नई दिल्ली। आगामी चुनावी प्रक्रियाओं की सटीकता और पारदर्शिता को मजबूत करने की दिशा में चुनाव आयोग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की समयसीमा को बढ़ाने का फैसला लिया है। कई राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों द्वारा समय बढ़ाने की मांग के बाद आयोग ने नया संशोधित शेड्यूल जारी किया, जिससे उत्तर प्रदेश सहित छह राज्यों और अंडमान-निकोबार के मतदाता लाभान्वित होंगे।

उत्तर प्रदेश में 11 दिसंबर को समाप्त होने वाला एसआईआर अब 26 दिसंबर तक चलेगा। आयोग ने मतदाताओं को अतिरिक्त पंद्रह दिनों का समय प्रदान किया है, ताकि वे मतदाता सूची में शामिल होने के लिए अपने दस्तावेज जमा कर सकें और आवश्यक सुधार करवा सकें। संशोधित कार्यक्रम के अनुसार 31 दिसंबर को खंडवार मतदाता नामावली का प्रकाशन होगा, जबकि अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी 2026 को जारी की जाएगी। राज्य में 26 दिसंबर तक पुनरीक्षित सूचीकरण की प्रक्रिया जारी रहेगी।

अन्य राज्यों में भी समयसीमा में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और अंडमान-निकोबार में अब 18 दिसंबर तक पुनरीक्षित सूचीकरण होगा और 23 दिसंबर को प्रकाशन किया जाएगा। तमिलनाडु में संशोधित कटऑफ 14 दिसंबर तय की गई है, जबकि प्रकाशन 19 दिसंबर को होगा। गुजरात में भी यही शेड्यूल लागू किया गया है।

उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने जानकारी दी कि राज्य ने अतिरिक्त समय की मांग इसलिए की थी, ताकि जिला चुनाव अधिकारी मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित तथा डुप्लिकेट मतदाताओं के नामों का पुन: सत्यापन सुनिश्चित कर सकें। उनके अनुसार राज्य में 99.24 प्रतिशत जनगणना प्रपत्रों का डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है, जिनमें से लगभग 2.91 करोड़ प्रविष्टियां पुन: सत्यापन की श्रेणी में आती हैं। इन रिकॉर्ड्स में स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाता, मृत मतदाता, डुप्लिकेट प्रविष्टियां, फॉर्म वापस न करने वाले और अनुपस्थित मतदाता शामिल हैं।

नए शेड्यूल के अनुसार 31 दिसंबर 2025 से 21 फरवरी 2026 तक अधिकारी नोटिसों पर निर्णय लेंगे, गिनती प्रपत्रों का परीक्षण करेंगे और दावों व आपत्तियों का निपटारा करेंगे। इससे पहले चुनाव आयोग 30 नवंबर को भी 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर को एक सप्ताह बढ़ा चुका है, ताकि मतदाता आगामी चुनावों से पहले अपनी प्रविष्टियों की शुद्धता सुनिश्चित कर सकें।

चुनाव आयोग की यह पहल न केवल मतदाता सूची की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में अहम है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करती है कि देश के लोकतांत्रिक तंत्र में प्रत्येक पात्र नागरिक की भागीदारी को सुरक्षित, सटीक और भरोसेमंद बनाया जा सके।

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