दिल्ली में ऊर्जा संरक्षण के लिए 'मेट्रो मंडे' अभियान की शुरुआत, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और मंत्रियों ने ईंधन बचाने के लिए वीआईपी गाड़ियां छोड़ मेट्रो से की यात्रा।

CM Rekha Gupta metro travel : देश की राजधानी दिल्ली में आज एक अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला, जब सत्ता के गलियारों से निकलकर मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायक आम जनता के साथ दिल्ली मेट्रो की कतारों में खड़े नजर आए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊर्जा संरक्षण के वैश्विक आह्वान पर अमल करते हुए दिल्ली सरकार ने 'मेट्रो मंडे' (Metro Monday) की शुरुआत की है। इस ऐतिहासिक पहल के तहत मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, मंत्री रविंदर इंद्रजीत सिंह और एनडीएमसी के उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल सहित कई दिग्गज नेताओं ने अपनी आधिकारिक गाड़ियों का त्याग कर सार्वजनिक परिवहन को चुना। सोमवार की सुबह जब मुख्यमंत्री आईटीओ मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 5 पर पहुंचीं, तो उन्होंने न केवल एक प्रशासनिक आदेश का पालन किया, बल्कि देश के आर्थिक और पर्यावरणीय भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एक मजबूत संदेश भी दिया।

यह पहल 90 दिवसीय 'मेरा भारत, मेरा योगदान' अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसकी घोषणा 14 मई को की गई थी। इस अभियान की पृष्ठभूमि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और हाल ही में ईंधन की कीमतों में हुई ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी से जुड़ी है। संकट की इस घड़ी में संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कड़े नियम लागू किए हैं। 'मेट्रो मंडे' के तहत मंत्रियों और अधिकारियों के लिए सप्ताह में एक दिन मेट्रो का सफर अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा, आधिकारिक वाहनों के ईंधन कोटे में 20 प्रतिशत की तत्काल कटौती, दफ्तरों के समय में बदलाव (Staggered Hours) और अगले छह महीनों तक नए सरकारी वाहनों की खरीद पर पूर्ण प्रतिबंध जैसे साहसिक निर्णय लिए गए हैं ताकि ईंधन की खपत को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सके।

इस अभियान को जनसमर्थन भी व्यापक मिल रहा है। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कनॉट प्लेस जाने के लिए मेट्रो का सहारा लिया, वहीं बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर ने भी इस मुहिम की सराहना करते हुए इसे राष्ट्र निर्माण में एक छोटा सा प्रयास बताया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मेट्रो में सफर के दौरान नागरिकों से अपील की कि वे अपनी निजी कारों के स्थान पर सार्वजनिक परिवहन का अधिक से अधिक उपयोग करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि सामूहिक परिवहन को अपनाना ही दिल्ली की सड़कों पर बढ़ते दबाव और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ते ईंधन के बोझ को कम करने का एकमात्र कारगर रास्ता है। हालांकि, इस दौरान कुछ स्टेशनों पर वीवीआईपी मूवमेंट और उनके सुरक्षा घेरे के कारण आम यात्रियों को होने वाली भीड़ जैसी चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया गया, जिसे आने वाले समय में सुव्यवस्थित करने की आवश्यकता है।

'मेट्रो मंडे' का यह प्रयास केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि यह दिल्ली के प्रशासनिक और सामाजिक व्यवहार में एक बड़े बदलाव की आधारशिला रख रहा है। सरकार का मानना है कि 90 दिनों का यह विशेष अभियान संसाधनों के संरक्षण के प्रति लोगों की मानसिकता को बदलने में सफल होगा। सड़कों पर कम होते वाहनों और मेट्रो में बढ़ती सक्रियता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब नेतृत्व स्वयं मिसाल पेश करता है, तो जनता भी उस दिशा में कदम बढ़ाने को तत्पर रहती है। आने वाले महीनों में यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक होगी, बल्कि वैश्विक ईंधन संकट के बीच आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी नई ऊंचाई प्रदान करेगी।

Updated On 18 May 2026 6:17 PM IST
Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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