केंद्र सरकार नीट जैसी परीक्षाओं को सुरक्षित बनाने के लिए प्रश्नपत्रों के परिवहन और संरक्षण की जिम्मेदारी सैन्य बलों को सौंपने की योजना पर विचार कर रही है।

NEET paper leak security measures army : देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा 'नीट' (NEET) के प्रश्नपत्र लीक होने के बाद उपजे राष्ट्रव्यापी आक्रोश और विवाद से सबक लेते हुए केंद्र सरकार अब देश की परीक्षा प्रणाली को अभेद्य बनाने के लिए एक बेहद क्रांतिकारी और ऐतिहासिक कदम उठाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की साख पर लगे गहरे दाग को धोने के लिए सरकार अब तक का सबसे सख्त प्रशासनिक सुरक्षा मॉडल लागू करने की तैयारी में है। विश्वसनीय सूत्रों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, भविष्य में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों की छपाई से लेकर उनकी सुरक्षित ढुलाई, लॉजिस्टिक्स और भंडारण (स्टोरेज) की पूरी कमान भारतीय सेना या अर्धसैनिक बलों को सौंपी जा सकती है। यह संभावित कदम देश के परीक्षा इतिहास में एक नए युग की शुरुआत का संकेत है, जिसका सीधा मकसद पेपर लीक करने वाले संगठित माफियाओं के नेटवर्क को जड़ से नेस्तनाबूद करना है।

इस बेहद संवेदनशील और रणनीतिक योजना को धरातल पर उतारने के लिए देश की राजधानी नई दिल्ली में सत्ता के गलियारों में एक बड़ी हलचल देखी गई। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आधिकारिक आवास पर नीट परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित, त्रुटिहीन और पारदर्शी बनाने को लेकर एक बेहद उच्च-स्तरीय और गोपनीय बैठक बुलाई गई थी। इस हाई-प्रोफाइल बैठक की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें रक्षा मंत्री के साथ देश के केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया विशेष रूप से शामिल हुए। इसके अतिरिक्त, देश की परीक्षा नियामक संस्थाओं यानी केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के शीर्ष और वरिष्ठ अधिकारी भी पूरे प्रशासनिक खाके के साथ इस विचार-विमर्श का हिस्सा बने।

इस महत्वपूर्ण बैठक के भीतर चले लंबे मंथन के दौरान मुख्य रूप से उन तकनीकी और व्यावहारिक खामियों को चिन्हित किया गया, जिनके कारण पूर्व में प्रश्नपत्रों की गोपनीयता भंग हुई थी। सूत्रों के अनुसार, बैठक का पूरा ध्यान इस बात पर केंद्रित रहा कि देश के सुदूर इलाकों में बने परीक्षा केंद्रों तक प्रश्नपत्रों को बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप या बाहरी सेंधमारी के कैसे सुरक्षित पहुंचाया जाए। मंत्रियों और अधिकारियों के बीच इस बात पर विस्तृत सहमति बनी कि परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह 'फुलप्रूफ' बनाने के लिए सैन्य स्तर के सुरक्षा प्रोटोकॉल और उनकी अनुशासित रसद प्रणाली (Logistics System) का उपयोग करना ही एकमात्र अचूक समाधान हो सकता है। इसके साथ ही, हालिया विवादों के कारण मानसिक तनाव और अनिश्चितता का सामना कर रहे लाखों परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों की परेशानियों को कम करने तथा परीक्षा प्रणाली में उनका खोया हुआ भरोसा दोबारा बहाल करने से जुड़े विभिन्न नीतिगत विकल्पों पर भी गहराई से चर्चा की गई।

आधिकारिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से देखें तो इस योजना को लागू करने के लिए सरकार को कई कानूनी और नीतिगत बदलावों से गुजरना होगा, क्योंकि नागरिक परीक्षाओं के लिए सैन्य बलों की तैनाती के लिए कड़े वैधानिक प्रोटोकॉल की आवश्यकता होती है। यदि यह नीति अंतिम रूप से स्वीकृत हो जाती है, तो प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया जा सकता है जो सीधे गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय के समन्वय से काम करेगी। सरकार का यह आक्रामक और कड़ा रुख यह साफ करता है कि अब राष्ट्रीय परीक्षाओं की सुरक्षा को देश की आंतरिक संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के समान ही प्राथमिकता दी जाएगी। इस ऐतिहासिक बैठक और इसके बाद सामने आने वाले फैसलों का दूरगामी प्रभाव न केवल आगामी नीट परीक्षाओं पर पड़ेगा, बल्कि यह देश की संपूर्ण डिजिटल और भौतिक परीक्षा प्रणाली को एक नया, सुरक्षित और पारदर्शी ढांचा प्रदान करेगा जिससे भविष्य में मेधावी छात्रों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

Updated On 28 May 2026 2:46 PM IST
Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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