ऑनलाइन दवाओं की अनियमितताओं और एआई नुस्खों के खिलाफ दिल्ली के केमिस्टों की आज हड़ताल; अस्पतालों के पास आपातकालीन और जीवन रक्षक दवा सेवाएं रहेंगी चालू।

Delhi chemist strike 2026 : देश की राजधानी दिल्ली सहित पूरे देश में स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करने वाली एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है. ऑनलाइन दवाओं की अनियंत्रित बिक्री, भारी छूट के कारण छोटे दुकानदारों के सामने पैदा हुए अस्तित्व के संकट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किए जा रहे फर्जी मेडिकल नुस्खों के विरोध में दिल्ली के दवा व्यापारियों ने एक बड़े आंदोलन का शंखनाद कर दिया है. दिल्ली के प्रमुख दवा व्यापारी संगठन 'आरडीसीए वन दिल्ली' ने आधिकारिक तौर पर ऐलान किया है कि 20 मई को राजधानी के सभी प्रमुख केमिस्ट और ड्रगिस्ट अपनी दुकानें पूरी तरह बंद रखकर राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर रहेंगे. संगठन ने आम जनता के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण एडवाइज़री जारी करते हुए अपील की है कि किसी भी प्रकार की चिकित्सीय असुविधा और दवाओं की किल्लत से बचने के लिए लोग 20 मई से पहले अपनी रोजमर्रा की जरूरी दवाएं खरीद कर स्टॉक कर लें, ताकि हड़ताल के दौरान उन्हें भटकना न पड़े.

इस महा-हड़ताल की पृष्ठभूमि और दवा व्यापारियों की चिंताओं पर गौर किया जाए तो यह आंदोलन सीधे तौर पर डिजिटल फार्मेसी के बढ़ते एकाधिकार और मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है. केमिस्ट एसोसिएशनों का मुख्य आरोप है कि ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म्स बिना किसी सख्त नियामक जांच के दवाओं की अनियंत्रित बिक्री कर रहे हैं. सबसे गंभीर चिंता एआई (AI) तकनीक के दुरुपयोग को लेकर है, जिसके जरिए फर्जी और अवैध डॉक्टर के पुर्जे (प्रिस्क्रिप्शन) तैयार किए जा रहे हैं. बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के महासचिव प्रभाकर कुमार ने इस विसंगति को स्पष्ट करते हुए कहा कि जहां पारंपरिक ऑफलाइन दुकानदारों को नशीली और प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री के लिए डॉक्टर के मूल पर्चे की कॉपी रखनी पड़ती है और कड़े सरकारी रजिस्टरों का रखरखाव करना पड़ता है, वहीं ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर एआई जनित फर्जी पर्चों के सहारे प्रतिबंधित और नशीली दवाएं आसानी से मंगाई जा रही हैं. भारी डिस्काउंट के इस खेल ने देश के लाखों छोटे और मध्यम दवा दुकानदारों के पारंपरिक व्यापार को पूरी तरह तबाह करने की कगार पर ला खड़ा किया है.

इस संवेदनशील आपातकालीन स्थिति को देखते हुए ड्रग्स कंट्रोल डिपार्टमेंट और दवा संगठनों के बीच एक उच्च स्तरीय आधिकारिक बैठक आयोजित की गई. गहन विचार-विमर्श के बाद यह विधिक और प्रशासनिक सहमति बनी कि हड़ताल के दौरान मानवीय आधार पर आम जनता को जीवन रक्षक दवाओं से वंचित नहीं किया जाएगा. दोनों पक्षों ने संयुक्त रूप से यह निर्णय लिया है कि दिल्ली के सभी बड़े सरकारी और निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और इमरजेंसी हेल्थकेयर सेंटर्स के ठीक पास स्थित दवा दुकानों को इस बंद से मुक्त रखा जाएगा ताकि आपातकालीन दवा सेवाएं निर्बाध रूप से चालू रह सकें. जान बचाने वाली दवाओं (लाइफ सेविंग ड्रग्स) की उपलब्धता चौबीसों घंटे सुनिश्चित की जाएगी और संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार, 20 मई की शाम से सभी जिलों में दवाओं की खुदरा बिक्री को धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह सामान्य कर दिया जाएगा.

हालांकि, इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन के बीच केमिस्ट संगठनों के भीतर वैचारिक मतभेद भी उभर कर सामने आए हैं, जहां कई राज्यों के स्थानीय दवा संगठनों ने खुद को इस हड़ताल से अलग कर लिया है. इस बढ़ते गतिरोध के बीच भारत में दवाओं की देखरेख और विनियमन करने वाली केंद्रीय शीर्ष सरकारी संस्था 'केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन' (CDSCO) भी पूरी तरह सक्रिय हो गई है. सीडीएससीओ वर्तमान में दवा दुकानदारों द्वारा उठाए गए मुद्दों और नियमों के उल्लंघन की गंभीर कानूनी समीक्षा कर रही है ताकि ई-फार्मेसी के लिए एक सख्त गाइडलाइन तैयार की जा सके. डिजिटल व्यापार के इस दौर में यह हड़ताल भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र के उस बड़े संरचनात्मक संघर्ष को दर्शाती है, जहाँ एक तरफ ऑनलाइन तकनीक की सुविधा है और दूसरी तरफ देश के लाखों खुदरा व्यापारियों की आजीविका और मरीजों की सुरक्षा का गंभीर कानूनी सवाल खड़ा है.

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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