डीग के सिनसिनी में इफको किसान सभा, नैनो उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग से बढ़ी उत्पादन की उम्मीद
डीग के सिनसिनी में इफको किसान सभा में किसानों को नैनो उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग, लागत में कमी और उत्पादन बढ़ाने के तरीकों की विस्तृत जानकारी दी गई।

तस्वीर में बाईं ओर खड़े इफको प्रतिनिधि सिनसिनी गांव में आयोजित किसान सभा के दौरान बैठे हुए किसानों को नैनो उर्वरक की बोतलें दिखाकर उसके उपयोग के बारे में समझा रहे हैं।
डीग जिले के गांव सिनसिनी में शुक्रवार को इफको द्वारा किसान सभा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर आधुनिक कृषि तकनीकों और नैनो उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग की जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम के दौरान किसानों को खेती की लागत कम करने, पोषण दक्षता बढ़ाने और उत्पादन में सुधार से जुड़े विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया गया।
कार्यक्रम में इफको भरतपुर के क्षेत्र प्रबंधक श्याम सुंदर ने किसानों को नैनो डीएपी, नैनो यूरिया एनपी, एनपी कंसोर्टिया तथा जल-घुलनशील उर्वरकों के वैज्ञानिक एवं संतुलित उपयोग की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नैनो उर्वरकों के प्रयोग से फसल की पोषण दक्षता बढ़ती है, खेती की लागत में कमी आती है और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलता है।
इफको डीग के एसएफए राम किशोर गोस्वामी ने किसानों को बताया कि बुवाई के समय दानेदार डीएपी की मात्रा आधी करके बीज उपचार के लिए नैनो डीएपी 5 मि.ली. एवं एनपी कंसोर्टिया 10 मि.ली. प्रति किलोग्राम बीज का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे लगभग 50 प्रतिशत दानेदार डीएपी की बचत होती है, पौधों की जड़ें अधिक मजबूत बनती हैं, प्रारंभिक वृद्धि बेहतर होती है तथा फसल उत्पादन में लगभग 10 से 15 प्रतिशत तक वृद्धि होने की संभावना रहती है। इसके साथ ही खेती की लागत में भी कमी आती है।
उन्होंने आगे बताया कि फसल की आयु 30 से 35 दिन होने पर दानेदार यूरिया की मात्रा आधी कर नैनो डीएपी 4 मि.ली. एवं नैनो यूरिया 5 मि.ली. प्रति लीटर पानी में घोलकर पत्तियों पर छिड़काव करना चाहिए। इससे पौधों को आवश्यक नाइट्रोजन की प्रभावी पूर्ति होती है, फसल में हरापन बना रहता है तथा पौधों की वृद्धि एवं विकास बेहतर होता है।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को यह भी बताया गया कि इफको के नैनो उर्वरक आसानी से उपलब्ध हैं तथा इनके वैज्ञानिक उपयोग से अधिक उत्पादन के साथ-साथ खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। किसान सभा के अंत में किसानों ने नैनो उर्वरकों के उपयोग से जुड़े अपने प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा विस्तार से समाधान किया गया।

Pooran Prakash Bansal, Deeg
नाम: पूरण प्रकाश बंसल
पद: पत्रकार (प्रातः काल)
कार्यक्षेत्र: डीग जिला (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): जिला समाचार, क्राइम (अपराध), प्रशासन, और स्वास्थ्य
परिचय
पूरण प्रकाश बंसल राजस्थान के डीग जिले के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में एक पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूरण जी डीग जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों से जिला स्तरीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, स्वास्थ्य व्यवस्था और आपराधिक मामलों (क्राइम) की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को उठाना और खबरों को पूरी प्रामाणिकता के साथ पेश करना उनकी पत्रकारिता की पहचान है।
पत्रकारिता का लंबा अनुभव (Work Experience)
पूरण प्रकाश बंसल जी को मीडिया इंडस्ट्री में दो दशकों से भी अधिक (साल 2004 से) का एक व्यापक और समृद्ध अनुभव है। अपने इस लंबे सफर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े समाचार पत्रों के साथ काम किया है:
- दैनिक जागरण: पत्रकारिता क्षेत्र में लंबा और जमीनी अनुभव।
- राजदूत: वरिष्ठ स्तर पर समाचार कवरेज का अनुभव।
- प्रातः काल: साल 2022 से लगातार 'प्रातः काल' के साथ जुड़कर डीग जिले की कमान संभाल रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा (10वीं पास) पूरी की है। साल 2004 से लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण डीग जिले की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव किसी भी बड़ी डिग्री से कहीं अधिक मजबूत है।
