राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में बढ़ती वायु प्रदूषण की गहराती आफत ने लोगों को मजबूर कर दिया है कि वे केवल घरों में ही नहीं, बल्कि अपनी कारों में भी एयर‑प्यूरीफायर लगाने को प्राथमिकता देने लगे हैं। हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि कार एयर‑प्यूरीफायर व केबिन‑फिल्टर जैसी वस्तुओं को पाने के लिए लोग घंटों लाइन में खड़े हो रहे हैं, लेकिन कई दुकानों का स्टॉक अब पहले ही समाप्त हो चुका है।


आंकड़ों के अनुसार हवा की गुणवत्ता सूचकांक (AQI) कई इलाकों में “गंभीर” से “खतरनाक” स्तर तक पहुँच चुकी है। लगातार बढ़ते प्रदूषण, वाहन धुंए, औद्योगिक उत्सर्जन और निर्माण कार्यों से उठने वाली धूल‑मिट्टी ने NCR में रहने वालों की सांसें तक फूलने पर मजबूर कर दी हैं। इन हालातों में कारों में यात्रा करना भी खतरनाक हो गया है, क्योंकि बंद‑कम्फर्ट वाली कारों में धीमी गति से हवा का आना और बाहर की जहरीली हवा के प्रवेश से अंदर की हवा भी दूषित हो जाती है।


कारों में प्यूरीफायर- बचाव या मजबूरी?

यही वजह है कि कई लोग अब घरों के प्यूरीफायर के साथ-साथ कारों के लिए भी एयर‑प्यूरीफायर लगवाने को प्राथमिकता दे रहे हैं। लेकिन जैसे-जैसे लोगों की मांग बढ़ी, वैसे‑वैसे मेडिकल स्टोर, मोटर‑स्पेयर पार्ट्स की दुकानों, सुपरमार्केट्स और ऑनलाइन विक्रेताओं पर कार एयर‑प्यूरीफायर, केबिन‑फिल्टर व अन्य संबंधित सामानों की डिमांड आसमान छू गई। कई दुकानदारों का कहना है कि “स्टॉक खत्म हो चुका है” वजह थीं अचानक आई भारी मांग और तुरंत ही पूरी तरह बिक गई आपूर्ति।

ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफार्मों और क्विक‑किराना सेवाओं पर भी ग्राहकों की भीड़ इतनी बढ़ गई कि वेबसाइटों पर “बिक गया” या “आउट ऑफ स्टॉक” के संदेश सामान्य हो गए। न केवल एयर‑प्यूरीफायर, बल्कि साथ में N95 मास्क, इंटीग्रेटेड फिल्टर, और कार केबिन वेंटिलेशन अपग्रेड किट की बिक्री में भी तेजी आई।

प्यूरीफायर और फिल्टर कारकों को आपातकालीन उपाय के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक अल्पकालीन व्यवस्था है। हवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए जरूरी है कि प्रदूषण के स्रोतों जैसे कि वाहनों की संख्या, निर्माण धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और कृषि‑क्षेत्रों में जीवाश्म जलने — को नियंत्रित किया जाए। जहाँ एक ओर लोग अपनी कारों में प्यूरीफायर लगाकर अपनी सुरक्षा की कोशिश कर रहे हैं, वहीं ऐसे कदम उस बड़े बदलाव की चुनौती की ओर इशारा करते हैं, जो स्थायी समाधान के लिए जरूरी है।

इस दौर में, यह मांग सिर्फ इतना नहीं बताती कि लोग खुद को सुरक्षित बनाना चाहते हैं; यह उस असुरक्षा का प्रतीक है, जो प्रदूषित हवा के बीच जीने को मजबूर कर देती है। अगर सरकारी नीतियां, औद्योगिक व यातायात नियंत्रण, और वायु गुणवत्ता मानकों का कठोर पालन समय पर नहीं हुआ तो प्यूरीफायर भी उपाय नाकाफी साबित हो सकते हैं।

NCR में कार एयर‑प्यूरीफायर की मांग और उसके साथ ढेर सारी अन्य हर्बल और तकनीकी उपादानों की खपत में उछाल यह सब इस बात का संकेत है कि अब केवल व्यक्तिगत रक्षा पर्याप्त नहीं रही। जरूरत है सामूहिक प्रयास, जागरूकता और निर्णायक नीतिगत कदमों की, ताकि हवा फिर से साफ हो सके न कि सिर्फ घरों और कारों के अंदर।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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