शहर के ऐतिहासिक लक्ष्मण मंदिर में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा एवं पार्थिव शिवलिंग पूजन महोत्सव के तीसरे दिन कथा प्रवक्ता लक्ष्मण मंदिर के महंत पंडित मुरारी लाल पाराशर ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि जहां सत्य है वहीं शिव हैं, जहां शिव हैं वहीं शिवम् है तथा जहां सुंदर है वहीं लाभ है।

शिव महापुराण कथा का वर्णन करते हुए पंडित मुरारी लाल पाराशर ने कहा कि इंसान को बनावटी नहीं होना चाहिए, क्योंकि बनावटी भाषा रिश्तों को तोड़ती है। उन्होंने कहा कि जीवन में दिखावा नहीं आना चाहिए और झूठ नहीं बोलना चाहिए। उनके अनुसार शिव महापुराण विश्व का कल्याण करने वाली है। उन्होंने कहा कि 84 लाख योनियों में अंतिम योनि मनुष्य योनि है और ईश्वर केवल मनुष्य को ही सोचने और समझने की क्षमता प्रदान करता है। मनुष्य का जन्म ईश्वर भक्ति के लिए हुआ है।

उन्होंने कहा कि भगवान शिव की प्राप्ति के लिए इंसान को गलत विचार, बुरी सोच, बुरी दृष्टि, खराब खान-पान तथा ऐसे पहनावे का त्याग करना चाहिए जो उचित नहीं हो। उन्होंने श्रद्धालुओं से सजावट, बनावट और दिखावट से दूर रहने का आह्वान करते हुए कहा कि बनावट की बात सनातन धर्म के लिए श्रेष्ठ नहीं है और श्रेष्ठ जीवन जीने के लिए दिखावे की जिंदगी आवश्यक नहीं होती।

पंडित पाराशर ने भगवान शिव के विवाह का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि शिव अपनी शादी में नंदी पर बैठकर ससुराल गए थे और उन्होंने अपने विवाह में किसी प्रकार का दिखावा नहीं किया। उन्होंने कहा कि यही सादगी जीवन का वास्तविक संदेश है।

कथावाचक पंडित मुरारी लाल पाराशर ने कहा कि शिव महापुराण कहीं भी यह नहीं कहती कि राम या कृष्ण को छोड़ दिया जाए। उन्होंने कहा कि दुनिया के लोगों ने अलग-अलग पंथ बनाकर भ्रम उत्पन्न कर दिया है और कुछ लोग कहते हैं कि शिव मंदिर नहीं जाना चाहिए क्योंकि शिव रौद्र रूप वाले हैं। उन्होंने कहा कि शिव पिता हैं और यदि शिव पूजन में कोई कमी रह जाए तो वह अपने पुत्रों को क्षमा कर देते हैं। शिव सबके हैं। शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव किसी को श्राप नहीं देते। माता पार्वती सदैव उनके साथ रहती हैं और यदि शिव पूजन के दौरान कोई कमी रह भी जाए तो पार्वती उस कमी को पूरा कर देती हैं।

उन्होंने कहा कि सजावट केवल चार दिन की होती है। आंखें बंद करके बैठने, चंदन का तिलक लगाने, अच्छे कपड़े पहनने, अच्छा गाने, मंदिर जाने और केवल कथा में बैठकर लौट आने जैसे दिखावे से भगवान की प्राप्ति नहीं होती। परमात्मा की प्राप्ति के लिए हृदय से ईश्वर की सच्ची भक्ति आवश्यक है।

कथा के समापन पर पंडित मुरारी लाल पाराशर ने कहा कि काल और महाकाल का कोई निश्चित समय नहीं होता, जिस प्रकार मृत्यु आने का भी कोई निश्चित समय नहीं होता। उन्होंने श्रद्धालुओं को जीवन में सत्य, सादगी और निष्कपट भक्ति अपनाने का संदेश दिया।

Pooran Prakash Bansal, Deeg

Pooran Prakash Bansal, Deeg

नाम: पूरण प्रकाश बंसल

पद: पत्रकार (प्रातः काल)

कार्यक्षेत्र: डीग जिला (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): जिला समाचार, क्राइम (अपराध), प्रशासन, और स्वास्थ्य

परिचय 

पूरण प्रकाश बंसल राजस्थान के डीग जिले के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में एक पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूरण जी डीग जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों से जिला स्तरीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, स्वास्थ्य व्यवस्था और आपराधिक मामलों (क्राइम) की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को उठाना और खबरों को पूरी प्रामाणिकता के साथ पेश करना उनकी पत्रकारिता की पहचान है।

पत्रकारिता का लंबा अनुभव (Work Experience)

पूरण प्रकाश बंसल जी को मीडिया इंडस्ट्री में दो दशकों से भी अधिक (साल 2004 से) का एक व्यापक और समृद्ध अनुभव है। अपने इस लंबे सफर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े समाचार पत्रों के साथ काम किया है:

  • दैनिक जागरण: पत्रकारिता क्षेत्र में लंबा और जमीनी अनुभव।

  • राजदूत: वरिष्ठ स्तर पर समाचार कवरेज का अनुभव।

  • प्रातः काल: साल 2022 से लगातार 'प्रातः काल' के साथ जुड़कर डीग जिले की कमान संभाल रहे हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा (10वीं पास) पूरी की है। साल 2004 से लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण डीग जिले की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव किसी भी बड़ी डिग्री से कहीं अधिक मजबूत है।

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