भारत सरकार ने राष्ट्रीय गंगा मिशन (NMCG) को और अधिक वैज्ञानिक और तकनीकी आधार प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय एजेंसी ने IIT दिल्ली के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तहत गंगा नदी का डिजिटल ट्विन बनाने की मंजूरी दी है, जो डेटा-ड्रिवन निर्णय लेने की प्रक्रिया को सशक्त करेगा। यह परियोजना न केवल गंगा की जल गुणवत्ता और प्रवाह पर नजर रखने में मदद करेगी, बल्कि जल संसाधनों के प्रबंधन में पारदर्शिता और वस्तुनिष्ठता सुनिश्चित करेगी।

इस डिजिटल ट्विन परियोजना के मुख्य तत्वों में हाइड्रोलॉजिकल मॉडलिंग, भूजल दबाव का मूल्यांकन, प्रदूषण हॉटस्पॉट की पहचान, परिदृश्य विश्लेषण और बेसिन जल संसाधनों की निगरानी शामिल हैं। परियोजना के अंतर्गत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), गणितीय सिमुलेशन और उन्नत योजना उपकरणों का उपयोग किया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल गंगा की सफाई और संरक्षण में एक नई तकनीकी क्रांति साबित हो सकती है।

साथ ही, राष्ट्रीय गंगा मिशन के तहत हाइब्रिड एन्यूटी आधारित पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल को भी अपनाया गया है। इस अभिनव वित्तीय दृष्टिकोण का उद्देश्य सीवरेज इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए निवेशकों को परिणाम आधारित भुगतान के साथ जोड़ना है। अर्थात्, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STPs) की वास्तविक कार्यप्रणाली के आधार पर भुगतान किया जाएगा, जिससे परियोजनाओं की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सके।

इसी कड़ी में, NMCG ने पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी नगर निगम क्षेत्र में मणांदा नदी के प्रदूषण नियंत्रण के लिए इंटरसेप्शन और डाइवर्जन (I&D) तथा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) परियोजना को मंजूरी दी है। इस परियोजना का अनुमानित लागत 361.86 करोड़ रुपये है और इसे हाइब्रिड एन्यूटी पीपीपी मोड के तहत लागू किया जाएगा। यह परियोजना मणांदा नदी में औद्योगिक और नगर निगम से निकलने वाले प्रदूषित जल को नियंत्रित करने और सफाई के लिए एक निर्णायक कदम साबित होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल ट्विन और हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल जैसी तकनीकी एवं वित्तीय पहलें न केवल गंगा के संरक्षण को मजबूती देंगी, बल्कि अन्य राज्यों और नदियों के प्रबंधन के लिए भी मॉडल के रूप में काम कर सकती हैं। इस दिशा में सरकार का प्रयास साफ संकेत देता है कि नदी संरक्षण अब केवल नीति और योजना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तकनीक, डेटा और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से इसे स्थायी और परिणाममुखी बनाया जाएगा।

राष्ट्रीय गंगा मिशन की यह नई पहल न केवल गंगा की सफाई को तेज करेगी, बल्कि समाज में नदी संरक्षण और पर्यावरणीय जागरूकता को भी बढ़ावा देगी। आने वाले वर्षों में यह परियोजना अन्य जल निकायों के प्रबंधन और स्वच्छ भारत अभियान की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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