई है। सबसे बड़ा ऐतिहासिक निर्णय वित्त वर्ष 2024-25 से एंजल टैक्स की समाप्ति रहा, जिसने मूल्यांकन आधारित कर की जटिलताओं को खत्म कर दिया। इसके अतिरिक्त, स्टार्टअप्स को मान्यता प्राप्त निवेशकों और एआईएफ से प्राप्त 25 करोड़ रुपये तक के निवेश पर शेयर प्रीमियम कर से भी मुक्त रखा गया है। इतना ही नहीं, बौद्धिक संपदा के संरक्षण के लिए पेटेंट शुल्क में 80 प्रतिशत और ट्रेडमार्क में 50 प्रतिशत की भारी छूट के साथ-साथ त्वरित जांच की सुविधा प्रदान की गई है, ताकि भारतीय नवाचार को विश्व स्तर पर सुरक्षा मिल सके।
व्यापार की सुगमता को बढ़ाने के लिए छोटी कंपनियों की परिभाषा में संशोधन कर उनकी पूंजी और टर्नओवर की सीमा को क्रमशः 10 करोड़ और 100 करोड़ रुपये तक बढ़ा दिया गया है, जिससे अधिक से अधिक युवा उद्यमी सरल नियमों का लाभ उठा सकें। सरकारी खरीद में भी स्टार्टअप्स के लिए रास्ते खोल दिए गए हैं और ईएमडी यानी बयाना राशि की अनिवार्यता खत्म कर उन्हें बड़े तकनीकी प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनने का अवसर दिया गया है। यदि कोई स्टार्टअप असफल भी होता है, तो अब उसके पास 90 दिनों के भीतर सम्मानजनक तरीके से बाहर निकलने का रास्ता मौजूद है। दस वर्षों का यह सफर गवाह है कि कैसे सरकार ने एक नियामक की भूमिका त्याग कर एक संरक्षक की भूमिका निभाई है, जिसने स्टार्टअप इंडिया को स्वतंत्र भारत के सबसे प्रभावशाली शासन सुधारों की सूची में शीर्ष पर ला खड़ा किया है।

Pratahkal Bureau
प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
