आरटीई की 1000 करोड़ पुनर्भरण राशि बकाया, निजी स्कूलों की बढ़ी मुश्किलें
राजस्थान के निजी विद्यालयों का 1000 करोड़ रुपये का आरटीई पुनर्भरण भुगतान लंबित रहने से शिक्षकों के वेतन और दैनिक संचालन पर संकट गहरा गया है।

डीग, 30 अक्टूबर। राजस्थान में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी विद्यालयों को मिलने वाली पुनर्भरण राशि का भुगतान लंबे समय से लंबित रहने के कारण प्रदेश के निजी स्कूल संचालकों की आर्थिक चिंताएं बढ़ गई हैं। स्कूल संचालकों के अनुसार, सरकार पर करीब 1000 करोड़ रुपये की राशि बकाया है। भुगतान में लगातार देरी से विशेष रूप से छोटे एवं मध्यम निजी विद्यालयों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।
आरटीई के तहत निजी विद्यालय आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इसके बावजूद सरकार की ओर से निर्धारित पुनर्भरण राशि का समय पर भुगतान नहीं होने से विद्यालयों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। स्कूल संचालकों को शिक्षकों एवं कर्मचारियों के वेतन, भवन किराये और अन्य आवश्यक खर्चों का प्रबंधन करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
स्कूल शिक्षा परिवार के जिला डीग प्रभारी इंजीनियर शिवम उपाध्याय ने कहा कि निजी विद्यालय आरटीई के माध्यम से हजारों बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्रदान कर रहे हैं। इसके बावजूद सरकार की ओर से समय पर भुगतान नहीं किया जाना विद्यालय संचालकों के लिए गंभीर समस्या बनता जा रहा है। उन्होंने राज्य सरकार से सभी लंबित भुगतानों को शीघ्र जारी करने और वर्तमान महंगाई को देखते हुए पुनर्भरण राशि में उचित बढ़ोतरी करने की मांग की।
वहीं, स्कूल शिक्षा परिवार के अध्यक्ष अनिल शर्मा ने कहा कि आरटीई के तहत बच्चों को प्रवेश देने की जिम्मेदारी निजी विद्यालय पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं। ऐसे में सरकार की भी जिम्मेदारी है कि विद्यालयों को निर्धारित पुनर्भरण राशि का भुगतान समय पर किया जाए। भुगतान में देरी से विद्यालयों का संचालन प्रभावित होता है और इसका असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
दोनों पदाधिकारियों ने राज्य सरकार से मांग की कि आरटीई के तहत समस्त लंबित भुगतानों को तत्काल जारी किया जाए। साथ ही भविष्य में पुनर्भरण राशि के भुगतान के लिए निश्चित समयसीमा निर्धारित की जाए, ताकि निजी विद्यालयों को आर्थिक परेशानियों से राहत मिल सके और विद्यार्थियों की शिक्षा निर्बाध रूप से जारी रह सके। करीब 1000 करोड़ रुपये के लंबित भुगतान का मुद्दा अब निजी विद्यालयों के संचालन और आरटीई के तहत निःशुल्क शिक्षा व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बन गया है।

Pooran Prakash Bansal, Deeg
नाम: पूरण प्रकाश बंसल
पद: पत्रकार (प्रातः काल)
कार्यक्षेत्र: डीग जिला (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): जिला समाचार, क्राइम (अपराध), प्रशासन, और स्वास्थ्य
परिचय
पूरण प्रकाश बंसल राजस्थान के डीग जिले के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में एक पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूरण जी डीग जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों से जिला स्तरीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, स्वास्थ्य व्यवस्था और आपराधिक मामलों (क्राइम) की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को उठाना और खबरों को पूरी प्रामाणिकता के साथ पेश करना उनकी पत्रकारिता की पहचान है।
पत्रकारिता का लंबा अनुभव (Work Experience)
पूरण प्रकाश बंसल जी को मीडिया इंडस्ट्री में दो दशकों से भी अधिक (साल 2004 से) का एक व्यापक और समृद्ध अनुभव है। अपने इस लंबे सफर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े समाचार पत्रों के साथ काम किया है:
- दैनिक जागरण: पत्रकारिता क्षेत्र में लंबा और जमीनी अनुभव।
- राजदूत: वरिष्ठ स्तर पर समाचार कवरेज का अनुभव।
- प्रातः काल: साल 2022 से लगातार 'प्रातः काल' के साथ जुड़कर डीग जिले की कमान संभाल रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा (10वीं पास) पूरी की है। साल 2004 से लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण डीग जिले की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव किसी भी बड़ी डिग्री से कहीं अधिक मजबूत है।
