voter list verification process India : विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision–SIR) के तहत पूर्व नेवी चीफ एडमिरल अरुण प्रकाश (सेवानिवृत्त) को भेजे गए नोटिस को लेकर सामने आए विवाद पर चुनाव आयोग ने औपचारिक स्पष्टीकरण जारी किया है। सोशल मीडिया पर मामले के तूल पकड़ने के बाद आयोग ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी विशेष व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि एक मानक, प्रणाली-आधारित प्रक्रिया का हिस्सा थी, जो मतदाता सूची के सत्यापन के लिए अपनाई जाती है।

दरअसल, हाल ही में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान गोवा के कोर्टालिम विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सत्यापन अभियान चलाया जा रहा था। इसी क्रम में बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) द्वारा एडमिरल अरुण प्रकाश से संबंधित एक कैलकुलेशन फॉर्म जमा किया गया। चुनाव आयोग के अनुसार, इस फॉर्म में पिछली एसआईआर से जुड़े कई अनिवार्य विवरण शामिल नहीं थे, जिनमें मतदाता का नाम, ईपीआईसी नंबर, रिश्तेदार का नाम, विधानसभा क्षेत्र का नाम और संख्या, भाग संख्या तथा मतदाता सूची में क्रम संख्या शामिल है।

इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर डॉ. मेडोरा एरमोमिला डी कोस्टा ने सोमवार को जारी स्पष्टीकरण में बताया कि इन आवश्यक जानकारियों के अभाव में बीएलओ एप्लिकेशन प्रस्तुत फॉर्म और मौजूदा वोटर लिस्ट डेटाबेस के बीच स्वचालित मिलान स्थापित नहीं कर सका। परिणामस्वरूप, सिस्टम ने इस फॉर्म को “अनमैप कैटेगरी” में वर्गीकृत कर दिया, जिसके बाद मानक प्रक्रिया के तहत सुनवाई नोटिस स्वतः जारी किया गया।

चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि एसआईआर के अंतर्गत यदि किसी मतदाता के विवरण का स्वचालित सत्यापन संभव नहीं हो पाता, तो सुनवाई तंत्र के माध्यम से पहचान और पात्रता की पुष्टि अनिवार्य होती है। यह प्रक्रिया सभी मतदाताओं पर समान रूप से लागू होती है, चाहे वे सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी हों या सामान्य नागरिक।

इस बीच, एडमिरल अरुण प्रकाश ने स्वयं सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने कभी किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं की है। उन्होंने बताया कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने नियमानुसार एसआईआर फॉर्म भरा था और ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपना नाम देखकर संतोष व्यक्त किया था। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे चुनाव आयोग के नोटिस का पूर्ण रूप से पालन करेंगे।

उल्लेखनीय है कि एडमिरल अरुण प्रकाश 1971 के भारत–पाकिस्तान युद्ध में अहम भूमिका निभा चुके हैं और उन्हें वीर चक्र से सम्मानित किया गया है। उनके नाम पर नोटिस जारी होने की खबर सामने आने के बाद कई पूर्व सैन्यकर्मियों और नागरिकों ने सोशल मीडिया पर चिंता जताई थी, जिसके बाद आयोग को स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी।

चुनाव आयोग के इस स्पष्टीकरण के साथ यह संदेश सामने आया है कि मतदाता सूची का सत्यापन एक तकनीकी और नियमबद्ध प्रक्रिया है, जिसमें किसी व्यक्ति की पहचान, पद या पृष्ठभूमि के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता। यह प्रकरण एक बार फिर दर्शाता है कि चुनावी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रियाएं कितनी व्यापक और सख्त हैं।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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