दिल्ली आबकारी मामले में बड़ा मोड़; अब जस्टिस मनोज जैन की कोर्ट में पहुंचा केजरीवाल का केस
दिल्ली आबकारी नीति केस की सुनवाई अब जस्टिस मनोज जैन करेंगे। कोर्ट की गरिमा धूमिल करने के आरोप में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत कई AAP नेताओं पर आपराधिक अवमानना का केस दर्ज।

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल मंच पर लगे पोडियम के सामने खड़े होकर जनसभा या प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए.
Delhi Excise Policy Case 2026 : दिल्ली के बहुचर्चित आबकारी नीति (शराब नीति) मामले में एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा न्यायिक उलटफेर सामने आया है. दिल्ली हाई कोर्ट में चल रहे इस संवेदनशील मामले की सुनवाई अब जस्टिस मनोज जैन की एकल पीठ करेगी. इस हाई-प्रोफाइल केस में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित आम आदमी पार्टी (AAP) के कई शीर्ष नेता मुख्य आरोपी हैं. इस मामले का स्थानांतरण (ट्रांसफर) तब हुआ जब पूर्व में सुनवाई कर रही जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने 'आप' नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना (क्रिमिनल कंटेम्प्ट) की कार्यवाही शुरू करने का आदेश देते हुए मुख्य मामले को दूसरी बेंच को सौंपने का निर्देश दिया. इस न्यायिक बदलाव ने दिल्ली की सियासत के साथ-साथ कानूनी गलियारों में भी एक नया विमर्श छेड़ दिया है, जिसने इस पूरे मामले को और अधिक पेचीदा बना दिया है.
इस पूरे कानूनी विवाद और पीठ बदलने के कारणों की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो इसकी कड़ियाँ पिछले कुछ महीनों के घटनाक्रमों से जुड़ी हैं. कथित शराब नीति घोटाले का यह मामला साल 2022 में तब शुरू हुआ था, जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने दिल्ली की वर्ष 2021-22 की आबकारी नीति में कथित विसंगतियों को लेकर एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी. केंद्रीय जांच एजेंसियों का आरोप था कि नीति में जानबूझकर बदलाव कर कुछ खास शराब कारोबारियों और समूहों (कार्टेल) को अनुचित लाभ पहुंचाया गया, जिसके बदले आम आदमी पार्टी और उसके नेताओं ने रिश्वत ली. बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी इस मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत केस दर्ज किया. इस साल 27 फरवरी को एक निचली अदालत ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया सहित सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया था, जिसे सीबीआई ने हाई कोर्ट में चुनौती दी.
मामला जब हाई कोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के समक्ष आया, तो उन्होंने प्रथम दृष्टया निचली अदालत के आदेश की कुछ टिप्पणियों को त्रुटिपूर्ण माना. इसके बाद अरविंद केजरीवाल और अन्य आरोपियों ने जस्टिस शर्मा पर पूर्वाग्रह की आशंका जताते हुए उनसे मामले की सुनवाई से अलग (रिक्यूज) होने के लिए आवेदन दायर किया, जिसे जज ने 20 अप्रैल को खारिज कर दिया. इसके विरोध में 'आप' नेताओं ने कोर्ट की कार्यवाही का पूरी तरह से बहिष्कार करने का अभूतपूर्व निर्णय लिया. विवाद तब और गहरा गया जब जस्टिस शर्मा ने पाया कि सोशल मीडिया पर उनके और उनके परिवार के खिलाफ एक सुनियोजित और अपमानजनक अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें उनके वाराणसी के एक भाषण का एडिटेड वीडियो भी वायरल किया गया.
न्यायिक मर्यादा और संस्थागत शुचिता का हवाला देते हुए जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने 14 मई को अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, दुर्गेश पाठक, विनय मिश्रा और सौरभ भारद्वाज सहित अन्य नेताओं के खिलाफ सू मोटो (स्वतंत्र संज्ञान) लेते हुए आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया. चूंकि उन्होंने खुद अवमानना की प्रक्रिया शुरू की थी, इसलिए न्यायिक अनुशासन का पालन करते हुए उन्होंने मुख्य मामले (CBI की रिवीजन याचिका) से खुद को अलग कर इसे मुख्य न्यायाधीश के पास प्रशासनिक पुनर्आवंटन के लिए भेज दिया, जहां से अब यह मामला जस्टिस मनोज जैन की कोर्ट में पहुंचा है. जहाँ एक तरफ आम आदमी पार्टी ने इस ट्रांसफर को अपनी नैतिक जीत बताया है, वहीं दूसरी तरफ हाई कोर्ट की एक खंडपीठ ने अवमानना मामले में सभी आरोपी नेताओं को औपचारिक नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब तलब कर लिया है. इस प्रशासनिक और कानूनी रस्साकशी के बीच अब सबकी निगाहें जस्टिस मनोज जैन की कोर्ट पर टिकी हैं, जहां 25 मई को इस मुख्य मामले की अगली सुनवाई होनी तय हुई है.

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
