ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग में कार्यरत मंत्रालयिक कर्मचारियों द्वारा चलाया जा रहा स्वाभिमान बचाओ आंदोलन अब निर्णायक चरण की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अपनी लंबित मांगों को लेकर कर्मचारियों ने आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत 23 जून से जयपुर कूच का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।

संगठन के जिला अध्यक्ष हरिओम शर्मा ने बताया कि आंदोलन के अगले चरण में 23 जून को सभी जिला अध्यक्ष एवं महामंत्री अपनी-अपनी टीमों के साथ जयपुर पहुंचेंगे। इसके बाद 24 जून की शाम को सभी ब्लॉक अध्यक्ष और महामंत्री अपनी कार्यकारिणियों के साथ जयपुर के लिए रवाना होंगे।

उन्होंने बताया कि 24 जून को जिला अध्यक्ष, महामंत्री तथा प्रदेश कमेटी के सदस्य जयपुर में सरकार के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे। वहीं 25 जून को ब्लॉक अध्यक्ष, महामंत्री और ब्लॉक कार्यकारिणी के पदाधिकारी विभिन्न स्तरों पर सरकार के समक्ष अपने मांग-पत्र प्रस्तुत करेंगे। इस दौरान कर्मचारियों की लंबित मांगों और विभागीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।

आंदोलन के तहत आगामी कार्यक्रमों की तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं। संगठन के अनुसार, 6 जुलाई को प्रस्तावित मुख्यमंत्री घेराव तथा 7 जुलाई को जयपुर के जल महल पर प्रस्तावित महाजल समाधि कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा। साथ ही ब्लॉक एवं जिला मुख्यालयों पर निर्धारित आंदोलनात्मक गतिविधियां लगातार जारी रहेंगी। ग्रामीण सेवा शिविरों तथा वीबीजी रामजी योजना के बहिष्कार का निर्णय भी यथावत रहेगा।

पंचायती राज विभाग से संबंधित मांगों में कैडर रिव्यू, स्वतंत्र कार्य विभाजन एवं जॉब चार्ट लागू करने, उत्तराखंड पैटर्न को पूर्ण रूप से लागू करने, नोशनल बेनिफिट्स प्रदान करने, अंतरजिला स्थानांतरण की सुविधा देने, हार्ड ड्यूटी एवं अतिरिक्त पंचायत भत्ता लागू करने, अनुकम्पा नियुक्ति में टंकण परीक्षा से छूट देने तथा आरआरडीएस के पदों में 50 प्रतिशत कोटा निर्धारित करने की मांग शामिल है।

वहीं ग्रामीण विकास विभाग से संबंधित मांगों में वीबीजी रामजी में प्रशासनिक मद से प्रतिनियुक्ति भत्ता दिए जाने, कनिष्ठ लिपिक को वीबीजी रामजी में पदेन सचिव अथवा पदेन कार्यक्रम अधिकारी (ग्राम पंचायत स्तर) घोषित करने तथा वीबीजी रामजी में प्रतिनियुक्त मंत्रालयिक कर्मचारियों का प्रशासनिक विभाग ग्रामीण विकास विभाग को बनाए जाने की मांग प्रमुख रूप से शामिल है।

लगातार तेज होते इस आंदोलन ने अब राज्य स्तर पर व्यापक ध्यान आकर्षित करना शुरू कर दिया है। आगामी दिनों में जयपुर में होने वाले कार्यक्रमों और सरकार के साथ संभावित वार्ताओं पर कर्मचारियों की नजरें टिकी हुई हैं, जिससे आंदोलन की दिशा और भविष्य की रणनीति तय होगी।

Pratahkal Bureau

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