राजस्थान में माटीकला बोर्ड के प्रशिक्षण शिविर का भव्य समापन, दस्तकारों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का अवसर
डीग में राजस्थान माटीकला बोर्ड के 10-दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर का भव्य समापन हुआ। मुख्यमंत्री राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने दस्तकारों को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए इलेक्ट्रिक चाक और पग-मिल वितरित किए। कार्यक्रम ने पारंपरिक कला को बढ़ावा और शिल्पकारों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया।

डीग, 25 दिसंबर: राजस्थान माटीकला बोर्ड के तत्वावधान में स्थानीय दस्तकारों के कौशल विकास के लिए आयोजित 10-दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर का गुरुवार को बृजनगर स्थित पंवार मैरिज होम में भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में माननीय गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम उपस्थित थे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता बोर्ड के अध्यक्ष प्रहलाद राय टांक ने की।
समारोह की शुरुआत अतिथियों द्वारा मां यादे माता के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से हुई, जो एक पावन और सांस्कृतिक वातावरण प्रदान करने वाला क्षण था। दस दिनों तक चले इस प्रशिक्षण शिविर में दस्तकारों को मिट्टी के नए डिजाइन, फिनिशिंग तकनीक और बाजार की मांग के अनुरूप आधुनिक उत्पाद तैयार करने के गुर सिखाए गए।
मुख्य अतिथि जवाहर सिंह बेढम ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार पारंपरिक कलाओं को पुनर्जीवित करने और शिल्पकारों की आय बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मिट्टी से कलाकृतियां बनाना न केवल एक पवित्र कार्य है, बल्कि आधुनिक तकनीक के प्रयोग से शिल्पकारों का श्रम कम होने के साथ ही उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा में भी सुधार आएगा। उन्होंने दस्तकारों को 45 इलेक्ट्रिक चाक और मिट्टी गूंथने की मशीनें (पग-मिल) वितरित की, ताकि उनकी कला और आर्थिक स्थिति दोनों सुदृढ़ हो सके।
बोर्ड के अध्यक्ष प्रहलाद राय टांक ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में राजस्थान की माटीकला को वैश्विक पहचान दिलाने पर जोर दिया। उन्होंने शिल्पकारों से अपील की कि वे बोर्ड की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाकर अपने कौशल और आय में वृद्धि करें।
समारोह में उपखण्ड अधिकारी सतीश बंसल, तहसील अध्यक्ष विश्राम सिंह, बदन सिंह, मोहन प्रजापति (सीकरी), कोकीराम, पुष्पेन्द्र पाटका, रामलाल, सोनू गालव, कैलाश सहित बड़ी संख्या में दस्तकार और महिलाएं उपस्थित थीं। कार्यक्रम का संचालन प्रजापति समाज, बृजनगर के अध्यक्ष ठाकुर सिंह द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया।
इस कार्यक्रम ने दस्तकारों के लिए आधुनिक तकनीक के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण और पारंपरिक कला के संरक्षण का एक नया मार्ग प्रशस्त किया। राजस्थान माटीकला बोर्ड द्वारा आयोजित यह प्रशिक्षण शिविर स्थानीय कला को प्रोत्साहित करने के साथ ही शिल्पकारों के जीवन में स्थायी बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
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Pooran Prakash Bansal, Deeg
नाम: पूरण प्रकाश बंसल
पद: पत्रकार (प्रातः काल)
कार्यक्षेत्र: डीग जिला (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): जिला समाचार, क्राइम (अपराध), प्रशासन, और स्वास्थ्य
परिचय
पूरण प्रकाश बंसल राजस्थान के डीग जिले के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में एक पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूरण जी डीग जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों से जिला स्तरीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, स्वास्थ्य व्यवस्था और आपराधिक मामलों (क्राइम) की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को उठाना और खबरों को पूरी प्रामाणिकता के साथ पेश करना उनकी पत्रकारिता की पहचान है।
पत्रकारिता का लंबा अनुभव (Work Experience)
पूरण प्रकाश बंसल जी को मीडिया इंडस्ट्री में दो दशकों से भी अधिक (साल 2004 से) का एक व्यापक और समृद्ध अनुभव है। अपने इस लंबे सफर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े समाचार पत्रों के साथ काम किया है:
- दैनिक जागरण: पत्रकारिता क्षेत्र में लंबा और जमीनी अनुभव।
- राजदूत: वरिष्ठ स्तर पर समाचार कवरेज का अनुभव।
- प्रातः काल: साल 2022 से लगातार 'प्रातः काल' के साथ जुड़कर डीग जिले की कमान संभाल रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा (10वीं पास) पूरी की है। साल 2004 से लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण डीग जिले की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव किसी भी बड़ी डिग्री से कहीं अधिक मजबूत है।
