Delhi NCR rain alert IMD : देश की राजधानी दिल्ली और पूरे राष्ट्रीय प्रवर्धन क्षेत्र (NCR) में लंबे समय से जारी झुलसाने वाली गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच मौसम ने अचानक एक ऐसा हैरान करने वाला मोड़ लिया, जिसने दिल्लीवासियों को एक ही पल में चिलचिलाती धूप से सीधे सुहाने मौसम के आगोश में ला खड़ा किया। गुरुवार, 4 जून को दोपहर के बाद अचानक आसमान में काले और घने बादलों का ऐसा अभूतपूर्व जमावड़ा हुआ कि दिन के उजाले में ही पूरी दिल्ली में रात जैसा गहरा अंधेरा छा गया। इसके तुरंत बाद शुरू हुई तेज रफ्तार तूफानी हवाओं और कड़कती बिजली के बीच झमाझम बारिश ने दिल्ली-एनसीआर की तपती धरती को पूरी तरह से सराबोर कर दिया। इस अचानक हुए बड़े बदलाव और ठंडी फुहारों ने दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में रहने वाले करोड़ों लोगों की रूह को एक असीम और गहरा सुकून पहुंचाया है।

मौसम के इस बदले हुए तेवर को देखते हुए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बेहद मुस्तैदी दिखाते हुए 4 जून और 5 जून के लिए पूरे दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में 'येलो अलर्ट' जारी कर दिया है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि अगले कुछ घंटों के दौरान दिल्ली के नरेला, अलीपुर, बुराड़ी, बादली, मॉडल टाउन, करावल नगर, आज़ादपुर, दिल्ली विश्वविद्यालय, सिविल लाइंस, दिलशाद गार्डन, सीमापुरी, कश्मीरी गेट, सीलमपुर, शाहदरा, विवेक विहार और लाल किले सहित एनसीआर के लोनी देहात जैसे क्षेत्रों में मध्यम से भारी बारिश और भीषण बिजली गिरने की प्रबल आशंका है। इसके साथ ही इन इलाकों में 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से विनाशकारी तूफानी हवाएं चलने और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि होने की भी आधिकारिक चेतावनी दी गई है, जिससे तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है।

राजधानी को मिली इस तात्कालिक बड़ी राहत के बीच अगर इस साल होने वाली कुल मानसूनी वर्षा के दीर्घकालिक राष्ट्रीय गणित को समझें, तो मौसम विभाग के आंकड़े थोड़े चिंताजनक नजर आते हैं। पिछले सप्ताह ही मौसम विभाग ने मौसमी वर्षा के अपने पूर्व निर्धारित पूर्वानुमान में एक बड़ा संशोधन करते हुए यह स्पष्ट किया था कि इस वर्ष देश में कुल वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना है। आईएमडी के ताजा वैज्ञानिक विश्लेषण के अनुसार, इस साल पूरे देश में होने वाली मौसमी वर्षा, दीर्घकालिक औसत यानी लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) की लगभग 90 फीसदी तक ही सीमित रह सकती है। यहां यह समझना आवश्यक है कि एलपीए का तात्पर्य किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र में एक निर्धारित लंबी अवधि—आमतौर पर 30 से 50 वर्षों—के दौरान दर्ज की गई औसत वर्षा से होता है, जिसके तहत 1971 से 2020 तक के आंकड़ों के आधार पर भारत का राष्ट्रीय एलपीए 87 सेंटीमीटर निर्धारित है। मौसम विभाग के कड़े नियमों के मुताबिक, यदि मानसून के चार महीनों के दौरान कुल वर्षा इस एलपीए के 90 प्रतिशत से भी नीचे चली जाती है, तो उसे आधिकारिक तौर पर ‘अल्प वर्षा’ या सूखे जैसी आंशिक स्थिति की श्रेणी में रख दिया जाता है।

इस साल देश में सामान्य से कम वर्षा होने के पीछे जो सबसे बड़ी और मुख्य भौगोलिक वजह सामने आ रही है, वह है वैश्विक प्रशांत महासागर में 'अल नीनो' (El Nino) की स्थिति का तेजी से विकसित होना। मौसम विज्ञान की स्थापित वैज्ञानिक धारणाओं के अनुसार, अल नीनो का सीधा और घातक प्रभाव भारतीय मानसून पर पड़ता है, जिससे देश में बारिश की मात्रा काफी हद तक घट जाती है। वर्तमान में भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में तटस्थ अल नीनो-दक्षिणी दोलन की जो स्थिति बनी हुई थी, वह अब बहुत तेजी से अल नीनो चक्र की तरफ बढ़ रही है। आईएमडी के वैज्ञानिकों ने अपनी तकनीकी रिपोर्ट में साझा किया है कि जून के महीने में अल नीनो की यह स्थिति भले ही थोड़ी कमजोर और सुस्त बनी रहे, लेकिन आगामी सितंबर का महीना आते-आते इसके मध्यम से लेकर अत्यधिक मजबूत होने की गंभीर आशंका है, जो मानसून के अंतिम दौर को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, इन सबके बीच एक सकारात्मक पहलू यह भी है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून ने तमाम बाधाओं को पार करते हुए गुरुवार को ही केरल के तट पर अपनी समय पर दस्तक दे दी है, जो देश में चार महीने की मुख्य वर्षा ऋतु के आधिकारिक आगाज का प्रतीक है। हालांकि मौसम विभाग ने पहले इसके 26 मई को ही केरल पहुंचने का समय से पूर्व अनुमान लगाया था, लेकिन अब 4 जून को इसकी पक्की एंट्री से देशव्यापी कृषि और जल स्रोतों को एक नई संजीवनी मिलने की उम्मीद बंधी है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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