नगर पालिका बृजनगर, जिला डीग में आयोजित शहरी सेवा शिविर सोमवार को जनसेवा और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का महत्वपूर्ण केंद्र बना, जहां जल संसाधन मंत्री एवं भरतपुर-डीग जिले के प्रभारी मंत्री सुरेश सिंह रावत ने शिविर का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया और अधिकारियों से प्राप्त परिवादों तथा उनके निस्तारण की प्रगति की विस्तृत जानकारी ली।

शिविर में मौजूद अधिकारियों को संबोधित करते हुए प्रभारी मंत्री ने कहा कि इन सेवा शिविरों का मूल उद्देश्य आमजन को एक ही स्थान पर विभिन्न सरकारी सेवाएं और योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराना है, ताकि लोगों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और उनके समय की बचत हो। निरीक्षण के दौरान जिला कलेक्टर डीग मयंक मनीष भी उपस्थित रहे।

समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर विभिन्न जनकल्याणकारी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि पारदर्शी शासन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अधिकांश सेवाओं को ऑनलाइन किया जा चुका है। साथ ही उन्होंने बताया कि तकनीकी कारणों से ऑफलाइन आवेदन लेकर आने वाले नागरिकों की सहायता के लिए शिविरों में ई-मित्र सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

प्रभारी मंत्री ने आमजन से सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने और पात्र व्यक्तियों तक इन योजनाओं की जानकारी पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लाभार्थियों की सफलता की कहानियां समाज में जागरूकता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकती हैं।

शिविर के दौरान स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश देते हुए मंत्री रावत ने स्वयं अपनी शुगर की जांच कराई और उपस्थित नागरिकों को भी नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिविरों में उपलब्ध एलोपैथिक और आयुर्वेदिक चिकित्सकों की सेवाओं का लाभ उठाकर लोग बीपी, शुगर सहित अन्य स्वास्थ्य जांच समय-समय पर कराएं।

मीडिया से बातचीत में प्रभारी मंत्री ने कहा कि गौमाता एवं अन्य पशुओं की सुरक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी बताया कि शहरी और ग्रामीण सेवा शिविरों के अभियान के पूर्ण होने के बाद प्राप्त परिवादों और उनके समाधान की उच्च स्तरीय समीक्षा की जाएगी, ताकि योजनाओं और सेवाओं का वास्तविक प्रभाव धरातल पर सुनिश्चित किया जा सके।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को लाभ प्रदान किया गया। कृषि भूमि पट्टा योजना के तहत कृष्णा कपूर, परवीन खान, मुकेश कुमार शर्मा तथा कृष्णा कुमार शर्मा को पट्टे वितरित किए गए, जबकि नरेश पुत्र शोभाराम को नामांतरण संबंधी दस्तावेज सौंपे गए। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत प्रेमलता, हुकम देवी और बबीता को लाभान्वित किया गया। वहीं प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत लाभार्थी विष्णु सैनी को सहायता राशि का चेक प्रदान किया गया।

शहरी सेवा शिविर में लाभार्थियों को योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ वितरण और व्यवस्थाओं की समीक्षा ने यह संदेश दिया कि सरकारी सेवाओं को आमजन तक सरल, पारदर्शी और प्रभावी ढंग से पहुंचाने के प्रयासों को निरंतर गति दी जा रही है।

Pooran Prakash Bansal, Deeg

Pooran Prakash Bansal, Deeg

नाम: पूरण प्रकाश बंसल

पद: पत्रकार (प्रातः काल)

कार्यक्षेत्र: डीग जिला (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): जिला समाचार, क्राइम (अपराध), प्रशासन, और स्वास्थ्य

परिचय 

पूरण प्रकाश बंसल राजस्थान के डीग जिले के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में एक पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूरण जी डीग जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों से जिला स्तरीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, स्वास्थ्य व्यवस्था और आपराधिक मामलों (क्राइम) की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को उठाना और खबरों को पूरी प्रामाणिकता के साथ पेश करना उनकी पत्रकारिता की पहचान है।

पत्रकारिता का लंबा अनुभव (Work Experience)

पूरण प्रकाश बंसल जी को मीडिया इंडस्ट्री में दो दशकों से भी अधिक (साल 2004 से) का एक व्यापक और समृद्ध अनुभव है। अपने इस लंबे सफर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े समाचार पत्रों के साथ काम किया है:

  • दैनिक जागरण: पत्रकारिता क्षेत्र में लंबा और जमीनी अनुभव।

  • राजदूत: वरिष्ठ स्तर पर समाचार कवरेज का अनुभव।

  • प्रातः काल: साल 2022 से लगातार 'प्रातः काल' के साथ जुड़कर डीग जिले की कमान संभाल रहे हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा (10वीं पास) पूरी की है। साल 2004 से लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण डीग जिले की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव किसी भी बड़ी डिग्री से कहीं अधिक मजबूत है।

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