Constitution Day 2025 : संविधान सदन के ऐतिहासिक सेंट्रल हॉल में बुधवार की सुबह राष्ट्र की धड़कन जैसे ठहर गई, जब संविधान दिवस 2025 के राष्ट्रीय समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय लोकतंत्र की गौरवशाली यात्रा और भविष्य की दिशा को एक प्रभावशाली संदेश के साथ देश के सामने रखा। समारोह का आरंभ उस क्षण से हुआ जब नौ भारतीय भाषाओं में संविधान का डिजिटल संस्करण जारी किया गया यह भारतीय भाषाई विविधता और लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बना।

सेंट्रल हॉल में उपस्थित प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, विपक्षी नेताओं और सांसदों का स्वागत करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि भारत अपनी संवैधानिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक संरचना के कारण आज विश्व के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुका है। उन्होंने विश्वास प्रकट किया कि भारत निकट भविष्य में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रहा है।

समारोह के दौरान जारी किए गए संविधान के डिजिटल संस्करण मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, ओड़िया और असमिया भाषाओं में उपलब्ध कराए गए। यह प्रयास न केवल भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान का प्रतीक है, बल्कि संविधान को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि संवैधानिक ढांचे के अनुरूप देश की कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका ने न केवल राष्ट्र के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग के जीवन को मजबूती और दिशा प्रदान की है। उन्होंने संसद के दोनों सदनों के सदस्यों द्वारा विकसित स्वस्थ राजनीतिक चिंतन की परंपरा को भारतीय लोकतंत्र की शक्ति बताया।

राष्ट्रपति मुर्मू ने यह भी कहा कि भविष्य में जब विश्व के संविधानों और लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं का तुलनात्मक अध्ययन होगा, तो भारतीय संविधान और लोकतंत्र का उल्लेख स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगा। उन्होंने देश के नेताओं और सभी नागरिकों को भारतीय लोकतंत्र की इस गौरवशाली विरासत के संरक्षक और सहभागी बताया।

अपने वक्तव्य के एक महत्त्वपूर्ण हिस्से में राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त होकर राष्ट्रवादी सोच अपनाने का मार्ग दिखाता है। उन्होंने 25 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकालने को देश की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया और कहा कि महिलाएँ, युवा, किसान, मध्यम वर्ग और वंचित समाज के समूह लोकतंत्र की नींव को निरंतर मजबूत कर रहे हैं।

समारोह के दौरान पूरा हॉल उस समय एक सुर में गूंज उठा जब राष्ट्रपति के नेतृत्व में सभी सांसदों ने संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन किया और उसके बाद राष्ट्रगान प्रस्तुत किया गया। सेंट्रल हॉल की गंभीरता, लोकतांत्रिक उत्साह और संवैधानिक गौरव ने इस क्षण को अत्यंत विशेष और ऐतिहासिक बना दिया।

कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रपति मुर्मू ने विश्वास व्यक्त किया कि संसद के मार्गदर्शन में ‘विकसित भारत’ का संकल्प अवश्य पूरा होगा। उन्होंने संविधान दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए देशवासियों के स्वर्णिम भविष्य की कामना की। इस समारोह ने एक बार फिर यह संदेश मजबूत किया कि भारत का संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा और उसके उज्ज्वल भविष्य का मार्गदर्शक है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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