डीग में मां सरस्वती का भव्य मंदिर बनवाया, 550 विशिष्टजनों का सम्मान कर पेश की मिसाल
डीग के राजकीय बालिका स्कूल में स्व. रमेश चंद गुप्ता की स्मृति में सरस्वती मंदिर निर्माण के उपलक्ष्य में सम्मान समारोह आयोजित कर 550 विशिष्टजनों को सम्मानित किया गया।

डीग के राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय घंटाघर में स्व. रमेश चंद गुप्ता और उनके माता-पिता की स्मृति में निर्मित मां सरस्वती का भव्य मंदिर, जहां प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व विशेष पूजा-अर्चना की गई।
डीग में स्व. रमेश चंद गुप्ता अध्यापक और उनके माता-पिता की पुण्य स्मृति में राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय घंटाघर में मां सरस्वती का भव्य मंदिर बनवाया गया। मंदिर निर्माण के उपलक्ष्य में प्राण प्रतिष्ठा से पहले 19 अक्टूबर को विमल वाटिका मैरिज होम में 550 विशिष्टजनों का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। समारोह में शिक्षा, चिकित्सा, प्रशासन, समाज सेवा, साहित्य और पत्रकारिता सहित विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया।
डीग निवासी स्व. श्री रमेश चंद गुप्ता अध्यापक, चौधरी का कटरा, पुरानी डीग तथा उनके पिता स्व. श्री चरनलाल (आलू वाले) और मां स्व. श्रीमती अशर्फी देवी की पुण्य स्मृति में उनके परिजनों ने इस मंदिर का निर्माण करवाया। इस पुनीत कार्य में श्री अशोक कुमार गुप्ता, वर्तमान निवासी अलवर, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला उपाध्यक्ष (मा.शि.) सुनील गुप्ता, बृजकिशोर गुप्ता अध्यापक, फार्मासिस्ट रत्नेश बंसल, नीरज बंसल, मयंक बंसल, मोक्ष एवं मोहित और आयुष गुप्ता की भूमिका रही।
मंदिर निर्माण के उपलक्ष्य में आयोजित सम्मान समारोह की अध्यक्षता पान्हौरी के महंत श्री शिवरामदास जी महाराज ने की। विधायक श्री शैलेश दिगम्बर सिंह मुख्य अतिथि तथा भारतीय जनता पार्टी डीग के जिलाध्यक्ष श्री सतीश बंसल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला उपाध्यक्ष सुनील गुप्ता ने अपने शैक्षिक और सामाजिक कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि इससे पहले वह राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय शीशवाड़ा में वरिष्ठ अध्यापक गणित के पद पर कार्यरत थे। वहां भी उन्होंने अपने वेतन से लगभग 1 लाख रुपये के विकास कार्य करवाए थे। वर्तमान में उन्होंने 4 माह पूर्व 8 जुलाई को किशनलाल जोशी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय डीग में कार्यग्रहण किया। इसी विद्यालय से उन्होंने 35 वर्ष पहले 12वीं बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण की थी।
विद्यालय में कार्यग्रहण करने के बाद उन्होंने मां सरस्वती के मंदिर का 21000 रुपये की लागत से जीर्णोद्धार करवाया। इसके बाद 13 अगस्त को मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय डीग में अपने स्व. पिताजी की स्मृति में 28000 रुपये का इन्वर्टर मय बैटरी भेंट किया।
सुनील गुप्ता ने कहा कि वह विद्यालय के विद्यार्थियों को अपने बेटा-बेटी मानकर पढ़ाते हैं और उनके मन में किसी प्रकार का जातिगत भेदभाव नहीं है। उन्होंने कहा, “मैं केवल एक ही जाति को जानता हूं, वो है 'इंसान'।” उन्होंने संकल्प लिया कि कोई भी विद्यार्थी वास्तव में पढ़कर आगे बढ़ना चाहता है और जीवन में अनुशासित है, तो वह उनके यहां निःशुल्क शिक्षा प्राप्त कर सकता है।
सम्मान समारोह में प्रशासनिक अधिकारियों, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्षों, समस्त नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों, समाज में विशेष योगदान देने वाले समाजसेवकों और सेविकाओं, चिकित्सा विभाग के उच्च अधिकारियों, समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों तथा शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही विद्यालयों में श्रेष्ठ कार्य करने वाले प्रधानाचार्यों, भामाशाहों, साहित्य प्रेमियों, कवियों, पत्रकारों, प्रतिभाशाली विद्यार्थियों और उन पूर्व छात्रों का भी सम्मान हुआ, जो विभिन्न राजकीय या गैर राजकीय सेवाओं में कार्य करते हुए समाज और देश की सेवा कर रहे हैं। समारोह में लगभग 550 योग्यजनों को सम्मानित किया गया।
इस आयोजन को लेकर डीग में चर्चा रही। कार्यक्रम के माध्यम से पूर्वजों की स्मृति को समाजोपयोगी कार्यों से जीवित रखने का संदेश दिया गया। आयोजक परिवार की ओर से वर्षों से विद्यालय में ऐसे कार्य किए जा रहे हैं। इस अवसर पर यह विचार भी सामने आया कि माता-पिता और गुरु ही वास्तव में ईश्वर के समान हैं और उनके प्रति प्रेम तथा स्नेह बनाए रखना चाहिए। किसी व्यक्ति के दुनिया से चले जाने के बाद दिखावे के लिए अनेक आयोजन किए जाते हैं, लेकिन उसके जीवित रहते उसे दो समय का भोजन और प्यार भरे शब्द देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। जिन्होंने बच्चों के पालन-पोषण के लिए अपने तन और मन की इच्छाओं का दमन किया, उनके प्रति सम्मान और स्नेह जीवित रहते व्यक्त किया जाना चाहिए। पूर्वजों की स्मृति में मंदिर या धर्मशाला बनवाने, विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करने अथवा वृक्षारोपण जैसे कार्यों से भी सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है।
समारोह में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए और कवियों ने काव्य पाठ किया। आयोजक सुनील गुप्ता ने दहेज प्रथा पर आधारित अपनी कविता 'शादी बन बैठी बर्बादी' सुनाई। कविता ने श्रोताओं को भावुक कर दिया और कई लोगों की आंखों में आंसू आ गए।
मां सरस्वती की प्राण प्रतिष्ठा से पहले भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा का विभिन्न स्थानों पर पुष्प वर्षा और आरती के माध्यम से स्वागत किया गया। प्राण प्रतिष्ठा के दौरान सुनील गुप्ता और उनके परिजनों ने 10 प्रमुख संतों का सम्मान भी किया। कार्यक्रम में उनके चाचाजी अशोक कुमार गुप्ता, जीजाजी मुकेश-विजय, रूपवती-फूलचन्द, बृजकिशोर जी, रेखा-अनिल सहित समाज के विभिन्न योग्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन कवि जगत पाराशर ने किया, जबकि प्राण प्रतिष्ठा के मुख्य भट्ट पंडित पवन शर्मा ग्रामोष्टि रहे।
कार्यक्रम के अंत में आयोजक सुनील गुप्ता ने सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया। मां सरस्वती के मंदिर निर्माण, शिक्षा के क्षेत्र में व्यक्तिगत योगदान और 550 विशिष्टजनों के सम्मान के माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम ने डीग में पूर्वजों की स्मृति को सामाजिक सेवा और शिक्षा से जोड़ने का संदेश दिया।

Pooran Prakash Bansal, Deeg
नाम: पूरण प्रकाश बंसल
पद: पत्रकार (प्रातः काल)
कार्यक्षेत्र: डीग जिला (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): जिला समाचार, क्राइम (अपराध), प्रशासन, और स्वास्थ्य
परिचय
पूरण प्रकाश बंसल राजस्थान के डीग जिले के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में एक पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूरण जी डीग जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों से जिला स्तरीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, स्वास्थ्य व्यवस्था और आपराधिक मामलों (क्राइम) की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को उठाना और खबरों को पूरी प्रामाणिकता के साथ पेश करना उनकी पत्रकारिता की पहचान है।
पत्रकारिता का लंबा अनुभव (Work Experience)
पूरण प्रकाश बंसल जी को मीडिया इंडस्ट्री में दो दशकों से भी अधिक (साल 2004 से) का एक व्यापक और समृद्ध अनुभव है। अपने इस लंबे सफर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े समाचार पत्रों के साथ काम किया है:
- दैनिक जागरण: पत्रकारिता क्षेत्र में लंबा और जमीनी अनुभव।
- राजदूत: वरिष्ठ स्तर पर समाचार कवरेज का अनुभव।
- प्रातः काल: साल 2022 से लगातार 'प्रातः काल' के साथ जुड़कर डीग जिले की कमान संभाल रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा (10वीं पास) पूरी की है। साल 2004 से लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण डीग जिले की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव किसी भी बड़ी डिग्री से कहीं अधिक मजबूत है।
