दिल्ली, बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के चार शहरों में हुए भीषण हादसों के बाद पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के मामले दर्ज किए।

Four fire incidents in India 26 deaths : देश के अलग-अलग हिस्सों में बीते बहत्तर घंटों के भीतर सामने आए भयंकर अग्निकांडों ने शहरी सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक दावों की कलई खोलकर रख दी है। दिल्ली के मालवीय नगर की भयावह त्रासदी की राख अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि बिहार के मुजफ्फरपुर, उत्तर प्रदेश के नोएडा और मध्य प्रदेश के इंदौर में भड़की आग ने चारों तरफ हाहाकार मचा दिया। महज तीन दिनों के अंतराल में हुए इन चार विनाशकारी हादसों में अब तक कुल 26 बेकसूर लोगों की जिंदा जलकर या दम घुटने से मौत हो चुकी है। महानगरों की आसमान छूती इमारतों से लेकर अस्पतालों तक फैली आग की ये लपटें चीख-चीखकर गवाही दे रही हैं कि कैसे इंसानी लापरवाही और लचर कानून व्यवस्था हर दिन निर्दोष नागरिकों के लिए 'डेथ वारंट' बन रही है। इन घटनाओं ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है और सुरक्षा मानकों को लेकर जनता में गहरा आक्रोश है।

त्रासदी के इस सिलसिले की सबसे दर्दनाक शुरुआत देश की राजधानी दिल्ली के पॉश इलाके मालवीय नगर से हुई। बुधवार की सुबह करीब पौने नौ बजे हौजरानी स्थित 'फ्लरिश स्टे' होटल के ग्राउंड फ्लोर पर चल रहे 'लेमन ग्रीन' रेस्टोरेंट में अचानक भीषण आग लग गई। यह इलाका संकरी गलियों और आपस में सटी बहुमंजिला इमारतों के लिए जाना जाता है, जहां पास के बड़े अस्पतालों में इलाज कराने आए मरीजों के तीमारदार ठहरे हुए थे। देखते ही देखते आग ने पूरी चार मंजिला इमारत को अपनी आगोश में ले लिया। होटल के कमरों और बेसमेंट में कुल 47 लोग मौजूद थे। दम घुटने और भयंकर लपटों के कारण 21 लोगों की मौके पर ही तड़प-तड़पकर जान चली गई। जान बचाने की कशमकश में कई लोग ऊपरी मंजिलों से नीचे कूद गए, जिससे वे गंभीर रूप से चोटिल हो गए। घायलों का अभी भी अस्पताल में इलाज चल रहा है, जहां कई की हालत नाजुक बनी हुई है।

दिल्ली अभी इस सदमे से उबर भी नहीं पाई थी कि गुरुवार की अलसुबह बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित प्रसाद हॉस्पिटल से दिल दहला देने वाली खबर सामने आई। जिले के इस बड़े निजी अस्पताल के आईसीयू वार्ड में तड़के सुबह करीब तीन बजे शॉर्ट सर्किट के कारण अचानक आग भड़क गई। जहरीले और घने काले धुएं ने चंद मिनटों में पूरे वार्ड को अपनी गिरफ्त में ले लिया। आईसीयू में जीवनरक्षक प्रणालियों पर वेंटिलेटर के सहारे लेटे गंभीर मरीज अपनी जगह से हिलने में भी असमर्थ थे। इस बेहद नाजुक वक्त में अस्पताल का पूरा स्टाफ मौके से नदारद था। कोई जिम्मेदार अधिकारी न मिलने पर मरीजों के परिजनों ने खुद जान जोखिम में डालकर धुएं से भरे वार्ड में प्रवेश किया और अपनों को ढूंढकर बाहर निकाला। इस घोर प्रशासनिक लापरवाही के कारण पांच से छह मरीजों ने तड़पकर दम तोड़ दिया, जबकि कई अन्य के फेफड़ों में धुआं भरने के कारण उन्हें दूसरे चिकित्सालयों में आपातकालीन उपचार के लिए भर्ती कराया गया है।

अग्निकांड की यह कड़ियां यहीं नहीं थमीं। शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के हाई-टेक शहर नोएडा के सेक्टर-75 स्थित 'आईवी काउंटी' सोसाइटी में आग ने दस्तक दी। यहां 28 मंजिला गगनचुंबी इमारत के 12वें फ्लोर पर स्थित एक फ्लैट में जबरदस्त आग लग गई। तेज हवाओं के चलते लपटें इतनी विकराल हो गईं कि उन्होंने ऊपरी मंजिलों को भी चपेट में ले लिया। घबराए लोग जान बचाने के लिए सीढ़ियों की तरफ भागे। सूचना मिलने पर पहुंची दमकल विभाग की गाड़ियों की सीढ़ियां महज छह मंजिल तक ही पहुंच सकीं, जिससे दमकल विभाग के पास ऊंची सोसायटियों के लिए जरूरी हाइड्रोलिक मशीनों की कमी उजागर हो गई। हालांकि, सोसाइटी का आंतरिक फायर फाइटिंग सिस्टम चालू होने के कारण समय रहते आग पर काबू पा लिया गया, जिससे यहां कोई जनहानि नहीं हुई। इसके कुछ ही घंटों बाद मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित स्कीम नंबर 136 की एक बहुमंजिला इमारत के बेसमेंट में बने ई-व्हीकल शोरूम में भीषण आग लग गई। आग के कारण उठे घने धुएं से पूरी इमारत में रहने वाले लोगों का दम घुटने लगा। दमकलकर्मियों ने दो इमारतों के बीच लोहे की सीढ़ियां लगाकर फंसे हुए नागरिकों का सफल रेस्क्यू किया और चौदह हजार लीटर पानी की मदद से दो घंटे की मशक्कत के बाद हालात पर नियंत्रण पाया।

इन चारों हादसों के बाद अब कानूनी और आधिकारिक जांच के पहिए घूमने शुरू हो गए हैं। स्थानीय पुलिस और राज्य आपदा प्रबंधन विभागों ने संबंधित मामलों में भवन स्वामियों और अस्पताल प्रबंधनों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के तहत आपराधिक मुकदमे दर्ज किए हैं। शुरुआती जांच में यह बात साफ तौर पर सामने आई है कि व्यावसायिक प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करने के बाद कई इमारतों में सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच नहीं की जा रही थी। फायर ब्रिगेड और प्रशासनिक अमले की मुस्तैदी पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर बिना पुख्ता हाइड्रोलिक व्यवस्था और आपातकालीन निकास के इन कमर्शियल गतिविधियों को घनी आबादी वाले क्षेत्रों में संचालित करने की अनुमति कैसे दी जा रही थी।

दिल्ली, मुजफ्फरपुर, नोएडा और इंदौर में हुए ये लगातार अग्निकांड देश के नीति निर्माताओं के लिए एक बेहद गंभीर और आखिरी चेतावनी हैं। बंजर कानून और कागजी फायर ऑडिट के भरोसे लाखों नागरिकों को मौत के कुएं में धकेला जा रहा है। अगर इन घटनाओं के बाद भी व्यावसायिक परिसरों, होटलों और अस्पतालों के सुरक्षा मानकों की कड़ाई से कानूनी समीक्षा नहीं की गई, तो आधुनिक विकास की ये गगनचुंबी इमारतें निर्दोष इंसानों के लिए इसी तरह समय-समय पर 'जिंदा कब्रगाह' बनती रहेंगी।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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