डीग में ग्रामीण सेवा शिविर का कमाल: वर्षों से मालिकाना हक के लिए भटक रहे परिवारों को मिला पट्टा
डीग के कामां क्षेत्र में प्रशासन द्वारा आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर में दो परिवारों को उनके मकानों का मालिकाना हक मिला। वर्षों से पट्टे के लिए भटक रहे ग्रामीणों को कैसे मौके पर ही मिली बड़ी राहत? जानिए इस खबर की पूरी जानकारी।

तस्वीर में, डीग के कामां में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर के दौरान टेंट के नीचे मंच पर मौजूद अधिकारी और महिलाएं एक ग्रामीण व्यक्ति को आवासीय भूमि का पट्टा सौंपते हुए नजर आ रहे हैं।
डीग, 13 जुलाई। प्रशासन द्वारा आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर सोमवार को ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हुए हैं। इसी कड़ी में 13 जुलाई को पंचायत समिति कामां के अंतर्गत ग्राम पंचायत करमूका में ग्रामीण सेवा शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय प्रशासन की सजगता के चलते वर्षों से अपने आवास के मालिकाना हक के लिए भटक रहे जरूरतमंद ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर ही त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया गया। शिविर के दौरान दो अलग-अलग परिवारों के आशियाने का सपना उस समय सच हो गया, जब अधिकारियों ने समस्त विधिक औपचारिकताएं पूर्ण कर उन्हें आबादी भूमि के वैध आवासीय पट्टे मौके पर ही सुपुर्द कर दिए।
इस जनकल्याणकारी अभियान के तहत पहली सफलता ग्राम पंचायत करमूका निवासी श्याम लाल पुत्र कन्हैया लाल के प्रकरण में मिली। श्याम लाल लंबे समय से अपनी आवासीय भूमि के वैध विधिक दस्तावेज न होने के कारण अपने मकान के मालिकाना हक को लेकर चिंतित थे। शिविर में तैनात अधिकारियों ने संवेदनशीलता दिखाते हुए उनके आवेदन की जांच की और मौके पर ही आवास का पट्टा जारी कर उन्हें सौंप दिया। अपने आशियाने का पट्टा हाथ में मिलते ही श्याम लाल को वास्तविक स्वामित्व का अहसास हुआ और उनके परिजनों के चेहरे खिल उठे। इस त्वरित राहत के लिए लाभार्थी परिवार और वहां मौजूद प्रबुद्ध ग्रामवासियों ने राज्य सरकार तथा स्थानीय प्रशासन की पहल का आभार व्यक्त किया।
राहत और सुशासन का यह सिलसिला शिविर में आगे बढ़ते हुए ग्राम पंचायत करमूका के गांव लालपुर के मूल निवासी उन्नस पुत्र हाकम के लिए खुशियों की सौगात लेकर आया। उन्नस भी अपने आवास का विधिक पट्टा प्राप्त करने के लिए लंबे समय से प्रयासरत थे। प्रशासन ने उनके प्रकरण का तत्काल तकनीकी व भौतिक सत्यापन किया और कैंप के दौरान ही उन्हें पट्टा वितरित कर वर्षों पुराना मालिकाना हक सौंप दिया। अपने आशियाने का वैध सरकारी दस्तावेज पाकर उन्नस के परिवार की भी बड़ी चिंता हमेशा के लिए दूर हो गई। शिविर में पट्टा वितरण के साथ ही प्रशासन ने ग्रामीणों की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए एक सकारात्मक मिसाल कायम की है।

Pooran Prakash Bansal, Deeg
नाम: पूरण प्रकाश बंसल
पद: पत्रकार (प्रातः काल)
कार्यक्षेत्र: डीग जिला (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): जिला समाचार, क्राइम (अपराध), प्रशासन, और स्वास्थ्य
परिचय
पूरण प्रकाश बंसल राजस्थान के डीग जिले के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में एक पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूरण जी डीग जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों से जिला स्तरीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, स्वास्थ्य व्यवस्था और आपराधिक मामलों (क्राइम) की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को उठाना और खबरों को पूरी प्रामाणिकता के साथ पेश करना उनकी पत्रकारिता की पहचान है।
पत्रकारिता का लंबा अनुभव (Work Experience)
पूरण प्रकाश बंसल जी को मीडिया इंडस्ट्री में दो दशकों से भी अधिक (साल 2004 से) का एक व्यापक और समृद्ध अनुभव है। अपने इस लंबे सफर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े समाचार पत्रों के साथ काम किया है:
- दैनिक जागरण: पत्रकारिता क्षेत्र में लंबा और जमीनी अनुभव।
- राजदूत: वरिष्ठ स्तर पर समाचार कवरेज का अनुभव।
- प्रातः काल: साल 2022 से लगातार 'प्रातः काल' के साथ जुड़कर डीग जिले की कमान संभाल रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा (10वीं पास) पूरी की है। साल 2004 से लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण डीग जिले की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव किसी भी बड़ी डिग्री से कहीं अधिक मजबूत है।
