डीग के पूंछरी में शरद पूर्णिमा पर महारास लीला का आयोजन, श्रद्धालुओं ने लिया भक्तिरस का आनंद
गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम की उपस्थिति में ब्रज के कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का भावपूर्ण मंचन कर समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाया।

डीग के पूंछरी में शरद पूर्णिमा पर आयोजित महारास लीला में गृह राज्य मंत्री ने की आरती।
डीग, 27 अक्टूबर। जिले के पूंछरी स्थित मुकुट मुखारविंद मंदिर के परिक्रमा मार्ग पर शरद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित महारास लीला में ब्रज की धार्मिक आस्था, लोककला और सांस्कृतिक परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला। भारतीय कला संस्थान एवं श्री बृज लोक कला मंच के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में ब्रज के कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का भावपूर्ण मंचन कर श्रद्धालुओं को भक्तिरस में सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम एवं श्रीनाथजी मंदिर के महंत चंदु मुखिया ने ठाकुरजी को माल्यार्पण कर आरती के साथ किया। इसके बाद प्रस्तुत महारास लीला में भगवान श्रीकृष्ण और गोपियों के प्रेम, भक्ति, श्रद्धा एवं समर्पण से जुड़े मनोहारी दृश्य मंचित किए गए। संगीत, नृत्य और भावपूर्ण अभिनय से सजी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। आयोजन स्थल पर पूरे समय भक्ति और आध्यात्मिकता का वातावरण बना रहा।
गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कार्यक्रम में ब्रज की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए महारास लीला जैसे आयोजनों को ब्रज की समृद्ध विरासत और आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने ब्रज की लोककला और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
शरद पूर्णिमा की महारास लीला का बताया धार्मिक महत्व
श्री बृज लोक कला मंच के निदेशक विष्णु दत्त शास्त्री ने महारास की धार्मिक मान्यता के बारे में बताया कि शरद पूर्णिमा की रात्रि में भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन के वंशीवट पर गोपियों के साथ महारास रचाया था। उन्होंने बताया कि महारास भगवान श्रीकृष्ण और गोपियों के प्रेम, भक्ति एवं आध्यात्मिक समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
विष्णु दत्त शास्त्री ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन ब्रज की प्राचीन लोककला और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। महारास लीला के माध्यम से ब्रज की धार्मिक मान्यताओं और परंपरागत कलाओं की प्रस्तुति ने आयोजन को विशेष स्वरूप प्रदान किया।
अतिथियों का दुपट्टा ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मान
कार्यक्रम के दौरान पंडित विष्णुकांत शास्त्री ने गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम एवं महंत चंदु मुखिया का दुपट्टा ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत एवं सम्मान किया। मुकुट मुखारविंद मंदिर के सेवक मोतीलाल मुखिया, डीग नगर परिषद के उपसभापति प्रदीप कुमार शर्मा उर्फ बंटू, डॉ. रचना सिंह सहित अन्य गणमान्य लोगों का भी सम्मान किया गया।
मुकुट मुखारविंद मंदिर के परिक्रमा मार्ग पर आयोजित इस महारास लीला में धार्मिक आस्था के साथ ब्रज की लोककला और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। आयोजन ने शरद पूर्णिमा के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के मंचन के माध्यम से ब्रज की प्राचीन परंपराओं के संरक्षण और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने के महत्व को रेखांकित किया।

Pooran Prakash Bansal, Deeg
नाम: पूरण प्रकाश बंसल
पद: पत्रकार (प्रातः काल)
कार्यक्षेत्र: डीग जिला (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): जिला समाचार, क्राइम (अपराध), प्रशासन, और स्वास्थ्य
परिचय
पूरण प्रकाश बंसल राजस्थान के डीग जिले के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में एक पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूरण जी डीग जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों से जिला स्तरीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, स्वास्थ्य व्यवस्था और आपराधिक मामलों (क्राइम) की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को उठाना और खबरों को पूरी प्रामाणिकता के साथ पेश करना उनकी पत्रकारिता की पहचान है।
पत्रकारिता का लंबा अनुभव (Work Experience)
पूरण प्रकाश बंसल जी को मीडिया इंडस्ट्री में दो दशकों से भी अधिक (साल 2004 से) का एक व्यापक और समृद्ध अनुभव है। अपने इस लंबे सफर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े समाचार पत्रों के साथ काम किया है:
- दैनिक जागरण: पत्रकारिता क्षेत्र में लंबा और जमीनी अनुभव।
- राजदूत: वरिष्ठ स्तर पर समाचार कवरेज का अनुभव।
- प्रातः काल: साल 2022 से लगातार 'प्रातः काल' के साथ जुड़कर डीग जिले की कमान संभाल रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा (10वीं पास) पूरी की है। साल 2004 से लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण डीग जिले की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव किसी भी बड़ी डिग्री से कहीं अधिक मजबूत है।
