डीग: मकर संक्रांति पर ‘रोशनी’ ने बिखेरी सेवा की चमक, जरूरतमंदों के चेहरों पर आई मुस्कान
डीग में मकर संक्रांति पर 'रोशनी महिला मंडल' ने सेवा की अनूठी मिसाल पेश की। लक्ष्मण मंदिर से लोहा मंडी तक 50 जरूरतमंदों को वस्त्र वितरित किए गए और सरस्वती संस्कार केंद्र के बच्चों को जूते, स्वेटर व मफलर भेंट किए गए। मीरा गोयल और उनकी टीम के इस मानवीय प्रयास ने कड़ाके की ठंड में मानवता की अलख जगाई। पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

डीग। पवित्र नगरी डीग में मकर संक्रांति का पावन पर्व केवल आस्था का संगम नहीं रहा, बल्कि यह मानवता और परोपकार की एक नई मिसाल बनकर उभरा। मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर 'डीग रोशनी महिला मंडल' ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए सेवा और सहयोग का एक ऐसा अनुकरणीय उदाहरण पेश किया, जिसकी नगरभर में सराहना हो रही है। कड़ाके की ठंड के बीच जब लोग अपने घरों में पर्व की खुशियां मना रहे थे, तब रोशनी महिला मंडल की सदस्य सड़कों पर उतरकर अभावों में जीवन बसर करने वालों का सहारा बनीं।
संस्था द्वारा सेवा के इस अभियान का आगाज़ लक्ष्मण मंदिर से किया गया। यहाँ से लेकर लोहा मंडी तक फुटपाथ पर जीवन यापन करने वाले और कठिन परिस्थितियों में श्रम करने वाले लगभग 50 जरूरतमंद लोगों को चिन्हित किया गया। इन लोगों को कड़ाके की ठंड से राहत दिलाने के लिए शॉल, साड़ियां, टोपी, जुराबें और अन्य जीवनोपयोगी सामग्री का वितरण किया गया। सामग्री पाकर जरूरतमंदों के चेहरों पर जो संतोष दिखा, उसने इस पर्व की सार्थकता को और बढ़ा दिया।
सेवा का यह कारवां यहीं नहीं रुका। इसके पश्चात रानी लक्ष्मीबाई सरस्वती संस्कार केंद्र में एक भावपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यहाँ अध्ययनरत नन्हे-मुन्ने बच्चों के साथ रोशनी ग्रुप की सदस्यों ने दीप प्रज्वलन कर विद्या की देवी माँ सरस्वती की वंदना की। बच्चों के भविष्य को संवारने और उन्हें प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से स्वेटर, मोजे, पेन और टॉफियों का वितरण किया गया। इस पुनीत कार्य में अन्य दानदाताओं ने भी बढ़-चढ़कर हाथ बंटाया। श्री सीमेंट लिमिटेड के टेक्निकल ऑफिसर पवन कुमार की ओर से 25 बच्चों को मफलर भेंट किए गए, वहीं श्री बल्लभ राम शर्मा मानव सेवा समिति एवं डीग की ओर से बच्चों को जूते प्रदान किए गए। पर्व की खुशियों को दोगुना करने के लिए हनुमान मंदिर पर सभी बच्चों, श्रद्धालुओं और राहगीरों को गरमा-गरम खिचड़ी का प्रसाद वितरित किया गया।
इस पूरे अभियान को सफल बनाने में संस्था की फाउंडर मीरा गोयल, सचिव मधु जैन और मीडिया प्रभारी राजवती यादव ने मुख्य भूमिका निभाई। साथ ही संस्था की सक्रिय सदस्य आशा शर्मा, कृपा शर्मा, मनोरमा सैनी, राजेश शर्मा मैडम, सुनीता पटवारी, प्रेमलता अग्रवाल, दीपा शर्मा गिरदावर और पूनम खंडेलवाल ने अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराते हुए सेवा कार्यों को गति प्रदान की।
संस्था की संस्थापिका मीरा गोयल ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि निस्वार्थ सेवा ही धर्म का वास्तविक स्वरूप है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दानदाताओं के उदार सहयोग के बिना इस स्तर पर सेवा कार्य करना संभव नहीं था। उन्होंने सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी समाज के वंचित वर्ग के उत्थान के लिए इसी प्रकार एकजुट रहने की अपील की। रोशनी महिला मंडल का यह प्रयास न केवल सराहनीय है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि त्यौहारों की असली खुशी बांटने में ही निहित है।

Pooran Prakash Bansal, Deeg
नाम: पूरण प्रकाश बंसल
पद: पत्रकार (प्रातः काल)
कार्यक्षेत्र: डीग जिला (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): जिला समाचार, क्राइम (अपराध), प्रशासन, और स्वास्थ्य
परिचय
पूरण प्रकाश बंसल राजस्थान के डीग जिले के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में एक पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूरण जी डीग जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों से जिला स्तरीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, स्वास्थ्य व्यवस्था और आपराधिक मामलों (क्राइम) की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को उठाना और खबरों को पूरी प्रामाणिकता के साथ पेश करना उनकी पत्रकारिता की पहचान है।
पत्रकारिता का लंबा अनुभव (Work Experience)
पूरण प्रकाश बंसल जी को मीडिया इंडस्ट्री में दो दशकों से भी अधिक (साल 2004 से) का एक व्यापक और समृद्ध अनुभव है। अपने इस लंबे सफर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े समाचार पत्रों के साथ काम किया है:
- दैनिक जागरण: पत्रकारिता क्षेत्र में लंबा और जमीनी अनुभव।
- राजदूत: वरिष्ठ स्तर पर समाचार कवरेज का अनुभव।
- प्रातः काल: साल 2022 से लगातार 'प्रातः काल' के साथ जुड़कर डीग जिले की कमान संभाल रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा (10वीं पास) पूरी की है। साल 2004 से लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण डीग जिले की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव किसी भी बड़ी डिग्री से कहीं अधिक मजबूत है।
