दिल्ली के दक्षिणी क्षेत्र मालवीय नगर के हौज रानी इलाके में स्थित फ्लोरिश स्टे B&B/होटल भवन में 3 जून 2026 की तड़के हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। यह हादसा उस समय हुआ जब इमारत के भीतर कई लोग अपने परिजनों की चिकित्सा जरूरतों के चलते ठहरे हुए थे। देखते ही देखते आग ने पूरे बहुमंजिला भवन को अपनी चपेट में ले लिया और जीवन बचाने की हर कोशिश धुएँ और लपटों के बीच दम तोड़ती चली गई।

प्रत्यक्षदर्शियों और प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, यह इमारत बेसमेंट सहित लगभग पाँच मंजिलों की थी, जिसमें बड़ी संख्या में लोग ठहरे हुए थे। आरोप है कि भवन में अग्नि सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी की गई थी और निकास मार्ग या तो अवरुद्ध थे या पर्याप्त नहीं थे, जिसके कारण आग लगने के बाद लोगों के लिए बाहर निकलना लगभग असंभव हो गया। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में पूरा परिसर धुएँ से भर गया और लोग अंदर ही फँस गए।

इस दर्दनाक हादसे में कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। कई पीड़ितों की मौत का कारण अत्यधिक धुएँ का सांसों में जाना और गंभीर जलन बताया गया है। कुछ लोग जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिलों से कूदने को भी मजबूर हुए, जिससे स्थिति और भयावह हो गई।

इसी हादसे में सबसे अधिक दर्दनाक पहलू यह रहा कि गुरुग्राम निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट विवेक अग्रवाल और उनके परिवार के आठ सदस्य भी इस अग्निकांड की चपेट में आ गए। जानकारी के अनुसार, विवेक अग्रवाल अपने परिवार के साथ दिल्ली इसलिए आए थे क्योंकि उनके पिता मैक्स अस्पताल, साकेत में गंभीर फेफड़ों की बीमारी के चलते भर्ती थे। परिवार इस कठिन समय में एक साथ रहने और देखभाल के उद्देश्य से होटल में ठहरा हुआ था।



मृतकों में विवेक अग्रवाल, उनकी पत्नी, उनकी माता (प्रेमलता), उनकी दो पुत्रियाँ, उनके मामा, मौसी और एक अन्य पारिवारिक सदस्य शामिल हैं, जो अलग-अलग शहरों से दिल्ली पहुंचे थे। प्रारंभिक रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि कई शवों की हालत अत्यंत जली हुई थी, जिससे उनकी पहचान करना भी कठिन हो गया।

हादसे के बाद प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही की जाएगी। प्रशासन ने होटल प्रबंधन की भूमिका, भवन की संरचनात्मक सुरक्षा, फायर सेफ्टी मानकों की अनुपालन स्थिति और आपातकालीन निकास व्यवस्था की गहन जांच शुरू कर दी है। मामले में लापरवाही और संभावित आपराधिक जिम्मेदारी को लेकर कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है।

इस हृदयविदारक घटना के बाद मृतकों के पार्थिव शरीर गुरुग्राम ले जाए गए, जहाँ मोक्ष धाम श्मशान भूमि में विवेक अग्रवाल और उनके परिवार के सदस्यों का अंतिम संस्कार अत्यंत शोकपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। परिवार और करीबी रिश्तेदारों की उपस्थिति में यह अंतिम विदाई एक गहरे शोक और स्तब्धता के बीच पूरी हुई। यह हादसा न केवल एक भवन अग्निकांड के रूप में दर्ज हुआ है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और मानवीय त्रासदी का ऐसा उदाहरण बन गया है, जिसने कई परिवारों की खुशियों को एक ही पल में समाप्त कर दिया।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

Next Story