Delhi petrol price crosses 100 mark : देश की राजधानी दिल्ली में रहने वाले आम नागरिकों को महंगाई का एक और बड़ा और तगड़ा झटका लगा है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी और तेल कंपनियों के नीतिगत फैसलों के कारण दिल्ली में पेट्रोल की कीमतों ने ₹100 के मनोवैज्ञानिक और ऐतिहासिक स्तर को पार कर लिया है। पिछले कुछ दिनों से जारी लगातार बढ़ोतरी के बाद अब वाहन ईंधन के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं, जिसने मध्यम वर्ग और आम उपभोक्ताओं के मासिक बजट को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है। इस अप्रत्याशित मूल्य वृद्धि ने एक बार फिर देश के आर्थिक और राजनीतिक गलियारों में ईंधन की कीमतों और सार्वजनिक नीति को लेकर एक नई और गंभीर बहस छेड़ दी है।

इस बड़े आर्थिक घटनाक्रम के तहत सरकारी तेल कंपनियों ने ईंधन की कीमतों में एक बार फिर भारी बढ़ोतरी की है। ताजा फैसलों के अनुसार, पेट्रोल की कीमतों में ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल के दामों में ₹2.71 प्रति लीटर का भारी इजाफा किया गया है। इस ताजा बढ़ोतरी के बाद देश की राजधानी में पेट्रोल की कीमत अब ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल की कीमत ₹95.20 प्रति लीटर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई है। गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों के भीतर ही ईंधन की कीमतों में कुल ₹7.5 प्रति लीटर की संचयी वृद्धि दर्ज की जा चुकी है, जिसने बाजार में चौतरफा चिंता बढ़ा दी है।

दरअसल, तेल विपणन कंपनियों का यह कदम पिछले चार वर्षों से ईंधन की कीमतों पर लगी अघोषित रोक या फ्रीज के खत्म होने का स्पष्ट संकेत है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में वैश्विक तनावों और भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार जा चुकी हैं। इस अंतरराष्ट्रीय तेजी के कारण सरकारी तेल कंपनियों को हो रहे भारी नुकसान की भरपाई करने के लिए कीमतों में यह आक्रामक बदलाव किया गया है। हालांकि, भारत द्वारा लगातार बड़ी मात्रा में आयात किए जा रहे रियायती रूसी कच्चे तेल ने देश में ईंधन की कीमतों को उस बेकाबू स्तर पर जाने से रोक रखा है, जो वर्तमान में पश्चिमी और यूरोपीय देशों में देखने को मिल रहा है।

इस मूल्य वृद्धि के साथ ही देश में एक बड़ा राजनीतिक घमासान भी शुरू हो गया है। मुख्य विपक्षी दलों और नेताओं ने इस बढ़ोतरी की टाइमिंग पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि आम चुनावों के संपन्न होने तक तेल कंपनियों ने जानबूझकर कीमतों को स्थिर रखा था और चुनाव खत्म होते ही जनता पर यह अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाल दिया गया है। दूसरी ओर, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए तर्क दिया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की ताकतों के कारण यह वृद्धि अपरिहार्य थी। इसके साथ ही भाजपा ने विभिन्न राज्यों में स्थानीय स्तर पर लगने वाले मूल्य वर्धित कर (VAT) की भिन्नताओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि गैर-भाजपा शासित राज्यों में वैट की उच्च दरों के कारण ईंधन की कीमतें दिल्ली की तुलना में काफी अधिक हैं।

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आई इस अभूतपूर्व तेजी का सीधा और दूरगामी असर अब देश के आर्थिक ताने-बाने पर पड़ने की आशंका है। डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई और परिवहन लागत में तत्काल वृद्धि होगी, जिसका सीधा असर आने वाले दिनों में फल, सब्जियों और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर दिखेगा। जानकारों का मानना है कि चार साल के लंबे अंतराल के बाद शुरू हुआ कीमतों में बढ़ोतरी का यह सिलसिला यदि आगे भी जारी रहा, तो यह खुदरा मुद्रास्फीति को बढ़ावा दे सकता है। ऐसे में, आने वाले समय में यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि क्या सरकार जनता को राहत देने के लिए उत्पाद शुल्क में किसी कटौती का ऐलान करती है या तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार के दबाव में आकर कीमतों को इसी तरह बढ़ाती रहेंगी।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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