शहर में इन दिनों एक बार फिर गंभीर जल संकट उत्पन्न हो गया है। तेली पाड़ा मौहल्ला, सेऊ वाली गली, खादी भण्डार गली, किशनपुर मौहल्ला, ठाकुर मौहल्ला और बेताल मौहल्ला सहित कई क्षेत्रों में कई दिनों से नलों में पानी नहीं आने से पेयजल किल्लत बनी हुई है। चंबल के मीठे पानी की जलापूर्ति लगातार बाधित रहने से शहर के कई वार्डों और मोहल्लों में हालात चिंताजनक हो गए हैं।

शहर के अधिकतर इलाकों में लोग पानी की समस्या से जूझ रहे हैं, जबकि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर स्थिति पर आंखें बंद किए बैठे हैं। कांग्रेस सेवादल के जिलाध्यक्ष भगवान सिंह कोली ने बताया कि शहर में लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए भटक रहे हैं। वार्ड की महिलाओं ने भी बताया कि कई दिनों से पेयजल संकट गहराया हुआ है, लेकिन लगातार शिकायतों के बावजूद जलदाय विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।

स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि लोग निजी टैंकरों से पानी खरीदने को मजबूर हैं। एक ड्रम पानी 60 रुपए और एक मटका 15 रुपए में भरा जा रहा है। गर्मी के मौसम में सर्दी के मुकाबले पानी की खपत दोगुनी हो जाने से संकट और गहरा गया है। शहर की लगभग 60 हजार आबादी के लिए प्रति व्यक्ति 100 लीटर की खपत के हिसाब से प्रतिदिन 60 लाख लीटर पानी की आवश्यकता है, जो वर्तमान में पूरी नहीं हो पा रही है।

डीग शहर के चौधरी का कटरा, हकीमजी का कटरा, वार्ड नंबर 29 की बस्ती, नाटानी मोहल्ला, सराय मोहल्ला, ठाकुर मोहल्ला, सेठी मोहल्ला, घंटाघर वाली गली, तेली पाड़ा, टकसालिया मोहल्ला, बंधा रोड, मसानी मोहल्ला, खादी भंडार वाली गली और साद मोहल्ला जैसे क्षेत्रों में नलों में पानी नहीं आने से लोगों को पीने के पानी के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि रोजाना 7 रुपए में एक मटका और 60 रुपए में एक ड्रम पानी खरीदकर घर का काम चलाना पड़ रहा है।

लगातार बढ़ता जल संकट न केवल आमजन के दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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Pratahkal Bureau

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