राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच केंद्र सरकार ने सोमवार को एक चौंकाने वाला बयान दिया। पर्यावरण राज्य मंत्री, किर्ति वर्धन सिंह ने संसद में कहा कि वर्तमान वैज्ञानिक डेटा यह स्पष्ट रूप से साबित नहीं करता कि उच्च AQI स्तर सीधे किसी विशेष फेफड़ों की बीमारी का कारण बनते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हवा की गुणवत्ता खराब होने के बावजूद, फिलहाल कोई ठोस प्रमाण नहीं है जो यह दिखाए कि AQI अकेले फेफड़ों की गंभीर बीमारियों जैसे फाइब्रोसिस, COPD, एम्फ़ीसीमा या स्थायी रूप से फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी का कारण बनता है।

सांसदों के सवालों के जवाब में मंत्री ने कहा कि वायु प्रदूषण हालांकि श्वसन संबंधी परेशानियों को उत्पन्न कर सकता है, लेकिन इसके और गंभीर फेफड़ों की बीमारियों के बीच सीधा कारण-प्रभाव का संबंध स्थापित नहीं किया जा सका है। उन्होंने कहा कि सरकार इस क्षेत्र में निरंतर अध्ययन और स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम चला रही है, ताकि लोगों को वायु प्रदूषण के संभावित जोखिमों से अवगत कराया जा सके।

हालांकि, इस बयान के बाद चिकित्सा विशेषज्ञों ने इसे खारिज कर दिया। फेफड़ों और श्वसन विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च AQI स्तर और वायु प्रदूषण के लंबे समय तक संपर्क में रहने से फेफड़ों की सूजन, श्वसन तंत्र की समस्याएं, अस्थमा, ब्रॉन्काइटिस और गंभीर मामलों में फेफड़ों के कैंसर जैसी बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म प्रदूषक कण फेफड़ों में प्रवेश कर वहां ऊतक को क्षति पहुंचा सकते हैं और लंबे समय में श्वसन प्रणाली की कार्यक्षमता में कमी ला सकते हैं।

वर्ष 2025 में देश में वायु प्रदूषण और उच्च AQI से जुड़ी वजहों से अनुमानित हजारों मौतें हुई हैं। स्वास्थ्य अनुसंधान और सार्वजनिक स्वास्थ्य डेटा के अनुसार, दिल्ली, लुधियाना, कानपुर, कोलकाता और मुंबई जैसे प्रदूषण‑ग्रस्त शहरों में वायु प्रदूषण के कारण प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में लोगों की मृत्यु होती है। विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार व्यक्तियों पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है।

सरकारी बयान और विशेषज्ञों की राय के बीच यह अंतर दर्शाता है कि नीति निर्धारण और वैज्ञानिक प्रमाणों के बीच अभी भी पर्याप्त सामंजस्य नहीं बन पाया है। जबकि केंद्र सरकार ने सीधा कारण-प्रभाव साबित नहीं होने की बात कही है, विशेषज्ञ लगातार यह चेतावनी दे रहे हैं कि वायु प्रदूषण को हल्के में लेना लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर परिणाम डाल सकता है।

देशभर में वायु गुणवत्ता के स्तर को मॉनिटर करने और उसे नियंत्रित करने के लिए सरकारी प्रयास जारी हैं। AQI और वायु प्रदूषण पर नियमित रिपोर्ट और सार्वजनिक चेतावनी प्रणाली के माध्यम से नागरिकों को सचेत किया जा रहा है। लेकिन इस बीच, आम जनता के लिए सावधानी बरतना और प्रदूषण से बचाव के उपाय अपनाना अनिवार्य माना जा रहा है। इस बयान का महत्व इस बात में है कि यह न केवल सरकारी नीति और विज्ञान के दृष्टिकोण को उजागर करता है, बल्कि जनता में वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य के बीच संबंध को लेकर जागरूकता पैदा करने का अवसर भी देता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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