आखिर क्यों है QUAD बैठक विश्व के लिए है खास ? जाने क्या है पूरी खबर
दिल्ली में हुई क्वाड (QUAD) बैठक में होर्मुज स्ट्रेट संकट का मुद्दा छाया रहा। विदेश मंत्रियों ने वैश्विक सप्लाई चैन और समुद्री सुरक्षा पर ईरान को कड़ा संदेश दिया।

मंच पर खड़े क्वाड देशों के नेता (बाएं से दाएं) ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।
QUAD meeting Delhi : नई दिल्ली के ऐतिहासिक हैदराबाद हाउस में आयोजित चतुर्भुजीय सुरक्षा संवाद (क्वाड-QUAD) के विदेश मंत्रियों की उच्च स्तरीय बैठक भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर संपन्न हुई है। भारत की मेजबानी में हुई इस रणनीतिक बैठक में पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट और विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकाबंदी का मुद्दा सबसे प्रमुखता से छाया रहा। इस संगठन में शामिल चार प्रमुख लोकतांत्रिक महाशक्तियों ने होर्मुज स्ट्रेट को बिना किसी बाधा के जल्दी से जल्दी वाणिज्यिक जहाजों के लिए खोलने और अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों को कड़ाई से लागू करने पर गहन चर्चा की। कूटनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, क्वाड के इस सख्त रुख और साझा कूटनीतिक संदेश ने सीधे तौर पर तेहरान (ईरान) की रणनीतिक चिंताओं और टेंशन को बढ़ा दिया है।
बैठक के समापन के बाद आयोजित एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य और आर्थिक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए वैश्विक बिरादरी को भारत के रुख से अवगत कराया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्तमान समय में दुनिया के सामने कई गंभीर कूटनीतिक और आर्थिक चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं। पश्चिम एशिया संकट और समुद्री मार्गों में जारी व्यवधान के कारण वैश्विक स्तर पर लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन (आपूर्ति श्रृंखला) बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा पर संकट मंडरा रहा है। इसी के साथ, भारत के पारंपरिक और कड़े रुख को दोहराते हुए उन्होंने दो टूक कहा कि आतंकवाद के किसी भी स्वरूप के खिलाफ हमारी नीति पूरी तरह से 'जीरो टॉलरेंस' (शून्य सहिष्णुता) की है और इसमें कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
क्वाड शिखर वार्ता की अध्यक्षता करते हुए भारतीय विदेश मंत्री ने समूह की उपयोगिता को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि इस जरूरी बैठक में ज्यादातर चर्चाएं दुनिया के ताजा और संवेदनशील हालातों पर ही केंद्रित रहीं। क्वाड के मूल सिद्धांतों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि चूंकि भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र के अलग-अलग किनारों पर स्थित चार प्रमुख समुद्री लोकतांत्रिक देश हैं, इसलिए वैश्विक और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए हमारे विचारों का यह आदान-प्रदान और आपसी समन्वय बेहद महत्वपूर्ण है। इस बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी और ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने भी अपने देशों का प्रतिनिधित्व किया।
बैठक के बाद चारों सदस्य देशों द्वारा एक विस्तृत साझा प्रेस रिलीज (Joint Statement) जारी की गई, जिसमें हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और आर्थिक सुदृढ़ता को लेकर कई बड़े आधिकारिक संकल्प व्यक्त किए गए हैं। इस साझा कूटनीतिक घोषणापत्र में मुख्य रूप से निम्नलिखित तकनीकी और रणनीतिक क्षेत्रों को मजबूत करने पर सहमति बनी है:
- समुद्री क्षेत्र में सहयोग का विस्तार: चारों देशों के बीच समुद्री निगरानी, डोमेन जागरूकता, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और पनडुब्बी केबल (Submarine Cables) की सुरक्षा को व्यापक स्तर पर बढ़ाया जाएगा।
- क्षमता निर्माण और आपदा राहत: नौसैनिक ट्रेनिंग, क्षमता निर्माण और मानवीय सहायता तथा आपदा जोखिम न्यूनीकरण (HADR) गतिविधियों में आपसी समन्वय को और अधिक पुख्ता किया जाएगा।
- आर्थिक लचीलापन और इंजीनियरिंग: वैश्विक बाजार व्यवस्थाओं को बचाने के लिए आर्थिक लचीलेपन को बढ़ावा दिया जाएगा, विश्वसनीय एवं सुरक्षित इंजीनियरिंग का प्रसार होगा और प्रोडक्शन क्षमताओं में वृद्धि की जाएगी।
साझा बयान के कानूनी और आधिकारिक पहलुओं पर जोर देते हुए क्वाड के विदेश मंत्रियों ने कहा कि सुरक्षित, स्वतंत्र और बिना किसी रुकावट के समुद्री व्यापार को सुनिश्चित करना सभी राष्ट्रों का सामूहिक उत्तरदायित्व है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS) का सभी पक्षों द्वारा कड़ाई से पालन किए जाने के महत्व को एक बार फिर पुरजोर तरीके से दोहराया गया। आज के इस दौर में वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी से बचाने के लिए एनर्जी सेक्टर (ऊर्जा क्षेत्र) की स्थिरता और कृषि क्षेत्र के लिए खाद की निरंतर उपलब्धता को बनाए रखने पर भी चारों देशों के बीच गंभीर सहमति बनी।
इस हाई-प्रोफाइल बैठक के दूरगामी परिणामों और कूटनीतिक प्रभाव को वैश्विक राजनीति में बेहद निर्णायक माना जा रहा है। दिल्ली से निकला यह कूटनीतिक संदेश साफ करता है कि हिंद-प्रशांत से लेकर पश्चिम एशिया के महत्वपूर्ण चोकपॉइंट्स (जैसे होर्मुज जलमार्ग) पर किसी भी देश की एकतरफा दादागिरी या नाकाबंदी को ये लोकतांत्रिक महाशक्तियां स्वीकार नहीं करेंगी। इस बैठक ने न केवल भारत की वैश्विक मध्यस्थता और रणनीतिक क्षमता को साबित किया है, बल्कि आने वाले समय में स्वतंत्र और खुले व्यापार मार्गों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत कूटनीतिक कवच भी तैयार कर दिया है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
