दिल्ली की जहरीली हवा को लेकर रविवार शाम इंडिया गेट के पास हुए प्रदूषण विरोध प्रदर्शन ने एक शांत मूड छोड़कर बड़े राजनीतिक और सुरक्षा संकट का रूप ले लिया। प्रदर्शन की शुरुआत स्वच्छ हवा की मांग के साथ हुई थी, लेकिन यह हिंसक मोड़ लेने लगा जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से भिड़ते हुए मिर्च स्प्रे (चिली पाउडर) का उपयोग किया। दिल्ली पुलिस ने इस घटना के बाद कम-से‑कम 15 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया है।


प्रदर्शनकारियों ने C‑Hexagon इलाके में बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की और सड़क पर बैठ गए, जिससे यातायात और आपातकालीन वाहनों की आवाजाही में बाधा आई। पुलिस अधिकारी बताते हैं कि कई एम्बुलेंस और मेडिकल स्टाफ उन बैरिकेड्स के पीछे फंसे हुए थे, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने पीछे हटने से इंकार कर दिया। इसी बीच, राजधानी की वायु‑गुणवत्ता बेहद चिंताजनक बनी हुई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली का दैनिक औसत AQI लगभग 397 दर्ज किया गया है, जिसे “बहुत खराब” श्रेणी में गिना गया है।


कई मोंनिटरिंग स्टेशनों पर AQI 400 के स्तर से भी ऊपर पहुंचा, जो “गंभीर” प्रदूषण की ओर संकेत करता है। लेकिन प्रदर्शन में राजनीतिक कंट्रैवर्सी का एक अन्य चमकता पक्ष तब सामने आया, जब कुछ लोगों ने माओवादी कमांडर मद्वी हिडमा की पोस्टर हाथ में उठाए और “Madvi Hidma Amar Rahe” जैसे नारे लगाए। हिडमा हाल ही में एक मुठभेड़ में मारा गया था, और सुरक्षा बलों के लिए वह एक बड़ा विवादित नाम है। पुलिस ने कहा है कि इन पोस्टरों की जांच की जाएगी और उन लोगों को चिन्हित किया जाएगा, जिन्होंने नक्सल समर्थक नारेबाज़ी की।


नई दिल्ली के डीसीपी (पुलिस) देवेश कुमार महला ने मीडिया को बताया कि यह घटना “बहुत असामान्य” थी, क्योंकि पहली बार प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर मिर्च स्प्रे का उपयोग किया। उन्होंने यह भी कहा कि तीन‑चार पुलिसकर्मी स्प्रे के संपर्क में आने के बाद आंखों और चेहरे में चुभन के कारण Ram Manohar Lohia (RML) अस्पताल में भर्ती हैं। पुलिस ने यह भी बताया कि इस प्रदर्शन के लिए उन्हें स्थानांतरण की अनुमति नहीं थी। अधिकारियों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार जंतर मंतर ही सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए अधिकृत स्थल है, न कि इंडिया गेट।


यह विरोध प्रदर्शनी सिर्फ स्वच्छ हवा की मांग तक सीमित नहीं रही; यह राजनीतिक सवालों, नागरिकों की निराशा और सुरक्षा प्रतिष्ठान के साथ टकराव का एक बड़ा प्रतीक बन गया है। मिर्च स्प्रे का इस्तेमाल, बैरिकेड्स का टूटना और नक्सल-संबद्ध नारेबाज़ी दर्शाता है कि एयर क्राइसिस अब सिर्फ पर्यावरण समस्या नहीं रही, यह लोकतांत्रिक अधिकारों और सामाजिक तनाव का मुद्दा बन चुकी है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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