डीग में राजस्व अधिकारियों की समीक्षा बैठक, लंबित मामलों के निस्तारण पर जोर
जिला कलेक्टर मयंक मनीष ने राजस्व न्यायालयों के लंबित प्रकरणों की समीक्षा कर तहसीलदारों को समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए।

डीग के वी.सी. कक्ष में जिला कलेक्टर मयंक मनीष की अध्यक्षता में आयोजित राजस्व अधिकारियों की समीक्षा बैठक का दृश्य।
डीग जिले में राजस्व सेवाओं को गति देने और न्याय प्रक्रिया को आमजन के लिए सुलभ बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को पंचायत समिति सभागार में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। जिला कलेक्टर मयंक मनीष की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस बैठक में राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली, लंबित प्रकरणों के निपटान और कानून व्यवस्था जैसे संवेदनशील विषयों पर गहन मंथन किया गया। कलेक्टर ने स्पष्ट लहजे में सभी उपखंड अधिकारियों और तहसीलदारों को यह हिदायत दी कि वे अपने न्यायालयों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करें और लंबित मामलों का त्वरित निस्तारण कर न्याय की प्रतीक्षा कर रहे नागरिकों को राहत प्रदान करें।
बैठक के दौरान जिला कलेक्टर ने न्यायालयी कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी व प्रभावी बनाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि मुकदमों में बहस की प्रक्रिया को तीव्र किया जाए और प्रत्येक स्तर पर लंबित प्रकरणों का सटीक डेटा संधारित किया जाए। अस्थाई एवं स्थाई निषेधाज्ञा के मामलों में विशेष तत्परता बरतते हुए उन्होंने इन प्रकरणों का प्राथमिकता से निपटारा करने के आदेश दिए। इसके साथ ही, राजस्थान काश्तकारी अधिनियम की धारा 177 के तहत आने वाले मामलों और लंबे समय से सूचीबद्ध प्रकरणों के निस्तारण में पूर्ण निष्पक्षता और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की बात कही गई।
राजस्व सुधारों की कड़ी में कलेक्टर ने भू-राजस्व अधिनियम की धारा 136 के अंतर्गत आ रहे विवादों के स्थायी समाधान हेतु विशेष रणनीति बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे उन पटवार मंडलों की पहचान करें जहां सर्वाधिक मामले लंबित हैं, ताकि विशेष शिविरों के माध्यम से इनका समयबद्ध निपटारा किया जा सके। इसके अतिरिक्त, अदालती समन की तामीली को समय पर पूरा करने और संबंधित पक्षों से जवाब दाखिल कराने में कोताही न बरतने के कड़े निर्देश दिए गए। ग्रामीण एवं शहरी सेवा शिविरों को प्रभावी बनाते हुए आपसी सहमति वाले बंटवारे के मामलों को मौके पर ही निस्तारित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया, जिसके तहत अगली बैठक तक पेंडेंसी को शून्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
अतिरिक्त जिला कलेक्टर राजकुमार कस्वां ने बैठक के दौरान फार्मर रजिस्ट्री की प्रगति रिपोर्ट पर विस्तृत चर्चा की। कलेक्टर ने सभी अधिकारियों को शिविरों के पूर्व तैयारी (प्री-कैंप) करने और कानून व्यवस्था पर निरंतर नजर रखने के लिए निर्देशित किया। यह बैठक न केवल लंबित राजस्व मामलों के समाधान का एक खाका तैयार करती है, बल्कि जिला प्रशासन की उस प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है जिसके माध्यम से सुशासन और त्वरित न्याय को धरातल पर उतारने का प्रयास किया जा रहा है। आने वाले दिनों में इन निर्देशों का जमीनी असर राजस्व व्यवस्था में सुधार के रूप में दिखाई देगा।

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