डीग में साहित्यिक संवाद 2026 आयोजित, पठन संस्कृति पर चर्चा
21वीं सदी के राजस्थान साहित्यिक आंदोलन के तहत युवाओं को किताबों और भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने के लिए कामां गेट पर हुआ संवाद।

डीग में आयोजित कार्यक्रम के मंच पर पुस्तक का विमोचन करते अतिथि।
डीग, 13 सितंबर। साहित्य को किताबों और सभागारों की सीमाओं से बाहर निकालकर गांवों, कस्बों और युवाओं तक पहुंचाने की जरूरत पर डीग साहित्यिक संवाद-2026 में जोर दिया गया। ‘21वीं सदी का राजस्थान साहित्यिक आंदोलन’ की श्रृंखला के तहत रविवार को विमल वाटिका मैरिज गार्डन, कामां गेट, डीग में ‘पढ़ता युवा, सशक्त भारत : साहित्य, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परम्परा का नवजागरण’ विषय पर साहित्यकारों, युवाओं और रचनाकारों ने संवाद किया। कार्यक्रम में युवाओं में पठन संस्कृति विकसित करने, साहित्य को समाज से जोड़ने तथा भारतीय ज्ञान परम्परा और स्थानीय सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता 21वीं सदी के राजस्थान साहित्यिक आंदोलन के संस्थापक-प्रवर्तक, वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार एवं लेखक अनिल सक्सेना ‘ललकार’ ने की। मुख्य अतिथि हनुमानगढ़ के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश श्री गजेंद्र सिंह तेनगुरिया रहे। विशिष्ट अतिथियों में वरिष्ठ साहित्यकार प्रकाश चंद पाराशर, भरतपुर नगर निगम की पूर्व प्रथम महापौर सुमन कोली, साहित्यकार सोहन लाल शर्मा ‘प्रेम’, सेवानिवृत्त आरपीएस नत्थी सिंह, वरिष्ठ साहित्यकार श्याम सिंह जघीना, चंद्रपाल सिंह वहज एवं गिरिजाशंकर शर्मा शामिल रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसमें साहित्यकारों, रचनाकारों, पत्रकारों, शिक्षाविदों और युवाओं ने सहभागिता की।
अध्यक्ष अनिल सक्सेना ‘ललकार’ ने कहा कि साहित्य को केवल पुस्तकों और सभागारों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसे गांवों, कस्बों और युवाओं के बीच ले जाना होगा। सूचना और तकनीक के दौर में युवाओं के पास जानकारी की कमी नहीं है, लेकिन जरूरत उस जानकारी को ज्ञान, विवेक और संवेदना में बदलने की है।
उन्होंने कहा, “सूचना व्यक्ति को जानकार बनाती है, जबकि साहित्य उसे विचारवान और संवेदनशील बनाता है।” पढ़ने वाला युवा केवल परीक्षा की तैयारी नहीं करता, बल्कि समाज को समझने और देश के भविष्य को दिशा देने की तैयारी करता है।
सक्सेना ने कहा कि राजस्थान के गांवों और कस्बों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। जरूरत उन्हें पहचानने और अवसर देने की है। साहित्यिक आंदोलन का उद्देश्य केवल कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि समाज को सुनना, स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देना और साहित्य को जनचेतना से जोड़ना है।
डीग की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि स्थानीय इतिहास, लोकभाषा, लोक साहित्य, लोककथाओं और सांस्कृतिक परम्पराओं को नई पीढ़ी से जोड़ना जरूरी है। भारतीय ज्ञान परम्परा के श्रेष्ठ मूल्यों को आधुनिक शिक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
उन्होंने युवाओं से मोबाइल और सोशल मीडिया के साथ पुस्तकों को भी जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “शब्द समाज से जुड़ें, युवा संस्कृति से जुड़ें, तभी साहित्य आंदोलन बनेगा।”
मुख्य अतिथि हनुमानगढ़ के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश श्री गजेंद्र सिंह तेनगुरिया ने कहा कि पुस्तकों का अध्ययन व्यक्ति के व्यक्तित्व और विचारों को समृद्ध करता है। पढ़ने की आदत से विचार करने, सही-गलत में अंतर समझने और निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है।
उन्होंने कहा कि तकनीक के दौर में युवाओं के सामने सूचनाओं की भरमार है। ऐसे में अच्छी पुस्तकों और साहित्य का अध्ययन उन्हें सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। साहित्य समाज का दर्पण होने के साथ समाज को दिशा देने का माध्यम भी है। उन्होंने डीग जैसे ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में साहित्यिक संवाद को महत्वपूर्ण पहल बताया।
वरिष्ठ साहित्यकार प्रकाश चंद पाराशर ने कहा कि साहित्य समाज को जोड़ने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से परिचित कराने का सशक्त माध्यम है।
भरतपुर नगर निगम की पूर्व प्रथम महापौर सुमन कोली ने कहा कि युवाओं को साहित्य और संस्कृति से जोड़ने के लिए ऐसे संवाद निरंतर आयोजित होने चाहिए।
साहित्यकार सोहन लाल शर्मा ‘प्रेम’ ने कहा कि कविता समाज की संवेदनाओं को आवाज देने के साथ युवाओं में रचनात्मक सोच विकसित करती है।
सेवानिवृत्त आरपीएस नत्थी सिंह ने कहा कि साहित्य और संस्कृति से जुड़ाव युवाओं में संस्कार, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना मजबूत करता है।
वरिष्ठ साहित्यकार श्याम सिंह जघीना ने कहा कि साहित्य नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परम्पराओं से जोड़ने का प्रभावी माध्यम है।
साहित्यकार चंद्रपाल सिंह वहज ने कहा कि युवाओं में पढ़ने की रुचि बढ़ाकर ही ज्ञान, विचार और संस्कार की मजबूत नींव तैयार की जा सकती है।
साहित्यकार गिरिजाशंकर शर्मा ने कहा कि साहित्यिक संवाद स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने और युवाओं को रचनात्मक दिशा देने का माध्यम बन सकते हैं।
कार्यक्रम के समन्वयक एवं भरतपुर संभाग प्रभारी मोरध्वज सिंह ने बताया कि वर्ष 2010 से जारी इस साहित्यिक-सांस्कृतिक अभियान के तहत प्रदेश के प्रत्येक जिले में 1000 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। अभियान का उद्देश्य साहित्य को आमजन तक पहुंचाने के साथ युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों को साहित्य एवं संस्कृति से जोड़ना है।
उन्होंने बताया कि अब अभियान को प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र और पंचायत स्तर तक पहुंचाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। स्थानीय साहित्यकारों, रचनाकारों और युवा प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराने के साथ उन्हें प्रदेश की साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
कार्यक्रम में कवि मनोज मनु पाराशर, हरिश्चंद्र ‘हरि’, अभिषेक ‘अमर’, जगत पाराशर, पंकज ‘प्रखर’, गोविंद ‘ब्रजवासी’, चंद्रभान ‘चंचल’, सुनील ‘सरल’, जितेंद्र पाराशर, चंद्रभान ‘चंद्र’, प्रकाश चंद पाराशर और सोहन लाल शर्मा ‘प्रेम’ सहित अन्य कवियों ने काव्यपाठ किया। कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से साहित्य, समाज, संस्कृति और समसामयिक विषयों को अभिव्यक्ति दी।
कार्यक्रम के दौरान 18 साल के युवा अंकित मीणा की पुस्तक ‘अल्फाज ए रंगरेज’ का अतिथियों ने लोकार्पण किया। कार्यक्रम के आयोजन में राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम एवं यूथ मूवमेंट, राजस्थान का सहयोग रहा। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। डीग साहित्यिक संवाद-2026 में पठन संस्कृति, स्थानीय साहित्यिक प्रतिभाओं और भारतीय ज्ञान परम्परा को नई पीढ़ी से जोड़ने के मुद्दे केंद्र में रहे।

Pooran Prakash Bansal, Deeg
नाम: पूरण प्रकाश बंसल
पद: पत्रकार (प्रातः काल)
कार्यक्षेत्र: डीग जिला (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): जिला समाचार, क्राइम (अपराध), प्रशासन, और स्वास्थ्य
परिचय
पूरण प्रकाश बंसल राजस्थान के डीग जिले के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में एक पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूरण जी डीग जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों से जिला स्तरीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, स्वास्थ्य व्यवस्था और आपराधिक मामलों (क्राइम) की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को उठाना और खबरों को पूरी प्रामाणिकता के साथ पेश करना उनकी पत्रकारिता की पहचान है।
पत्रकारिता का लंबा अनुभव (Work Experience)
पूरण प्रकाश बंसल जी को मीडिया इंडस्ट्री में दो दशकों से भी अधिक (साल 2004 से) का एक व्यापक और समृद्ध अनुभव है। अपने इस लंबे सफर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े समाचार पत्रों के साथ काम किया है:
- दैनिक जागरण: पत्रकारिता क्षेत्र में लंबा और जमीनी अनुभव।
- राजदूत: वरिष्ठ स्तर पर समाचार कवरेज का अनुभव।
- प्रातः काल: साल 2022 से लगातार 'प्रातः काल' के साथ जुड़कर डीग जिले की कमान संभाल रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा (10वीं पास) पूरी की है। साल 2004 से लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण डीग जिले की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव किसी भी बड़ी डिग्री से कहीं अधिक मजबूत है।
