केरल के कासरगोड जिले में विद्यालय स्तरीय स्वतंत्रता प्रश्नोत्तरी में वीर विनायक दामोदर सावरकर से संबंधित प्रश्न पूछे जाने के बाद शिक्षक गुरु प्रसाद को निलंबित किए जाने के विरोध में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने सोमवार को डीग जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद जिला कलेक्टर, डीग के माध्यम से भारत के प्रधानमंत्री, केरल के मुख्यमंत्री एवं केरल के राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा गया। कार्यक्रम का नेतृत्व जिला अध्यक्ष अनिल सीही ने किया। जिले के समस्त 6 खंडों से सैकड़ों शिक्षक कार्यक्रम में पहुंचे।

जिला मंत्री देवेन्द्र यादव ने बताया कि 6 अगस्त को केरल के कासरगोड जिले में आयोजित सामाजिक विज्ञान क्लब की स्वतंत्रता प्रश्नोत्तरी में वीर सावरकर से संबंधित प्रश्न पूछा गया था। इसके बाद राजनीतिक विवाद के चलते एयूपीएस पल्लथडक्का के शिक्षक गुरु प्रसाद को 9 अगस्त को निलंबित कर दिया गया। शिक्षक ने निलंबन को केरल उच्च न्यायालय में चुनौती दी। इस पर 13 अगस्त को न्यायालय ने राज्य सरकार से निलंबन के विशिष्ट कारण बताने को कहा।

देवेन्द्र यादव ने कहा कि प्रश्न की भाषा अथवा उसकी तुलनात्मकता पर अकादमिक बहस हो सकती है, लेकिन इसके आधार पर शिक्षक को निलंबित करना उचित नहीं है। सावरकर को ब्रिटिश शासन द्वारा दो आजीवन कारावास की सजा दिए जाने तथा अंडमान की सेल्युलर जेल में कठोर कारावास भुगतने का ऐतिहासिक तथ्य प्रमाणित है। किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व पर प्रश्न पूछना अपने आप में राजनीतिक प्रचार नहीं माना जा सकता।

उन्होंने कहा कि प्रश्न में त्रुटि हो तो प्रश्न सुधारा जाए, शिक्षक को दंडित नहीं किया जाए। यदि प्रश्न तैयार करने वाली टीम में कई शिक्षक शामिल थे तो केवल एक शिक्षक को जिम्मेदार ठहराने से पहले पूरी प्रक्रिया और संबंधित शिक्षकों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

महासंघ ने मांग की कि शिक्षक गुरु प्रसाद का निलंबन तत्काल वापस लिया जाए तथा शिक्षकों की अकादमिक स्वतंत्रता, गरिमा एवं सम्मान की रक्षा सुनिश्चित की जाए। इतिहास को राजनीतिक विचारधाराओं का बंधक बनाने के बजाय तथ्य एवं प्रमाण के आधार पर विद्यार्थियों के सामने प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

ज्ञापन के माध्यम से यह भी मांग की गई कि शिक्षकों को ऐतिहासिक विषयों पर तथ्यपरक एवं अकादमिक दृष्टिकोण से कार्य करने के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाए तथा भविष्य में ऐसी कार्रवाई से बचा जाए, जिससे शिक्षकों में भय एवं आत्म-सेंसरशिप की स्थिति उत्पन्न हो।

इस अवसर पर जिले के सभी आठ खंडों से आए संगठन के पदाधिकारी एवं शिक्षक उपस्थित रहे और शिक्षक सम्मान, अकादमिक स्वतंत्रता एवं न्याय के पक्ष में एकजुटता का संदेश दिया।

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